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झांसी में 800 का ऑक्सीमीटर चार हजार और 1800 का थर्मामीटर 4500 में खरीदने वालों पर कार्रवाई तय, शासन तक गूंज रहा मामला

Tue, 08 Sep 2020 01:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2020 01:03 AM IST
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Jhansi oxymeter coruption matter
Jhansi oxymeter coruption matter
झांसी। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह द्वारा झांसी में 800 का ऑक्सीमीटर चार हजार और 1800 में मिलने वाला थर्मामीटर साढ़े चार हजार रुपये में खरीदने का मामला उठाए जाने से ‘कोविड घपला’ एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। लखनऊ में उन्होंने इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में एसआईटी बनाकर कराने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर आम आदमी पार्टी के आंदोलन करने की चेतावनी दी है। इससे जनपद में एक बार फिर यह मामला तेजी पकड़ गया है। उधर, मुख्य विकास अधिकारी का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।
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कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए 23 जून को अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने शासनादेश के जरिए हर ग्राम पंचायतों को चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद के निर्देश दिए थे। किट में एक पल्स ऑक्सीमीटर, एक इंफ्रारेड थर्मामीटर, 500 पीस थ्री लेयर मास्क, सौ सर्जिकल ग्लव्स, पांच लीटर सैनिटाइजर समेत फेस शील्ड शामिल थी। पंचायती राज विभाग के सूत्रों के अनुसार शासनादेश जारी होते ही मजबूत पकड़ रखने वाली एजेंसी ने घुसपैठ शुरू कर दी। शासनादेश के उलट केंद्रीय खरीद की तैयारी शुरू हो गई लेकिन मामले की भनक मंडल के एक आला अफसर को लग गई। इस वजह से रास्ता बदलकर आखिरकार इसकी खरीद ब्लॉक स्तर पर कराई गई।
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सूत्रों के अनुसार 74 लाख के इन चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद के लिए कोई भी टेंडर नहीं कराया गया। टेंडर न होने से मनमाने तरीके से उपकरणों के दाम तय किए गए। इस मामले को अमर उजाला ने 22 जुलाई के अंक में ‘कोरोना से बचाव की आड़ में लाखों का घपला’ शीर्षक से प्रमुखता से उठाया था। अब आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस मामले को उठाया है। उन्होंने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर घोटाले के ताबड़तोड़ आरोप जड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि झांसी की ग्राम पंचायतों में अलग-अलग दाम पर ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर खरीदा गया है। तमाम कंपनियों से इसकी सप्लाई करवाई गई। कोविड के नाम पर उपकरण खरीद में बड़ा घोटाला हुआ है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि इस सबसे बड़े संकट के दौर में घोटाला करना श्मशान में दलाली खाने जैसा है।
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महंगे ऊपर से चाइनीज उपकरण खरीदे
एक थर्मल स्कैनर 3500-5000 रुपये तक खरीदे गए, जबकि ब्रांडेड थर्मल स्कैनर अधिकतम दो हजार रुपये में बाजार में मौजूद हैं। खास बात ये है कि खरीदे गए थर्मल स्कैनर चाइनीज हैं। इसी तरह, ऑक्सीमीटर बाजार की कीमत से ढाई गुना अधिक दाम पर खरीदे गए। यह भी ब्रांडेड नहीं हैं। एक थ्री प्लाई मास्क लगभग 720 रुपये में खरीदे गए। ग्लव्स और फेस शील्ड की भी बाजार से ऊंचे दामों पर खरीद की गई। इसी तरह, एक किट 15 हजार रुपये से अधिक कीमत में खरीदी गई। जबकि, इसकी कीमत सात हजार से अधिक नहीं बताई जा रही है। खरीद के बाद बिल भी प्रधान और सचिवों के नाम से ही बनवाए गए। कई प्रधान तो राजी हो गए लेकिन कुछ ने धांधली का आरोप लगाते हुए विरोध कर दिया। कई सचिव भी इस तरह की खरीद से संतुष्ट नहीं हैं।
उपकरणों की सप्लाई करने वाली कंपनी का भुगतान अभी नहीं किया गया है। मामले की जांच चल रही है। - शैलेष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।
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