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Jhansi: सोशल मीडिया के प्रेमजाल में फंसकर घर छोड़ रहे नाबालिग, भटकने के बाद लौट रहे परिवार के पास

Sat, 08 Aug 2026 02:59 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Sat, 08 Aug 2026 02:59 PM IST
सार

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में 228 किशोर-किशोरियों ने घर छोड़ दिया था। इनमें कई बच्चे ऐसे भी थे, जो मोबाइल इस्तेमाल करने से रोकने पर नाराज होकर घर से निकल गए थे।

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Jhansi: Minors leaving home after getting ensnared in social media romances
बाल कल्याण समिति, झांसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुई दोस्ती अब कई किशोर-किशोरियों को घर छोड़ने तक मजबूर कर रही है। वर्चुअल रिश्तों के आकर्षण में घर से निकले बच्चे जब हकीकत से रूबरू होते हैं तो उनके सामने न ठिकाना होता है और न भविष्य की कोई राह। ऐसे बच्चों को बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन काउंसलिंग के जरिये परिवार से तो मिला देती है लेकिन तब तक उनकी पढ़ाई पर गहरा असर पड़ चुका होता है।
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चाइल्ड हेल्पलाइन और रेलवे स्टेशन से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में 228 किशोर-किशोरियों ने घर छोड़ दिया था। इनमें कई बच्चे ऐसे भी थे, जो मोबाइल इस्तेमाल करने से रोकने पर नाराज होकर घर से निकल गए थे। चालू वर्ष में जनवरी से अब तक 133 बच्चे और किशोर घर छोड़ चुके हैं। बाद में काउंसलिंग के जरिये उन्हें परिवार के महत्व का एहसास कराया गया और परिजनों के सुपुर्द किया गया।
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उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक मामले
वर्ष 2025 में ट्रेनों और रेलवे प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिले बच्चों में उत्तर प्रदेश के 138 मामले सामने आए, जो सबसे अधिक हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश के 43, बिहार के 12, हरियाणा के 8, महाराष्ट्र के 6, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 5-5, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के 3-3 तथा गुजरात, पंजाब और असम के एक-एक मामले दर्ज हुए। वहीं, वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक उत्तर प्रदेश के 83, मध्य प्रदेश के 19, बिहार के 9, महाराष्ट्र के 8, दिल्ली के 4, राजस्थान और हरियाणा के 2-2 तथा तेलंगाना का एक मामला सामने आया है। इन सभी बच्चों को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने रेलवे स्टेशनों पर संदिग्ध हालत में पाया, जिसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन ने उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया।
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केस-1: चाइल्ड हेल्प लाइन के सुपरवाइजर बिलाल उलहक के अनुसार, जून 2025 में छत्तीसगढ़ की 14 वर्षीय किशोरी की इंस्टाग्राम पर एक युवक से दोस्ती हुई। दोनों घर से भागकर मुंबई पहुंच गए और करीब छह महीने साथ रहे। बाद में यात्रा के दौरान झांसी रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए। बालिका को बाल कल्याण समिति की काउंसलिंग के बाद उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।

केस-2: जालौन की दो सगी बहनों की इंस्टाग्राम पर कुछ युवकों से दोस्ती हो गई। उनके झांसे में आकर दोनों स्कूल जाने की बात कहकर घर से निकल गईं। झांसी रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध स्थिति में मिलने पर उन्हें संरक्षण में लिया गया और बाद में बाल कल्याण समिति के माध्यम से उनके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
हर वर्ष बड़ी संख्या में किशोर-किशोरियां सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर घर छोड़ देते हैं। बाल कल्याण समिति और संबंधित एजेंसियों के प्रयास से उन्हें सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाया जाता है। - सुरेंद्र सिंह पटेल, जिला प्रोबेशन अधिकारी



रेलवे स्टेशन या अन्य स्थानों पर संदिग्ध अवस्था में मिलने वाले बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। उनकी काउंसलिंग कर परिवार से मिलवाया जाता है। ऐसी घटनाओं के पीछे सोशल मीडिया की भूमिका काफी हद तक सामने आ रही है। - राजीव शर्मा, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति


बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से ऐसे बचाएं
18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नियमित नजर रखें।
अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट या संदेश स्वीकार न करने की सीख दें।
बच्चों से रोज खुलकर बातचीत करें और उनकी समस्याएं सुनें।
मोबाइल और सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए समय सीमा तय करें।
किसी भी ऑनलाइन दोस्त से बिना परिवार की जानकारी के मिलने या घर छोड़ने के लिए मना करें।
यदि बच्चा घर छोड़ दे या लापता हो जाए तो तुरंत पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें।
बच्चों को बताएं कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर बात या व्यक्ति विश्वसनीय नहीं होता।
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