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जूनियर डॉक्टरों ने किया कार्य बहिष्कार, एक हजार मरीज लौटे
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार करने के चलते ओपीडी सेवाएं ठप रहीं। पर्चे न बनने से झांसी ही नहीं आसपास के जिलों, मध्य प्रदेश के मिलाकर लगभग एक हजार मरीजों को बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ा। जूनियर डॉक्टरों की मांग है कि जल्द नीट काउंसलिंग कराई जाए।
रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने शुक्रवार देर रात इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी विभागीय कार्यों का बहिष्कार करने का फैसला कर लिया था। शनिवार को सुबह से ही जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में अपनी सेवाएं नहीं दीं। पर्चा काउंटर भी बंद करा दिया। ऐसे में मरीजों के ओपीडी पर्चे नहीं बन सके। झांसी समेत आसपास के जनपदों के मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ा। वहीं, रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. निखिल मिश्रा का कहना है कि नीट 2021 की काउंसलिंग में लगातार देरी हो रही है। शासन की ओर से प्रवेश प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। छह-सात माह में विभिन्न विभागों में रेजीडेंट डॉक्टरों की संख्या काफी कम हो गई है। इस कारण विभागों में भर्ती मरीजों की पूरी जिम्मेदारी बचे हुए रेजीडेंट डाक्टरों के ऊपर आ गई है। ऐसी परिस्थिति में वार्ड, ओटी और ओपीडी में काम करने में दिक्कत हो रही है। सरकार को जल्द नीट काउंसलिंग कराने का फैसला करना चाहिए।
इमरजेंसी में बने 172 पर्चे, 42 हुए भर्ती
ओपीडी सेवाएं ठप होने के चलते दर्द से कराह और गंभीर रोग से जूझ रहे मरीजों ने इमरजेंसी पहुंचकर पर्चा बनवाया। ओपीडी समय तक इमरजेंसी में 172 पर्चे बने। साथ ही 42 रोगियों को भर्ती भी किया गया। जो कि सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा है।
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मरीज ने बयां किया दर्द
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अपनी पत्नी चंदा के साथ दिखाने के लिए दतिया से आया हूं। डेढ़ घंटे में मेडिकल पहुंच पाया। यहां आकर पता चला कि डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार है। पर्चे तक नहीं बन सके। - घनश्याम दास, दतिया।
अपनी एक महीने की पोती को इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आई हूं। यहां पर्चे नहीं बर रहे हैं। कोई सुनवाई करने वाला भी नहीं है। बच्ची को प्राइवेट अस्पताल ले जा रही हूं। - फूलवती, दतिया।
आंख दिखानी थी मगर पर्चे ही नहीं बन रहे हैं। जबकि, मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर ने 20 दिन बाद वापस दिखाने के लिए बोला था। अब रविवार को भी ओपीडी बंद रहेगी। - हरदयाल सोनी, बीएचईएल।
कुत्ते ने काट लिया है। इसलिए मेडिकल कॉलेज में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आया हूं। पर्चे न बनने से कैसे इंजेक्शन लग सकेगा। वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए थी। - विनोद कुमार, पिछोर।
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रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने शुक्रवार देर रात इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी विभागीय कार्यों का बहिष्कार करने का फैसला कर लिया था। शनिवार को सुबह से ही जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में अपनी सेवाएं नहीं दीं। पर्चा काउंटर भी बंद करा दिया। ऐसे में मरीजों के ओपीडी पर्चे नहीं बन सके। झांसी समेत आसपास के जनपदों के मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ा। वहीं, रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. निखिल मिश्रा का कहना है कि नीट 2021 की काउंसलिंग में लगातार देरी हो रही है। शासन की ओर से प्रवेश प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। छह-सात माह में विभिन्न विभागों में रेजीडेंट डॉक्टरों की संख्या काफी कम हो गई है। इस कारण विभागों में भर्ती मरीजों की पूरी जिम्मेदारी बचे हुए रेजीडेंट डाक्टरों के ऊपर आ गई है। ऐसी परिस्थिति में वार्ड, ओटी और ओपीडी में काम करने में दिक्कत हो रही है। सरकार को जल्द नीट काउंसलिंग कराने का फैसला करना चाहिए।
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इमरजेंसी में बने 172 पर्चे, 42 हुए भर्ती
ओपीडी सेवाएं ठप होने के चलते दर्द से कराह और गंभीर रोग से जूझ रहे मरीजों ने इमरजेंसी पहुंचकर पर्चा बनवाया। ओपीडी समय तक इमरजेंसी में 172 पर्चे बने। साथ ही 42 रोगियों को भर्ती भी किया गया। जो कि सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा है।
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मरीज ने बयां किया दर्द
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अपनी पत्नी चंदा के साथ दिखाने के लिए दतिया से आया हूं। डेढ़ घंटे में मेडिकल पहुंच पाया। यहां आकर पता चला कि डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार है। पर्चे तक नहीं बन सके। - घनश्याम दास, दतिया।
अपनी एक महीने की पोती को इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आई हूं। यहां पर्चे नहीं बर रहे हैं। कोई सुनवाई करने वाला भी नहीं है। बच्ची को प्राइवेट अस्पताल ले जा रही हूं। - फूलवती, दतिया।
आंख दिखानी थी मगर पर्चे ही नहीं बन रहे हैं। जबकि, मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर ने 20 दिन बाद वापस दिखाने के लिए बोला था। अब रविवार को भी ओपीडी बंद रहेगी। - हरदयाल सोनी, बीएचईएल।
कुत्ते ने काट लिया है। इसलिए मेडिकल कॉलेज में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आया हूं। पर्चे न बनने से कैसे इंजेक्शन लग सकेगा। वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए थी। - विनोद कुमार, पिछोर।