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Jhansi News: आजादी की लड़ाई के दस साल बाद अस्तित्व में आ गई थी झांसी नगर पालिका

Mon, 12 Dec 2022 11:54 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 12 Dec 2022 11:54 PM IST
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Jhansi municipality came into existence ten years after the freedom struggle
झांसी। आजादी की लड़ाई के दस साल बाद ही झांसी में नगर प्रशासन की नींव पड़ गई थी। ब्रिटिश हुकूमत ने वर्ष 1867 में सबसे पहले झांसी को का नोटिफिकेशन जारी किया था। उस दौर में स्थानीय प्रशासन स्थानीय प्राधिकारी के माध्यम से ही चलता था। इसके बाद 47 साल तक स्थानीय प्राधिकारी के माध्यम से ही झांसी शहर का शासन चलता रहा।
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नगर निगम के दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 1914 में पहले नगर पालिका अध्यक्ष के तौर पर ब्रिटिश अफसर पीएम वॉयस मनोनीत किए गए। दो साल तक उनका कार्यकाल रहा। वर्ष 1916 में बाल गंगाधर तिलक ने होम रूल आंदोलन आरंभ करके स्वशासन की मांग की। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने झांसी में यह व्यवस्था लागू करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर सहाय को पालिका अध्यक्ष बनाया। शंकर सहाय झांसी के सबसे पहले भारतीय नगर पालिका अध्यक्ष रहे। एक साल बाद गंगा सहाय पालिका अध्यक्ष बनाए गए। वर्ष 1921 तक वह इस पद पर रहे। इसके बाद मुस्लिम लीग प्रतिनिधि के तौर पर एमएम याकूब अध्यक्ष बनाए गए। वर्ष 1923 तक वह अध्यक्ष रहे। इसके बाद सबसे लंबा कार्यकाल गोविंद खेर का रहा। वह लगातार 9 साल तक पालिका के अध्यक्ष रहे। वर्ष 1932 में जगदीश सहाय अध्यक्ष बने। वर्ष 1936 में दोबारा एमएम याकूब अध्यक्ष बन गए। वर्ष 1938 में एपी सक्सेना एवं वर्ष 1945 में एमएल मेहरा अध्यक्ष चुने गए थे।
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वर्ष 1954 में बिहारी लाल वशिष्ठ, वर्ष 1958 में बाबूलाल उदैनिया ने अध्यक्ष की कुर्सी संभाली। उदैनिया को भी दो कार्यकाल तक काम करने का मौका मिला। इसके बाद दो साल तक कुर्सी खाली रही। वर्ष 1964 में बृजेंद्र शर्मा अध्यक्ष बनाए गए। तीन साल तक वह यहां के पालिका अध्यक्ष रहे।
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वर्ष 1967 में इंद्र प्रकाश कपूर को अध्यक्ष बनाया गया। वर्ष 1970 में कैलाश चंद्र जैन एवं वर्ष 1972 में बाबू लाल तिवारी अध्यक्ष बने। वर्ष 1976 से वर्ष 1988 तक कोई अध्यक्ष नहीं रहा। वर्ष 1989 में रमेश कुमार शर्मा एवं वर्ष 1995 में डा. धन्नू लाल गौतम अध्यक्ष रहे। डा.धन्नू लाल गौतम नगर पालिका के आखिरी अध्यक्ष रहे। इसके बाद नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा दे दिया गया।

सभासद ही चुनते थे नगर पालिका अध्यक्ष
आजादी से पहले ही नगर महापालिका अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होता था। मुस्लिम लीग प्रतिनिधि से लेकर अन्य सभी अध्यक्षों का चुनाव सभासद ही करते रहे लेकिन, वर्ष 1999 में अध्यक्ष चुनने का अधिकार जनता को दे दिया। इस चुनाव में भाजपा से डा. धन्नू लाल गौतम चुनाव जीतकर लगातार दूसरी बाद अध्यक्ष बनने में कामयाब रहे थे। वर्ष 2002 में नगर निगम घोषित होने के तीन साल तक चुनाव नहीं कराए गए।
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