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झांसी में औषधियों पर होगा शोध, देश भर को मिलेंगी कारगर दवाएं
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झांसी। औषधि परीक्षण प्रयोगशाला के साथ फार्मेसी वाला देश का एकमात्र केंद्रीय आयुर्वेदिक अनुसंधान संस्थान झांसी में है। नई इमारत और नई आधुनिक मशीनें मिलने के बाद अब यहां देश भर से औषधियां एकत्र कर शोध के लिए भेजी जाएंगी। रिसर्च का काम पूरा होने के बाद फार्मेसी में औषधियों के जरिए नई दवाओं की खोज की जाएगी। इससे गंभीर रोगों तक का सुलभ इलाज मरीजों को मिल सकेगा।
मौजूदा समय में देश में लगभग 36 आयुर्वेदिक शोध संस्थान हैं। इनमें से लखनऊ, ईटानगर, गुवाहटी, भुवनेश्वर, कलकत्ता, मुंबई, नागपुर, विजयवाड़ा, जम्मू, पटियाला, दिल्ली ग्वालियर समेत 24 संस्थानों के अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी चल रही है। जहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज सेवाएं लेने जाते हैं। वहीं, ईटानगर, गुवाहटी, नागपुर, पोर्टब्लेयर में आदिवासी स्वास्थ्य सुरक्षा परियोजना संचालित होने से डॉक्टरों की टीम डोर-टू-डोर जाकर उन्हें दिनचर्या में सुधार लाने समेत रोगों को दूर करती है। इन संस्थानों में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थापित आईएमपीसीएल फार्मेसी द्वारा दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसी एकमात्र फार्मेसी होने से आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में दवाओं की आपूर्ति कम हो पा रही है। वहीं, कोलकाता, चेन्नई और पटियाला में बनी फार्मेसी सिर्फ अनुसंधान दवाएं ही बनाती हैं। इसके मद्देनजर झांसी में शुरू होने वाली फार्मेसी अब इन चिकित्सालयों में दवाओं की कमी पूरी करेगी। झांसी की फार्मेसी से शोध संस्थानों और चिकित्सालयों में दवाओं की सप्लाई होगी।
पाउडर, टैबलेट, कैप्सूल, क्वाथ सभी प्रकार की दवाएं बनेंगी
फार्मेसी में विभिन्न प्रकार की दवाएं बनाई जाएंगी। यहां पर पाउडर, टैबलेट, कैप्सूल, क्वाथ सभी प्रकार की दवाएं बनेंगी। यहां जोड़ रोग, मांसपेशियों में असरदार अश्वगंधा चूर्ण, यौन रोगों के इलाज में इस्तेमाल आने वाला शतावरी चूर्ण, गैस, आंखों की रोशनी, बाल झड़ने से रोकने में फायदेमंद त्रिफला चूर्ण, खांसी, मौसमी बुखार व अस्थमा के लिए लाभदायक कंटकारी चूर्ण आदि तैयार कराया जाएगा। वहीं, नींद न आने में फायदेमंद सर्पगंधा, लीवर की बीमारी, त्वचा रोग के लिए कत्था चूर्ण, मधुमेह रोगियों के लिए गुड़मार, ह्दय रोगियों के लिए अर्जुन चूर्ण, शरीर में चुस्ती-फुर्ती लाने को बाबूलासव, पलास छार व बीज, अमलवी चूर्ण, गोछुरु चूर्ण आदि बनाए जाएंगे।
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मौजूदा समय में देश में लगभग 36 आयुर्वेदिक शोध संस्थान हैं। इनमें से लखनऊ, ईटानगर, गुवाहटी, भुवनेश्वर, कलकत्ता, मुंबई, नागपुर, विजयवाड़ा, जम्मू, पटियाला, दिल्ली ग्वालियर समेत 24 संस्थानों के अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी चल रही है। जहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज सेवाएं लेने जाते हैं। वहीं, ईटानगर, गुवाहटी, नागपुर, पोर्टब्लेयर में आदिवासी स्वास्थ्य सुरक्षा परियोजना संचालित होने से डॉक्टरों की टीम डोर-टू-डोर जाकर उन्हें दिनचर्या में सुधार लाने समेत रोगों को दूर करती है। इन संस्थानों में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थापित आईएमपीसीएल फार्मेसी द्वारा दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसी एकमात्र फार्मेसी होने से आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में दवाओं की आपूर्ति कम हो पा रही है। वहीं, कोलकाता, चेन्नई और पटियाला में बनी फार्मेसी सिर्फ अनुसंधान दवाएं ही बनाती हैं। इसके मद्देनजर झांसी में शुरू होने वाली फार्मेसी अब इन चिकित्सालयों में दवाओं की कमी पूरी करेगी। झांसी की फार्मेसी से शोध संस्थानों और चिकित्सालयों में दवाओं की सप्लाई होगी।
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पाउडर, टैबलेट, कैप्सूल, क्वाथ सभी प्रकार की दवाएं बनेंगी
फार्मेसी में विभिन्न प्रकार की दवाएं बनाई जाएंगी। यहां पर पाउडर, टैबलेट, कैप्सूल, क्वाथ सभी प्रकार की दवाएं बनेंगी। यहां जोड़ रोग, मांसपेशियों में असरदार अश्वगंधा चूर्ण, यौन रोगों के इलाज में इस्तेमाल आने वाला शतावरी चूर्ण, गैस, आंखों की रोशनी, बाल झड़ने से रोकने में फायदेमंद त्रिफला चूर्ण, खांसी, मौसमी बुखार व अस्थमा के लिए लाभदायक कंटकारी चूर्ण आदि तैयार कराया जाएगा। वहीं, नींद न आने में फायदेमंद सर्पगंधा, लीवर की बीमारी, त्वचा रोग के लिए कत्था चूर्ण, मधुमेह रोगियों के लिए गुड़मार, ह्दय रोगियों के लिए अर्जुन चूर्ण, शरीर में चुस्ती-फुर्ती लाने को बाबूलासव, पलास छार व बीज, अमलवी चूर्ण, गोछुरु चूर्ण आदि बनाए जाएंगे।
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