{"_id":"69a97bf200231c49150655bb","slug":"jhansi-workers-taken-to-a-factory-in-maharashtra-for-work-were-held-hostage-2026-03-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi: मजदूरी के नाम पर महाराष्ट्र ले जाकर श्रमिकों को बनाया बंधक, विधायक व प्रशासन के हस्तक्षेप पर हुए मुक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi: मजदूरी के नाम पर महाराष्ट्र ले जाकर श्रमिकों को बनाया बंधक, विधायक व प्रशासन के हस्तक्षेप पर हुए मुक्त
Thu, 05 Mar 2026 06:23 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: दीपक महाजन
Updated Thu, 05 Mar 2026 06:23 PM IST
सार
गरौठा विधायक जवाहर राजपूत ने इस मामले से जिला प्रशासन व श्रम विभाग को अवगत कराया था। विभाग के हस्तक्षेप के बाद बंधक सात श्रमिक घर लौट आए हैं।
विज्ञापन
महाराष्ट्र से लौटे श्रमिक
- फोटो : स्वयं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बरुआसागर क्षेत्र के श्रमिकों को मजदूरी का लालच देकर महाराष्ट्र के बीड जिले ले जाया गया, जहां उनसे गन्ना कटवाने का काम तो कराया गया, लेकिन मजदूरी नहीं दी गई। आरोप है कि पैसे मांगने पर उनके साथ मारपीट की गई और कुछ को बंधक बनाकर रखा गया। परिजनों की सूचना पर गरौठा विधायक ने जिला प्रशासन और श्रम विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। इसके बाद झांसी प्रशासन की ओर से महाराष्ट्र के बीड जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया। हस्तक्षेप के बाद सात श्रमिक बंधकमुक्त होकर बुधवार को झांसी लौट आए और परिजनों के साथ होली मनाई।
वनगुवां निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि करीब चार महीने पहले अशोक नामक व्यक्ति गांव के कई लोगों को रोजाना 500 रुपये मजदूरी और साप्ताहिक भुगतान का आश्वासन देकर बीड ले गया था। वहां सभी को खेत के पास झुग्गियों में ठहराया गया, जहां बिजली-पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी। आरोप है कि सुबह आठ से शाम पांच बजे तक काम का वादा किया गया था, लेकिन सुबह छह बजे से रात दस बजे तक गन्ना कटवाया जाता था। मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। पैसे मांगने पर मारपीट की जाती थी। ठेकेदार और उसके परिजन श्रमिकों पर नजर रखते थे, ताकि कोई भाग न सके। बताया गया कि 33 श्रमिक किसी तरह वहां से निकल आए, लेकिन सात लोगों को बंधक बनाकर रखा गया। उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए गए थे, जिससे परिजनों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। गरौठा विधायक जवाहर राजपूत ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर तत्काल जिला प्रशासन और श्रम विभाग से बात की गई थी। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद सभी सात श्रमिक सकुशल लौट आए हैं।
40 हजार के बदले मिले सिर्फ दो हजार
सुरेश के मुताबिक, उसकी करीब 40 हजार रुपये मजदूरी बनती थी, लेकिन रेलवे स्टेशन छोड़ते समय ठेकेदार ने सिर्फ दो हजार रुपये दिए और बाकी रकम बाद में भेजने की बात कही।
विज्ञापन
ये श्रमिक हुए मुक्त
बीड से मुक्त होकर लौटे श्रमिकों में सुरेश कुमार, रामरती, अनीता, धर्मेंद्र, संजय, भगवानदास और रेखा शामिल हैं।
यह बोले अधिकारी
उप श्रमायुक्त किरन मिश्रा ने बताया कि गरौठा विधायक का पत्र मिलते ही बीड जिले के उप श्रमायुक्त को पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया गया था। जिलाधिकारी की ओर से भी वहां के डीएम को पत्र भेजा गया। सभी श्रमिक झांसी लौट आए हैं। यदि मजदूरी न मिलने की लिखित शिकायत मिलती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मनरेगा के बावजूद दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है मजदूरों को
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) लागू है। इसके बावजूद जिले के मजदूरों को दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाना पड़ता है। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं। कई ग्राम पंचायतों में साल भर लगातार काम उपलब्ध नहीं हो पाता। मनरेगा में मजदूरी का भुगतान अक्सर देर से होता है, जिससे वे निजी ठेकेदारों के साथ बाहर जाने को मजबूर हो जाते हैं। जानकारों का मानना है कि यदि समय पर भुगतान, नियमित कार्य और स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त रोजगार सृजन सुनिश्चित किया जाए, तो यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
विज्ञापन
वनगुवां निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि करीब चार महीने पहले अशोक नामक व्यक्ति गांव के कई लोगों को रोजाना 500 रुपये मजदूरी और साप्ताहिक भुगतान का आश्वासन देकर बीड ले गया था। वहां सभी को खेत के पास झुग्गियों में ठहराया गया, जहां बिजली-पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी। आरोप है कि सुबह आठ से शाम पांच बजे तक काम का वादा किया गया था, लेकिन सुबह छह बजे से रात दस बजे तक गन्ना कटवाया जाता था। मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। पैसे मांगने पर मारपीट की जाती थी। ठेकेदार और उसके परिजन श्रमिकों पर नजर रखते थे, ताकि कोई भाग न सके। बताया गया कि 33 श्रमिक किसी तरह वहां से निकल आए, लेकिन सात लोगों को बंधक बनाकर रखा गया। उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए गए थे, जिससे परिजनों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। गरौठा विधायक जवाहर राजपूत ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर तत्काल जिला प्रशासन और श्रम विभाग से बात की गई थी। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद सभी सात श्रमिक सकुशल लौट आए हैं।
विज्ञापन
40 हजार के बदले मिले सिर्फ दो हजार
सुरेश के मुताबिक, उसकी करीब 40 हजार रुपये मजदूरी बनती थी, लेकिन रेलवे स्टेशन छोड़ते समय ठेकेदार ने सिर्फ दो हजार रुपये दिए और बाकी रकम बाद में भेजने की बात कही।
विज्ञापन
ये श्रमिक हुए मुक्त
बीड से मुक्त होकर लौटे श्रमिकों में सुरेश कुमार, रामरती, अनीता, धर्मेंद्र, संजय, भगवानदास और रेखा शामिल हैं।
यह बोले अधिकारी
उप श्रमायुक्त किरन मिश्रा ने बताया कि गरौठा विधायक का पत्र मिलते ही बीड जिले के उप श्रमायुक्त को पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया गया था। जिलाधिकारी की ओर से भी वहां के डीएम को पत्र भेजा गया। सभी श्रमिक झांसी लौट आए हैं। यदि मजदूरी न मिलने की लिखित शिकायत मिलती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मनरेगा के बावजूद दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है मजदूरों को
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) लागू है। इसके बावजूद जिले के मजदूरों को दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाना पड़ता है। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं। कई ग्राम पंचायतों में साल भर लगातार काम उपलब्ध नहीं हो पाता। मनरेगा में मजदूरी का भुगतान अक्सर देर से होता है, जिससे वे निजी ठेकेदारों के साथ बाहर जाने को मजबूर हो जाते हैं। जानकारों का मानना है कि यदि समय पर भुगतान, नियमित कार्य और स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त रोजगार सृजन सुनिश्चित किया जाए, तो यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।