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Jhansi: अनियमित तरीके से फर्मों में बांट दिए 99.76 लाख, पीडब्ल्यूडी में स्वीकृत राशि से किया गया अधिक भुगतान
Tue, 10 Feb 2026 11:24 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 10 Feb 2026 11:24 AM IST
सार
सांसद ने इन फर्मों के भुगतान में इस्तेमाल हुए वाउचर नंबर भी शिकायत के साथ दर्ज कराए हैं। मामला सामने आने के बाद विभाग में खलबली मच गई है।
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भ्रष्टाचार
- फोटो : AI
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विस्तार
लोक निर्माण विभाग में स्वीकृति राशि से कई गुना अधिक भुगतान कर दिए जाने का मामला उजागर हुआ है। पांच फर्मों के बीच 99.76 लाख रुपये का अनियमित भुगतान हुआ। इनमें से अधिकांश फर्म झांसी की हैं। भारी-भरकम अनियमित भुगतान का मामला होने से इसकी जांच झांसी सर्किल के मुख्य अभियंता को सौंपी गई। उन्होंने इसकी जांच पूरी कर ली है। इसकी गोपनीय रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। अब कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
इस मामले का भंडाफोड़ लोकसभा सांसद कृष्णा देवी शिव शंकर पटेल (बांदा) की ओर से किया गया। उन्होंने पिछले माह मुख्यमंत्री से इस मामले की शिकायत करते हुए बताया कि सहायक अभियंता स्तर पर कई फर्मों के साथ फर्जी अनुबंध गठित हुए। इस आधार पर इन फर्म को स्वीकृत राशि से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया। मेसर्स बुंदेलखंड कांस्ट्रक्शन को सर्वाधिक चार अनुबंध करके 38,45,528 रुपये का भुगतान किया गया। इसी तरह मेसर्स सुरेश चंद्र गुप्ता के साथ चार अनियमित अनुबंध करके उनको 33,45,761 रुपये का भुगतान किया गया। इनके अलावा विजयेंद्र सिंह, राम किशुन रायकवार, रमेश प्रसाद, मातृभूमि कांस्ट्रक्शन को भी लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। इन कार्यों में माप पुस्तिका और स्वीकृत मदों से अलग खर्च दर्शाकर भुगतान निकाला गया।
सांसद ने इन फर्मों के भुगतान में इस्तेमाल हुए वाउचर नंबर भी शिकायत के साथ दर्ज कराए। यह मामला सामने आने के बाद खलबली मच गई। इस मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी व वित्तीय जांच कराई गई। मुख्य अभियंता राजनाथ गुप्ता का कहना है कि जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। उन्होंने जांच रिपोर्ट को गोपनीय बताते हुए इसके निष्कर्ष बताने से इन्कार कर दिया।
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इस मामले का भंडाफोड़ लोकसभा सांसद कृष्णा देवी शिव शंकर पटेल (बांदा) की ओर से किया गया। उन्होंने पिछले माह मुख्यमंत्री से इस मामले की शिकायत करते हुए बताया कि सहायक अभियंता स्तर पर कई फर्मों के साथ फर्जी अनुबंध गठित हुए। इस आधार पर इन फर्म को स्वीकृत राशि से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया। मेसर्स बुंदेलखंड कांस्ट्रक्शन को सर्वाधिक चार अनुबंध करके 38,45,528 रुपये का भुगतान किया गया। इसी तरह मेसर्स सुरेश चंद्र गुप्ता के साथ चार अनियमित अनुबंध करके उनको 33,45,761 रुपये का भुगतान किया गया। इनके अलावा विजयेंद्र सिंह, राम किशुन रायकवार, रमेश प्रसाद, मातृभूमि कांस्ट्रक्शन को भी लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। इन कार्यों में माप पुस्तिका और स्वीकृत मदों से अलग खर्च दर्शाकर भुगतान निकाला गया।
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सांसद ने इन फर्मों के भुगतान में इस्तेमाल हुए वाउचर नंबर भी शिकायत के साथ दर्ज कराए। यह मामला सामने आने के बाद खलबली मच गई। इस मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी व वित्तीय जांच कराई गई। मुख्य अभियंता राजनाथ गुप्ता का कहना है कि जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। उन्होंने जांच रिपोर्ट को गोपनीय बताते हुए इसके निष्कर्ष बताने से इन्कार कर दिया।
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