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Jhansi: एक साल से कक्ष बनकर तैयार, नहीं आ सकी एमआरआई मशीन, निजी सेंटर जाने को मजबूर मरीज
Mon, 16 Mar 2026 09:40 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 16 Mar 2026 09:40 AM IST
सार
मरीजों को निजी सेंटर पर जाकर जांच करानी पड़ रही है। जनप्रतिनिधियों की ओर से भी नई मशीन लगवाने के लिए कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है।
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मेडिकल कॉलेज, झांसी
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक साल से कक्ष बनकर तैयार है। इसके बावजूद अब तक नई एमआरआई मशीन नहीं आ सकी है। मरीजों को निजी सेंटर पर जाकर जांच करानी पड़ रही है। जनप्रतिनिधियों की ओर से भी नई मशीन लगवाने के लिए कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है।
मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2008-09 में एमआरआई मशीन लगी थी, जो 14 साल की आयु पूरी करने के बाद अक्रियाशील हो गई। इसके बाद कॉलेज में उच्च क्षमता की नई मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) मशीन लगाने के लिए जनवरी 2025 में नए कक्ष का निर्माण शुरू हुआ। काम पूरा होने के बाद मार्च तक नई मशीन आने की उम्मीद थी लेकिन पूरा साल बीत जाने के बावजूद मशीन नहीं आई। चूंकि, कॉलेज प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों की एमआरआई जांच के लिए एक निजी सेंटर से अनुबंध कर रखा है। ऐसे में यहां पर रोगियों की काफी भीड़ हो जाती है। इसलिए कई मरीजों को दो दिन बाद भी नंबर मिलता है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शिवकुमार का कहना है कि जल्द ही मशीन आने की संभावना है।
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मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2008-09 में एमआरआई मशीन लगी थी, जो 14 साल की आयु पूरी करने के बाद अक्रियाशील हो गई। इसके बाद कॉलेज में उच्च क्षमता की नई मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) मशीन लगाने के लिए जनवरी 2025 में नए कक्ष का निर्माण शुरू हुआ। काम पूरा होने के बाद मार्च तक नई मशीन आने की उम्मीद थी लेकिन पूरा साल बीत जाने के बावजूद मशीन नहीं आई। चूंकि, कॉलेज प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों की एमआरआई जांच के लिए एक निजी सेंटर से अनुबंध कर रखा है। ऐसे में यहां पर रोगियों की काफी भीड़ हो जाती है। इसलिए कई मरीजों को दो दिन बाद भी नंबर मिलता है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शिवकुमार का कहना है कि जल्द ही मशीन आने की संभावना है।
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