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Jhansi: भेल के ट्रांसफार्मरों की विदेशों में भी डिमांड... इन देशों में करेगा निर्यात, 6900 करोड़ का आर्डर
Mon, 25 Aug 2025 08:07 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 25 Aug 2025 08:07 PM IST
सार
भेल में तैयार ट्रांसफार्मरों की देश के साथ विदेशों में भी मांग बढ़ी है। भेल अफसरों के मुताबिक झांसी इकाई में खासतौर से ट्रांसफार्मर बनाए जाते हैं।
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झांसी बीएचईएल
- फोटो : संवाद
विस्तार
यूरोप समेत अफ्रीकन देशों को भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) चालू वित्तीय वर्ष में भी उच्च क्षमता युक्त ट्रांसफार्मर का निर्यात करेगा। झांसी इकाई के पास चालू वित्तीय वर्ष के लिए 6900 करोड़ रुपये का वर्कआर्डर है। इसमें करीब तीस फीसदी हिस्सा विदेशों में आपूर्ति करने का है।
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भेल में तैयार ट्रांसफार्मरों की देश के साथ विदेशों में भी मांग बढ़ी है। भेल अफसरों के मुताबिक झांसी इकाई में खासतौर से ट्रांसफार्मर बनाए जाते हैं। यहां पावर ट्रांसफार्मर, रेक्टिफायर ट्रांसफार्मर, ट्रैक्शन ट्रांसफार्मर, ईएसपी, ड्राई टाइप ट्रांसफार्मर का निर्माण होता है। इनकी विदेशों में भी सर्वाधिक मांग है।
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भेल में तैयार ट्रांसफार्मर
- फोटो : संवाद
इन देशों में होंगे निर्यात
जर्मनी, हालैंड, पोलैंड, फिनलैंड समेत तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया आदि देशों में इनका निर्यात होता है। चालू वित्तीय वर्ष में भी इन देशों से ट्रांसफार्मरों की मांग आई है। यह ट्रांसफार्मर इन देशों को भेजे जाएंगे। भेल अफसरों का कहना है दुनियाभर में आपूर्ति किए गए बिजली उत्पादन उपकरणों का स्थापित आधार 197 गीगावॉट से विदेशों के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में भी इन ट्रांसफार्मर की मांग बढ़ी है। जनसंपर्क अधिकारी बहादुर सिंह का कहना है कि भेल का आर्डर बुक बेहतरीन है। कंपनी के पास 6900 करोड़ रुपये का आर्डर है। इनमें से अधिकांश काम ट्रांसफार्मर से ही जुड़े हुए हैं।
झांसी इकाई का टर्नओवर 47 फीसदी बढ़ा
झांसी भेल इकाई के टर्नओवर में पिछले पांच साल के दौरान 47 फीसदी का इजाफा दर्ज हुआ। कंपनी ने स्थानीय इकाई के लिए 1400 करोड़ रुपये का टर्नओवर का लक्ष्य तय किया है। भेल अफसरों का कहना है कि स्थानीय इकाई विद्युत उत्पादन उपकरण के निर्माण के साथ ही लोकोमोटिव के भी निर्माण कर रहा है। इसके अलावा झांसी इकाई में ही वंदेभारत की नए कोच भी बनाए जाने का करार हुआ है। इसके एक हिस्से का निर्माण टीटागढ़ में होगा, जबकि एक भाग का निर्माण यहां किया जाएगा।
जर्मनी, हालैंड, पोलैंड, फिनलैंड समेत तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया आदि देशों में इनका निर्यात होता है। चालू वित्तीय वर्ष में भी इन देशों से ट्रांसफार्मरों की मांग आई है। यह ट्रांसफार्मर इन देशों को भेजे जाएंगे। भेल अफसरों का कहना है दुनियाभर में आपूर्ति किए गए बिजली उत्पादन उपकरणों का स्थापित आधार 197 गीगावॉट से विदेशों के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में भी इन ट्रांसफार्मर की मांग बढ़ी है। जनसंपर्क अधिकारी बहादुर सिंह का कहना है कि भेल का आर्डर बुक बेहतरीन है। कंपनी के पास 6900 करोड़ रुपये का आर्डर है। इनमें से अधिकांश काम ट्रांसफार्मर से ही जुड़े हुए हैं।
झांसी इकाई का टर्नओवर 47 फीसदी बढ़ा
झांसी भेल इकाई के टर्नओवर में पिछले पांच साल के दौरान 47 फीसदी का इजाफा दर्ज हुआ। कंपनी ने स्थानीय इकाई के लिए 1400 करोड़ रुपये का टर्नओवर का लक्ष्य तय किया है। भेल अफसरों का कहना है कि स्थानीय इकाई विद्युत उत्पादन उपकरण के निर्माण के साथ ही लोकोमोटिव के भी निर्माण कर रहा है। इसके अलावा झांसी इकाई में ही वंदेभारत की नए कोच भी बनाए जाने का करार हुआ है। इसके एक हिस्से का निर्माण टीटागढ़ में होगा, जबकि एक भाग का निर्माण यहां किया जाएगा।