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बस प्यार तेरा सच्चा, सब रिश्ते हैं दिखाने के...मेरा भाई तू
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झांसी। भाई छोटा हो या बड़ा, अमीर हो या गरीब... भाई-बहन का प्यार दुनिया का सबसे अनमोल रिश्ता कहा जाता है। एक भाई अपने भाई के लिए जान भी दे सकता है..। उसकी बहन पर विपदा आई हो तो एक पिता की तरह उसे संभाल लेता है। मां-बाप न हो तो भाई ही है जो ससुराल गई बहन को उसके मायके में कभी मां-बाप की कमी महसूस नहीं होने देता। नेशनल ब्रदर डे पर (24 मई) को कुछ ऐसे ही भाइयों की तस्वीर सामने आई जिन्होंने अपने भाई-बहनों की खुशी के लिए अपने सपनों की परवाह नहीं की।
पिता की मौत के बाद परिवार और बहनों की शादी के लिए चकनाचूर कर दिए अपने सपने
झांसी। जिस उम्र में युवा लड़के सिर्फ अपने बारे में ही सोचते हैं उस उम्र में शहर के एक कलाकार ने मां व दो छोटी बहनों की जिंदगी संवारने के लिए अपने सपने चकनाचूर कर दिए। एक पिता की तरह सबकी देखभाल करने वाले तकरीबन 36 साल के इस युवा का नाम बंटी है। चतुरयाना मुहल्ले में रहने वाले चितेरी कलाकार बंटी के पिता रामदास कुशवाहा की मौत 20 वर्ष पहले हुई थी। बुजुर्ग मां के अलावा उनके दो बड़े भाई और दो छोटी बहनें बचीं हैं। कुछ वर्ष बाद बड़े भाई की शादी हुई लेकिन बाद में उनकी भी मौत हो गई। किराए का मकान, पूरे परिवार की जिम्मेदारी और छोटे-मोटे काम के सहारे जिंदगी कैसे चलेगी...इसी उधेड़बुन में बंटी ने जिम्मेदारियों के खातिर अपने सपनों से किनारा कर लिया। जिंदगी चलाने के लिए चितेरी कला को आजीविका बना लिया। धीरे-धीरे दोनों बहनों के हाथ पीले किए। परिवार के लिए एक छोटा सा घर बनाया। बंटी ने खुद शादी नहीं की।
पति को कोरोना ने छीन लिया तो छोटे भाई ने पिता की तरह बहन और मासूमों को जीना सिखाया..
झांसी। मुरारी नगर में रहने वालीं रंजना सिंह बुंदेला की जिंदगी में वर्ष 2021 में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। कोरोना ने उनके पति प्रदीप द्विवेदी को उनसे छीन लिया था। उनकी शादी को महज आठ साल ही हुए थे। दो मासूम बच्चे दीपार्थ (05) और शिवार्थ (03) उनकी गोद में थे। पति का प्रॉपर्टी का कारोबार था लेकिन पति की मौत से बेसुध रंजना को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि वह बच्चों की देखभाल और कारोबार कैसे संभालें। रंजना बताती हैं कि ऐसे समय में उनके 21 साल के छोटे भाई किंग (चंद्रशेखर) ने एक पिता की तरह उन्हें संभाला। उसने अपनी पढ़ाई और कॅरियर की चिंता किए बगैर बच्चों और पति के बिजनेस के साथ उनके सामाजिक कार्यों में उनकी मदद की। रंजना बताती हैं कि सबसे छोटा होने के बाद भी किंग ने उस वक्त उनका साथ दिया जब उनका सब कुछ भगवान ने छीन लिया था। किंग दोनों बच्चों को सामने बैठाकर अहसास दिलाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों..कभी हार नहीं माननी चाहिए। रंजना का मायका मऊरानीपुर में है। वह छह बहनें और दो भाई हैं। पिता जमींदार हैं।
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15 साल की उम्र में महज पांच दिन में मां-बाप को खोने वाला भाई पोंछ रहा छोटी बहन के आंसू
झांसी। बचपन उम्र का एक ऐसा पड़ाव होता है जहां मां-बाप का प्यार बच्चों के लिए बहुत जरूरी होता है। कल्पना कीजिए इस उम्र में महज पांच दिन में किसी बच्चे के सिर से मां-बाप दोनों का साया उठ जाए तो उसकी हालत क्या होगी...? बड़ा गांव गेट बाहर निवासी विनीत (15) बचपन के ऐसे ही मुहाने पर खड़ा है। अप्रैल 2021 में कोरोना के दौरान पांच दिन के भीतर उनके मां-बाप दोनों की मौत हो गई थी। परिवार के नाम पर सिर्फ एक छोटी बहन नंदिनी बची। अब नंदिनी की जिम्मेदारी विनीत के कंधों पर है। इसी वर्ष इंटरमीडिएट पास करने वाले विनीत ने बताया कि 9वीं में पढ़ने वाली नंदिनी मां-पापा को याद करके बहुत रोती है। लेकिन नंदिनी दुखी न हो इसीलिए वह अपनी आंखों में आंसू नहीं आने देता है। उसके बड़े पापा बेनी कुशवाहा और मामा बृजलाल सहारा दे रहे हैं। लेकिन स्कूल जाने पर वह नंदिनी को तैयार होने में और उसका होमवर्क कराने में पूरी मदद करता है और उसे अहसास कराता है कि उसके आंसू पोंछने के लिए वह हमेशा मां-बाप की तरह उसके साथ है।
