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Jhansi: कैमाशन पहाड़ी काटे जाने का मामला पहुंचा एनजीटी, 16 अप्रैल को होगी सुनवाई

Sat, 31 Jan 2026 11:35 AM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Sat, 31 Jan 2026 11:35 AM IST
सार

प्रशासन को दस्तावेज जमा करने के लिए तीन हफ्ते का वक्त दिया गया है। एनजीटी ने 16 अप्रैल को फिर से सुनवाई तय की है।

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Jhansi: The matter of cutting of Kaimanshan hill reaches NGT
कैमासन पहाड़ी काटकर होता निर्माण कार्य। - फोटो : संवाद

विस्तार

मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित 500 फीट ऊंची कैमाशन की पहाड़ी को काटकर किए जा रहे निर्माण का मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक पहुंच गया है। हाल में दिल्ली स्थित प्रधान पीठ में इसकी सुनवाई हुई थी। प्रशासन को दस्तावेज जमा करने के लिए तीन हफ्ते का वक्त दिया गया है। एनजीटी ने 16 अप्रैल को फिर से सुनवाई तय की है। याचिका बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय ने लगाई थी। उन्होंने एनजीटी के सामने स्थल के ताजा फोटो भी प्रस्तुत किए।
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याचिकाकर्ता ने एनजीटी को बताया कि कैमाशन पहाड़ी झांसी महायोजना में प्रखंडीय पार्क, हरित क्षेत्र के रूप में आरक्षित है। बावजूद इसके यहां खुलेआम पहाड़ी काटकर नर्सिंग होम, पैथोलॉजी, मेडिकल स्टोर, व्यावसायिक एवं आवासीय निर्माण कराए जा रहे हैं। झांसी विकास प्राधिकरण ने अवैध निर्माण रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जबकि जेडीए के पास निर्माण रोकने, सील करने और तोड़ने तक के अधिकार हैं।
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याचिका में जेडीए, नगर निगम और जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि जो कुछ फोटो में दिखाई दे रहा है वह किसी कागजी विवाद का नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत का सबूत है। इतने बड़े पैमाने पर पहाड़ी कटान और निर्माण प्रशासनिक संरक्षण के बिना संभव नहीं है। उल्लेख किया कि उक्त पहाड़ी में कई एकड़ भूमि नगर निगम झांसी की है, जिसे नियमों को ताक पर रखकर समतल किया जा रहा है और उस पर अवैध निर्माण कराए जा रहे हैं। यह न केवल झांसी महायोजना में आरक्षित प्रखंडीय क्षेत्र की अवहेलना है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग और पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आता है। जेडीए ने जवाब दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा।
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