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जूनियर हाईस्कूल खुले, पहले दिन पहुंचे महज 10 फीसद बच्चे
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बुधवार लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में कक्षा छह के बच्चों को पढ़ातीं शिक्षक। अमर उजाला
झांसी। करीब 11 माह बाद बुधवार को जूनियर हाईस्कूलों में बच्चों की पढ़ाई शुरू की गई। लेकिन पहले दिन महज 10 फीसद बच्चे ही पहुंचे। अधिकांश विद्यालयों में बच्चों के न पहुंचने के चलते शिक्षण कार्य नहीं हुआ। जबकि अभिभावकों का सहमति पत्र न लाने पर कुछ बच्चों को वापस भी किया गया। वहीं अधिकांश अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर असहमति जताई।
बुधवार से कक्षा छह से आठ तक की कक्षाओं में शिक्षण कार्य शुरू किया गया। इस दौरान स्कूलों को कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए खोला गया। सरकारी विद्यालयों में बच्चों को शासन द्वारा तय किए गए शेड्यूल के मुताबिक बुलाया गया। जबकि निजी विद्यालयों में तीनों कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाया गया। इस दौरान कक्षाओं में सोशल डिस्टेेंसिंग, सैनिटाइजेशन का पालन किया गया। जिले के 700 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पहले दिन बच्चों की संख्या 10 फीसद से भी कम रही। जबकि 200 से अधिक निजी विद्यालयों में भी महज 20 फीसद विद्यार्थी ही पहुंचे। उधर, कई अभिभावक कोविड के दौर में बच्चों को विद्यालय भेजने के पक्ष में नजर नहीं आए।
दोस्तों से मिलकर खुश नजर आए बच्चे
11 महीने बाद स्कूल खुलने पर जो भी बच्चे स्कूल पहुंचे, वे अपने दोस्तों से मिलकर खुश नजर आए। बच्चों ने एक दूसरे से लॉकडाउन और कोरोना काल की बातें साझा कीं। इस दौरान स्कूलों में खेल और प्रार्थना की गतिविधि नहीं हुईं।
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बोले अभिभावक
कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐेसे में छोटे बच्चों को स्कूल नहीं बुलाना चाहिए। सत्र समाप्त होने में एक महीना बचा है। मैं तो बच्चों को नहीं भेज रहा। - मोहम्मद ओवेश खान
पूरे साल ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई है। ऑनलाइन पढ़ाई करते-करते बच्चों को दिक्कत हो रही है। अगर स्कूल जिम्मेदारी लेंगे, तो बच्चों को स्कूल भेजेंगे।- सुमन यादव
कोरोना के दौर में बच्चों को बुलाना ठीक नहीं है। छोटे बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। स्कूल सहमति पत्र में पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों पर डाल रहे हैं। - धर्मेंद्र वर्मा
बिटिया को स्कूल भेजा है। सत्र समाप्त होने वाला है। अभी स्कूल खुलने नहीं चाहिए थे। ऑनलाइन परीक्षा कराने के बाद अगले सत्र से विद्यालय खुलते तो ठीक था।- दीपा
विद्यालय में शासन द्वारा तय किए गए शेड्यूूल के हिसाब से कक्षाएं लगाई जा रही हैं। पहले दिन बच्चे कम आए। - मीनू शर्मा, प्रधानाचार्य लक्ष्मी बाई जूनियर हाईस्कूल
पहले दिन करीब 25 फीसदी बच्चे स्कूल आए। कक्षाओं में सही तरीके से सैनिटाइजेशन कराया गया है। - दीपक राय, निदेशक एल्पाइन पब्लिक स्कूल
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बुधवार से कक्षा छह से आठ तक की कक्षाओं में शिक्षण कार्य शुरू किया गया। इस दौरान स्कूलों को कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए खोला गया। सरकारी विद्यालयों में बच्चों को शासन द्वारा तय किए गए शेड्यूल के मुताबिक बुलाया गया। जबकि निजी विद्यालयों में तीनों कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाया गया। इस दौरान कक्षाओं में सोशल डिस्टेेंसिंग, सैनिटाइजेशन का पालन किया गया। जिले के 700 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पहले दिन बच्चों की संख्या 10 फीसद से भी कम रही। जबकि 200 से अधिक निजी विद्यालयों में भी महज 20 फीसद विद्यार्थी ही पहुंचे। उधर, कई अभिभावक कोविड के दौर में बच्चों को विद्यालय भेजने के पक्ष में नजर नहीं आए।
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दोस्तों से मिलकर खुश नजर आए बच्चे
11 महीने बाद स्कूल खुलने पर जो भी बच्चे स्कूल पहुंचे, वे अपने दोस्तों से मिलकर खुश नजर आए। बच्चों ने एक दूसरे से लॉकडाउन और कोरोना काल की बातें साझा कीं। इस दौरान स्कूलों में खेल और प्रार्थना की गतिविधि नहीं हुईं।
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बोले अभिभावक
कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐेसे में छोटे बच्चों को स्कूल नहीं बुलाना चाहिए। सत्र समाप्त होने में एक महीना बचा है। मैं तो बच्चों को नहीं भेज रहा। - मोहम्मद ओवेश खान
पूरे साल ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई है। ऑनलाइन पढ़ाई करते-करते बच्चों को दिक्कत हो रही है। अगर स्कूल जिम्मेदारी लेंगे, तो बच्चों को स्कूल भेजेंगे।- सुमन यादव
कोरोना के दौर में बच्चों को बुलाना ठीक नहीं है। छोटे बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। स्कूल सहमति पत्र में पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों पर डाल रहे हैं। - धर्मेंद्र वर्मा
बिटिया को स्कूल भेजा है। सत्र समाप्त होने वाला है। अभी स्कूल खुलने नहीं चाहिए थे। ऑनलाइन परीक्षा कराने के बाद अगले सत्र से विद्यालय खुलते तो ठीक था।- दीपा
विद्यालय में शासन द्वारा तय किए गए शेड्यूूल के हिसाब से कक्षाएं लगाई जा रही हैं। पहले दिन बच्चे कम आए। - मीनू शर्मा, प्रधानाचार्य लक्ष्मी बाई जूनियर हाईस्कूल
पहले दिन करीब 25 फीसदी बच्चे स्कूल आए। कक्षाओं में सही तरीके से सैनिटाइजेशन कराया गया है। - दीपक राय, निदेशक एल्पाइन पब्लिक स्कूल