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झांसी ः खतरे के बाद भी नाव पर बाइक रखकर नदी पार कर रहे लोग
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खिलारा। मऊरानीपुर तहसील में उर नदी के किनारे बसे आधा दर्जन गांवों के अलावा मध्य प्रदेश के कई गांवों के लोगों को सड़क मार्ग से तहसील मुख्यालय पहुंचने के लिए तीस किलो मीटर लंबा रास्ता तय कर जाना पड़ता है। दस किलो मीटर दूरी बचाने के लिए लोग बाइक के साथ नाव से उस पार चले जाते हैं। इसके बाद वहां से बाइक से तहसील मुख्यालय चले जाते हैं। बाइक समेत नाव से नदी पार करने के लिए नाविक दस रुपये लेता है। रोज डेढ़ सौ लोग नाव से उस पार जाते हैं। लोगों का कहना है कि इससे समय के साथ ही पेट्रोल भी बचता है।
बिरगुआं, खकौरा, कुअरपुरा, भानपुरा, परा, अजोखर आदि गांव उर नदी के किनारे बसे हैं। पहले पुल न बना होने से लोगों को उस पार जाने के लिए सिर्फ नाव का ही सहारा लेना पड़ता था लेकिन बाद में कदौरा घाट पर पुल बना दिया गया। इससे सड़क मार्ग से तहसील मुख्यालय तीस किलो मीटर है। बिरगुआं घाट से उर नदी पार कर तहसील मुख्यालय जाने के लिए 20 किलो मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। पहले सरकार की तरफ से नावों का संचालन किया जाता था लेकिन पुल बनने के बाद नावें बंद करा दी गईं लेकिन प्राइवेट लोग नावों का संचालन कर रहे हैं। बरसात में तो नदी का काफी फैलाव हो जाता है। इस समय भी नदी की चौड़ाई दो से ढाई सौ मीटर है। लोगों ने बताया कि इन गांवों लगभग पांच हजार लोग रहते हैं। यहां से काफी लोग रोज मऊरानीपुर काम करने के लिए जाते हैं। तमाम लोग बाइक और साइकिलों से नाव से उस पार जाते हैं। एक नाव में कई बाइक रखने से हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
नाव चालक मथुरा प्रसाद रैकवार, तुलाराम, रामप्रसाद रैकवार आदि ने बताया कि कई सालों से नाव चलाकर गुजारा कर रहे हैं। सुबह लोग तहसील मुख्यालय जाने के लिए नाव से उस पार जाते हैं। शाम को लौटने के बाद नाव से इस पार आते हैं। इस तरह से रोज ढाई सौ से तीन सौ कमा लेते हैं। इसी से गुजारा चल रहा है। बिरगुआं उर नदी घाट पर पुल का निर्माण नहीं होने से लड़कियों को पढ़ाई के लिए जाने में भी दिक्कत होती है। लोगों ने बताया कि यातायात की दिक्कत होने से तमाम लोग तो यहां से पलायन कर दूसरी जगह बस गए हैं।
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बिरगुआं, खकौरा, कुअरपुरा, भानपुरा, परा, अजोखर आदि गांव उर नदी के किनारे बसे हैं। पहले पुल न बना होने से लोगों को उस पार जाने के लिए सिर्फ नाव का ही सहारा लेना पड़ता था लेकिन बाद में कदौरा घाट पर पुल बना दिया गया। इससे सड़क मार्ग से तहसील मुख्यालय तीस किलो मीटर है। बिरगुआं घाट से उर नदी पार कर तहसील मुख्यालय जाने के लिए 20 किलो मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। पहले सरकार की तरफ से नावों का संचालन किया जाता था लेकिन पुल बनने के बाद नावें बंद करा दी गईं लेकिन प्राइवेट लोग नावों का संचालन कर रहे हैं। बरसात में तो नदी का काफी फैलाव हो जाता है। इस समय भी नदी की चौड़ाई दो से ढाई सौ मीटर है। लोगों ने बताया कि इन गांवों लगभग पांच हजार लोग रहते हैं। यहां से काफी लोग रोज मऊरानीपुर काम करने के लिए जाते हैं। तमाम लोग बाइक और साइकिलों से नाव से उस पार जाते हैं। एक नाव में कई बाइक रखने से हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
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नाव चालक मथुरा प्रसाद रैकवार, तुलाराम, रामप्रसाद रैकवार आदि ने बताया कि कई सालों से नाव चलाकर गुजारा कर रहे हैं। सुबह लोग तहसील मुख्यालय जाने के लिए नाव से उस पार जाते हैं। शाम को लौटने के बाद नाव से इस पार आते हैं। इस तरह से रोज ढाई सौ से तीन सौ कमा लेते हैं। इसी से गुजारा चल रहा है। बिरगुआं उर नदी घाट पर पुल का निर्माण नहीं होने से लड़कियों को पढ़ाई के लिए जाने में भी दिक्कत होती है। लोगों ने बताया कि यातायात की दिक्कत होने से तमाम लोग तो यहां से पलायन कर दूसरी जगह बस गए हैं।
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