{"_id":"58407b774f1c1bb61fde7db1","slug":"just-the-name-has-remained-the-same-big-market","type":"story","status":"publish","title_hn":"बस नाम का ही रह गया ‘बड़ा बाजार’ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बस नाम का ही रह गया ‘बड़ा बाजार’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Dec 2016 01:05 AM IST
विज्ञापन
abhiyaan au
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के प्रमुख बाजार ‘बड़ा बाजार’ का नाम यूं ही नहीं पड़ा, बल्कि किसी जमाने में यह शहर का सबसे बड़ा बाजार हुआ करता था। यहां सड़क सत्तर फुट चौड़ी थी, परंतु अतिक्रमण की वजह से सड़क बमुश्किल बीस फुट की ही नजर आती है। इससे कारोबारी और ग्राहक दोनों ही परेशान हैं। दिन में कमोबेश हर समय यहां जाम की स्थिति बनी रहती है।
बड़ा बाजार शहर का पुराना बाजार है। इससे लगी हुई बड़ी सब्जी मंडी है। इसके अलावा किराना, कपड़े, जूते, बर्तन व अन्य सामग्री की बाजार में एक सैकड़ा से अधिक दुकानें हैं। बाजार से अन्य मार्केट भी जुड़ी हुई है। बाजार में आमने - सामने की दुकानों की दूरी सत्तर फुट है और बीच में डिवाइडर है। एक दशक पहले तक केवल डिवाडर के बीच में ही फल - सब्जी के ठेले लगते थे। धीरे - धीरे कर डिवाइडर के दोनों ओर ठेले खड़े होने लगे। अब तो स्थिति यह है कि डिवाइडर के दोनों ओर के साथ - साथ दुकानों के किनारे भी ठेलों की कतारें लगने लगी हैं। यहां तक कि बड़ाबाजार के चौराहा भी ठेलों ने घेर लिया है और दूसरी ओर मुरली मनोहर के मंदिर तक ठेले बढ़ गए हैं। अतिक्रमण की इस आग में घी का काम ऑटो कर रहे हैं, जो दिन भर यहां से सवारियां ढोते रहते हैं और जहां जगह मिली वहीं खड़े होकर सवारियों का इंतजार करने लगते हैं।
इस रेलमपेल की वजह से बाजार का यातायात दिन में कमोबेश हर समय जाम रहता है। लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल है। इससे कारोबार बुरी तरह से प्रभावित बना हुआ है। ग्राहक यहां आने से कतराने लगे हैं। बावजूद, इस समस्या से छुटकारे के उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
अनदेखी हो रही
एक दशक पूर्व बड़ा बाजार को एकदम अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया था, लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। अब तो यहां अतिक्रमण चरम पर है। आग में घी का काम ऑटो कर रहे हैं। शहर का प्रमुख केंद्र होने के बाद भी बाजार का यह हाल है। बाजार की घोर अनदेखी की जा रही है।
- राजेश बिरथरे, अध्यक्ष - बड़ा बाजार व्यापार मंडल
रहना भी है मुश्किल
बड़ा बाजार से दर्जनों मुहल्ले सटे हुए हैं। लेकिन, अब इनमें लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। चौपहिया वाहनों की तो बात दूर है, स्कूटर - बाइक से भी यहां से निकलने में पसीना छूट जाता है। दिन भर ऑटो की रेलमपेल मची रहती है। हैंड ठेले रास्ता घेरे रहते हैं। समाधान के उपाय किए जाना अब जरूरी हो गया है।
- अमरेंद्र जैन, व्यापारी
‘नगर निगम द्वारा रोस्टर तैयार कर जल्द बड़ा बाजार का अतिक्रमण हटाया जाएगा। इसमें पुलिस व प्रशासन का सहयोग भी लिया जाएगा। बाजार की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी।’
- केशव प्रसाद, अतिक्रमण हटाओ प्रभारी - नगर निगम
विज्ञापन
बड़ा बाजार शहर का पुराना बाजार है। इससे लगी हुई बड़ी सब्जी मंडी है। इसके अलावा किराना, कपड़े, जूते, बर्तन व अन्य सामग्री की बाजार में एक सैकड़ा से अधिक दुकानें हैं। बाजार से अन्य मार्केट भी जुड़ी हुई है। बाजार में आमने - सामने की दुकानों की दूरी सत्तर फुट है और बीच में डिवाइडर है। एक दशक पहले तक केवल डिवाडर के बीच में ही फल - सब्जी के ठेले लगते थे। धीरे - धीरे कर डिवाइडर के दोनों ओर ठेले खड़े होने लगे। अब तो स्थिति यह है कि डिवाइडर के दोनों ओर के साथ - साथ दुकानों के किनारे भी ठेलों की कतारें लगने लगी हैं। यहां तक कि बड़ाबाजार के चौराहा भी ठेलों ने घेर लिया है और दूसरी ओर मुरली मनोहर के मंदिर तक ठेले बढ़ गए हैं। अतिक्रमण की इस आग में घी का काम ऑटो कर रहे हैं, जो दिन भर यहां से सवारियां ढोते रहते हैं और जहां जगह मिली वहीं खड़े होकर सवारियों का इंतजार करने लगते हैं।
विज्ञापन
इस रेलमपेल की वजह से बाजार का यातायात दिन में कमोबेश हर समय जाम रहता है। लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल है। इससे कारोबार बुरी तरह से प्रभावित बना हुआ है। ग्राहक यहां आने से कतराने लगे हैं। बावजूद, इस समस्या से छुटकारे के उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
अनदेखी हो रही
एक दशक पूर्व बड़ा बाजार को एकदम अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया था, लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। अब तो यहां अतिक्रमण चरम पर है। आग में घी का काम ऑटो कर रहे हैं। शहर का प्रमुख केंद्र होने के बाद भी बाजार का यह हाल है। बाजार की घोर अनदेखी की जा रही है।
- राजेश बिरथरे, अध्यक्ष - बड़ा बाजार व्यापार मंडल
रहना भी है मुश्किल
बड़ा बाजार से दर्जनों मुहल्ले सटे हुए हैं। लेकिन, अब इनमें लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। चौपहिया वाहनों की तो बात दूर है, स्कूटर - बाइक से भी यहां से निकलने में पसीना छूट जाता है। दिन भर ऑटो की रेलमपेल मची रहती है। हैंड ठेले रास्ता घेरे रहते हैं। समाधान के उपाय किए जाना अब जरूरी हो गया है।
- अमरेंद्र जैन, व्यापारी
‘नगर निगम द्वारा रोस्टर तैयार कर जल्द बड़ा बाजार का अतिक्रमण हटाया जाएगा। इसमें पुलिस व प्रशासन का सहयोग भी लिया जाएगा। बाजार की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी।’
- केशव प्रसाद, अतिक्रमण हटाओ प्रभारी - नगर निगम