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Jhansi: मेडिकल कॉलेज की लापरवाही...जीवनरक्षक दवा नहीं, दो माह से एंटी-डिप्थीरिया सीरम शून्य

Wed, 24 Dec 2025 01:03 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Wed, 24 Dec 2025 01:03 PM IST
सार

मेडिकल काॅलेज में एडीएस इंजेक्शन न होने के खुलासे से मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को अपने स्तर से इंजेक्शन खरीदने के लिए पत्र लिखा था। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन ने नहीं खरीदे।
 

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Jhansi: Negligence of medical college... no life saving medicine, no anti-diphtheria serum for two months
इंजेक्शन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झांसी रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल काॅलेज की गंभीर लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। जानलेवा बीमारी डिप्थीरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाला एंटी-डिप्थीरिया सीरम (एडीएस) बीते 17 अक्टूबर से ही खत्म है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कराई। हीलाहवाली व्यवस्था के कारण मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
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17 अक्तूबर से इंजेक्शन का स्टॉक शून्य
मेडिकल काॅलेज में एडीएस इंजेक्शन न होने के अमर उजाला के खुलासे से मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा। सुबह से अधिकारी अपना पक्ष उच्चाधिकारियों के सामने रखने के लिए फाइलें पलटते रहे। पता चला कि सेंटर मेडिकल स्टोर्स डिपो (सीएमएसडी) में 17 अक्तूबर से ही इंजेक्शन का स्टॉक शून्य है। स्वास्थ्य विभाग ने 11 नवंबर को मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को अपने स्तर से इंजेक्शन खरीदने के लिए पत्र लिखा था। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन ने नहीं खरीदे।
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आठ-दस इंजेक्शन हैं
सीएमएस डाॅ. सचिन माहुर का कहना है कि मेडिकल कॉलेज की खरीद सूची में डिप्थीरिया का इंजेक्शन नहीं है। इसलिए कॉलेज खरीद नहीं सकता है। यह तो सीएमओ को ही देने होते हैं। इस पर सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय का कहना है कि फिलहाल हमारे पास आठ-दस इंजेक्शन हैं। यदि कॉलेज प्रशासन मांगेगा तो दे देंगे।
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सर्द मौसम में बढ़ जाते हैं मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डिप्थीरिया गंभीर संक्रामक बीमारी है, जिसमें समय पर एंटी-डिप्थीरिया सीरम न मिलने पर मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। सर्द मौसम में बच्चों में इस बीमारी के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका रहती है, ऐसे समय में जीवनरक्षक दवा का अभाव बेहद चिंताजनक है।

बामौर ब्लॉक में 87 फीसदी बच्चों का ही हो सका टीकाकरण
झांसी।जरूरत के मुताबिक एएनएम की संख्या नहीं होने की वजह से बामौर ब्लॉक में 87 फीसदी बच्चों का ही टीकाकरण हो सका है जबकि डिप्थीरिया, काली खांसी और टिटनेस का टीका अनिवार्य है, जो राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत सभी बच्चों को निशुल्क दिया जाना है।



यह हैं एएनएम की संख्या
स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जब तक पर्याप्त संख्या में एएनएम नहीं होंगी तब तक टीकाकरण का ग्राफ शत-प्रतिशत नहीं हो सकता है। बामौर में 45 एएनएम के सापेक्ष अब 35 एएनएम हैं। जब मोती कटरा में दो बच्चों की डिप्थीरिया से मौत हुई तो सीएमओ ने कुछ एएनएम को गुरसराय ब्लॉक भेजा, जिससे टीकाकरण का ग्राफ कुछ बढ़ा है। एक जनवरी से 30 नवंबर 2025 तक बामौर ब्लॉक में 87 फीसदी, गुरसराय ब्लॉक में 93.46 फीसदी, मऊरानीपुर ब्लॉक में 91.07 फीसदी, बड़ागांव ब्लॉक में 91.14 फीसदी, बबीना में 97.8 फीसदी, चिरगांव में 90.96 फीसदी, बंगरा में 97.23 फीसदी और मोंठ में 99.42 फीसदी टीकाकरण हुआ है।
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