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पिता की मौत के बाद परिवार और बहनों की शादी के लिए चकनाचूर कर दिए अपने सपने
झांसी। जिस उम्र में युवा लड़के सिर्फ अपने बारे में ही सोचते हैं उस उम्र में शहर के एक कलाकार ने मां व दो छोटी बहनों की जिंदगी संवारने के लिए अपने सपने चकनाचूर कर दिए। एक पिता की तरह सबकी देखभाल करने वाले तकरीबन 36 साल के इस युवा का नाम बंटी है। चतुरयाना मुहल्ले में रहने वाले चितेरी कलाकार बंटी के पिता रामदास कुशवाहा की मौत 20 वर्ष पहले हुई थी। बुजुर्ग मां के अलावा उनके दो बड़े भाई और दो छोटी बहनें बचीं हैं। कुछ वर्ष बाद बड़े भाई की शादी हुई लेकिन बाद में उनकी भी मौत हो गई। किराए का मकान, पूरे परिवार की जिम्मेदारी और छोटे-मोटे काम के सहारे जिंदगी कैसे चलेगी...इसी उधेड़बुन में बंटी ने जिम्मेदारियों के खातिर अपने सपनों से किनारा कर लिया। जिंदगी चलाने के लिए चितेरी कला को आजीविका बना लिया। धीरे-धीरे दोनों बहनों के हाथ पीले किए। परिवार के लिए एक छोटा सा घर बनाया। बंटी ने खुद शादी नहीं की।
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पति को कोरोना ने छीन लिया तो छोटे भाई ने पिता की तरह बहन और मासूमों को जीना सिखाया..
झांसी। मुरारी नगर में रहने वालीं रंजना सिंह बुंदेला की जिंदगी में वर्ष 2021 में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। कोरोना ने उनके पति प्रदीप द्विवेदी को उनसे छीन लिया था। उनकी शादी को महज आठ साल ही हुए थे। दो मासूम बच्चे दीपार्थ (05) और शिवार्थ (03) उनकी गोद में थे। पति का प्रॉपर्टी का कारोबार था लेकिन पति की मौत से बेसुध रंजना को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि वह बच्चों की देखभाल और कारोबार कैसे संभालें। रंजना बताती हैं कि ऐसे समय में उनके 21 साल के छोटे भाई किंग (चंद्रशेखर) ने एक पिता की तरह उन्हें संभाला। उसने अपनी पढ़ाई और कॅरियर की चिंता किए बगैर बच्चों और पति के बिजनेस के साथ उनके सामाजिक कार्यों में उनकी मदद की। रंजना बताती हैं कि सबसे छोटा होने के बाद भी किंग ने उस वक्त उनका साथ दिया जब उनका सब कुछ भगवान ने छीन लिया था। किंग दोनों बच्चों को सामने बैठाकर अहसास दिलाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों..कभी हार नहीं माननी चाहिए। रंजना का मायका मऊरानीपुर में है। वह छह बहनें और दो भाई हैं। पिता जमींदार हैं।
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15 साल की उम्र में महज पांच दिन में मां-बाप को खोने वाला भाई पोंछ रहा छोटी बहन के आंसू
झांसी। बचपन उम्र का एक ऐसा पड़ाव होता है जहां मां-बाप का प्यार बच्चों के लिए बहुत जरूरी होता है। कल्पना कीजिए इस उम्र में महज पांच दिन में किसी बच्चे के सिर से मां-बाप दोनों का साया उठ जाए तो उसकी हालत क्या होगी...? बड़ा गांव गेट बाहर निवासी विनीत (15) बचपन के ऐसे ही मुहाने पर खड़ा है। अप्रैल 2021 में कोरोना के दौरान पांच दिन के भीतर उनके मां-बाप दोनों की मौत हो गई थी। परिवार के नाम पर सिर्फ एक छोटी बहन नंदिनी बची। अब नंदिनी की जिम्मेदारी विनीत के कंधों पर है। इसी वर्ष इंटरमीडिएट पास करने वाले विनीत ने बताया कि 9वीं में पढ़ने वाली नंदिनी मां-पापा को याद करके बहुत रोती है। लेकिन नंदिनी दुखी न हो इसीलिए वह अपनी आंखों में आंसू नहीं आने देता है। उसके बड़े पापा बेनी कुशवाहा और मामा बृजलाल सहारा दे रहे हैं। लेकिन स्कूल जाने पर वह नंदिनी को तैयार होने में और उसका होमवर्क कराने में पूरी मदद करता है और उसे अहसास कराता है कि उसके आंसू पोंछने के लिए वह हमेशा मां-बाप की तरह उसके साथ है।