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झांसी: जब नाना ने कहा था...बुंदेलखंड में नाना पाटेकर नहीं, इसलिए सूखा है, समाजसेवी संजय सिंह ने साझा कीं यादें
Thu, 08 Oct 2026 04:04 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Thu, 08 Oct 2026 04:04 PM IST
सार
संजय सिंह के मुताबिक, एक बैठक में नाना पाटेकर ने बुंदेलखंड के सूखे को लेकर बेहद मार्मिक बात कही थी। उन्होंने कहा था, ‘बुंदेलखंड हर साल इसलिए सूखा प्रभावित होता है, क्योंकि यहां नाना पाटेकर नहीं हैं।’
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समाजसेवी संजय सिंह।
- फोटो : स्वयं
विस्तार
अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर सुनकर समाजसेवी संजय सिंह भावुक हो गए। इन दिनों बुंदेलखंड में ‘युवा जलवायु परिवर्तन संदेश यात्रा’ के तहत साइकिल यात्रा कर रहे संजय सिंह ने नाना पाटेकर से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर केवल एक प्रख्यात अभिनेता नहीं थे, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति गहरी संवेदना रखने वाले व्यक्ति और सच्चे पर्यावरण साथी थे।
संजय सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह नाना पाटेकर के निधन की खबर मिली तो मन बहुत भारी हो गया। इस समय वह सागर जिले में यात्रा पर हैं। खबर सुनकर उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में जब वर्ष 2014-15 में भीषण सूखा पड़ा था, तब उनकी और योगेंद्र यादव की नाना पाटेकर से मुलाकात हुई थी। महाराष्ट्र में जल संकट और सूखे से निपटने के लिए नाना के किए जा रहे काम से वे बेहद प्रभावित थे।
संजय सिंह के मुताबिक, एक बैठक में नाना पाटेकर ने बुंदेलखंड के सूखे को लेकर बेहद मार्मिक बात कही थी। उन्होंने कहा था, ‘बुंदेलखंड हर साल इसलिए सूखा प्रभावित होता है, क्योंकि यहां नाना पाटेकर नहीं हैं।’ नाना ने महाराष्ट्र में जल संकट और सूखे से निपटने के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा लगाया था। उन्होंने कहा कि नाना हमेशा प्रकृति के बेहद करीब रहे। अपनी बात बेबाकी से कहने के साथ ही वह अपने गहरे कटाक्षों के जरिये समाज और व्यवस्था को आईना दिखाते रहे। उनका व्यक्तित्व उन्हें हमेशा प्रेरित करता रहा।
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संजय सिंह ने बताया कि नाना से उनकी कई गहरी यादें जुड़ी हैं। दोनों के बीच यह वादा भी हुआ था कि नाना एक दिन बुंदेलखंड आएंगे। उन्होंने बताया कि एक बार वह और नाना पाटेकर मदुरई से दिल्ली की एक ही फ्लाइट में साथ यात्रा कर रहे थे। चेन्नई में विमान के ठहराव के दौरान नाना वहां उतर गए और फिर मुंबई चले गए, जबकि उन्हें दिल्ली आना था।
संजय सिंह ने कहा कि नाना पाटेकर जिस तरह लगातार पर्यावरण और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश देते रहे, वह आज भी प्रेरणादायी है। उनके मन में जमीन और समाज की समस्याओं की गहरी समझ और सच्चाई थी। उनके निधन से देश ने एक प्रख्यात सिने स्टार के साथ-साथ एक सच्चा पर्यावरण साथी भी खो दिया है। उन्होंने कहा, “नाना पाटेकर के साथ जुड़ी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”
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संजय सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह नाना पाटेकर के निधन की खबर मिली तो मन बहुत भारी हो गया। इस समय वह सागर जिले में यात्रा पर हैं। खबर सुनकर उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में जब वर्ष 2014-15 में भीषण सूखा पड़ा था, तब उनकी और योगेंद्र यादव की नाना पाटेकर से मुलाकात हुई थी। महाराष्ट्र में जल संकट और सूखे से निपटने के लिए नाना के किए जा रहे काम से वे बेहद प्रभावित थे।
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संजय सिंह के मुताबिक, एक बैठक में नाना पाटेकर ने बुंदेलखंड के सूखे को लेकर बेहद मार्मिक बात कही थी। उन्होंने कहा था, ‘बुंदेलखंड हर साल इसलिए सूखा प्रभावित होता है, क्योंकि यहां नाना पाटेकर नहीं हैं।’ नाना ने महाराष्ट्र में जल संकट और सूखे से निपटने के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा लगाया था। उन्होंने कहा कि नाना हमेशा प्रकृति के बेहद करीब रहे। अपनी बात बेबाकी से कहने के साथ ही वह अपने गहरे कटाक्षों के जरिये समाज और व्यवस्था को आईना दिखाते रहे। उनका व्यक्तित्व उन्हें हमेशा प्रेरित करता रहा।
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संजय सिंह ने बताया कि नाना से उनकी कई गहरी यादें जुड़ी हैं। दोनों के बीच यह वादा भी हुआ था कि नाना एक दिन बुंदेलखंड आएंगे। उन्होंने बताया कि एक बार वह और नाना पाटेकर मदुरई से दिल्ली की एक ही फ्लाइट में साथ यात्रा कर रहे थे। चेन्नई में विमान के ठहराव के दौरान नाना वहां उतर गए और फिर मुंबई चले गए, जबकि उन्हें दिल्ली आना था।
संजय सिंह ने कहा कि नाना पाटेकर जिस तरह लगातार पर्यावरण और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश देते रहे, वह आज भी प्रेरणादायी है। उनके मन में जमीन और समाज की समस्याओं की गहरी समझ और सच्चाई थी। उनके निधन से देश ने एक प्रख्यात सिने स्टार के साथ-साथ एक सच्चा पर्यावरण साथी भी खो दिया है। उन्होंने कहा, “नाना पाटेकर के साथ जुड़ी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”