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Jhansi News: ई-जागृति का फायदा उठा रहे झांसी के लोग, तीन साल में 280 मामले पंजीकृत

Sat, 22 Aug 2026 02:23 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Sat, 22 Aug 2026 02:23 AM IST
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Jhansi residents benefit from e-awakening, registering 280 cases in three years
झांसी। उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के लिए अब उपभोक्ता आयोग के चक्कर लगाने और हर मामले में अधिवक्ता की मदद लेने की जरूरत नहीं है। झांसी निवासियों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है। ई-जागति के जरिये तीन वर्षों में झांसी के लोगों ने 280 मामले पंजीकृत कराए हैं। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग का ई-जागृति पोर्टल उपभोक्ता विवादों की ऑनलाइन शिकायत दाखिल करने और उनकी सुनवाई की प्रक्रिया को आसान बना रहा है। उपभोक्ता घर बैठे ऑनलाइन पंजीकरण कर शिकायत, जरूरी दस्तावेज और अन्य विवरण अपलोड कर सकते हैं। इस डिजिटल व्यवस्था से उपभोक्ता न्याय तक पहुंच आसान हुई है।
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ई-जागृति को 2023 में उपभोक्ता आयोगों के लिए शुरू किया गया था। पुराने ई-दाखिल अन्य डिजिटल सिस्टम को एकीकृत कर राष्ट्रव्यापी एकीकृत प्लेटफॉर्म के तौर पर 1 जनवरी, 2025 से काम करना आरंभ किया। इसके जरिये उपभोक्ता मामलों की फाइलिंग, सुनवाई, केस मैनेजमेंट और आदेश की प्रक्रिया को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म मिला। पोर्टल से वस्तु और सेवा से जुड़े विवादों की उपभोक्ता शिकायत कर सकते हैं। इसमें अनुचित व्यापार व्यवहार, ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े विवाद, बीमा क्लेम का भुगतान नहीं होना, सेवा में कमी जैसे मामले शामिल हैं। अध्यक्ष अमर पाल सिंह का कहना है कि ई-जागृति से उपभोक्ताओं को कार्यालय जाने की जरूरत कम हुई है। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से संबंधित मामले अब ई-जागृति के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकृत किए जा सकते हैं।
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ऐसे करें ऑनलाइन पंजीकरण
ई-जागृति पर पहले उपभोक्ता को अपना पंजीकरण करना होता है। इसके बाद शिकायत से संबंधित जानकारी भरकर संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए जाते हैं। मामले के क्षेत्राधिकार के अनुसार शिकायत जिला, राज्य अथवा राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में दाखिल होती है। डिजिटल प्रक्रिया में वर्चुअल सुनवाई और केस की ऑनलाइन निगरानी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
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पांच लाख तक कोई कोर्ट फीस नहीं
उपभोक्ता आयोग में कोर्ट फीस दावे की रकम के आधार पर नहीं, बल्कि वस्तु या सेवा के लिए उपभोक्ता द्वारा भुगतान की गई राशि के आधार पर निर्धारित होती है। मौजूदा नियमों के अनुसार पांच लाख रुपये तक की भुगतान राशि पर कोई कोर्ट फीस नहीं है। पांच लाख से अधिक और 10 लाख रुपये तक 200 रुपये, 10 से 20 लाख रुपये तक 400 रुपये और 20 से 50 लाख रुपये तक 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित है।
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