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झांसी में कहां से आ गए इतने विधायक और पूर्व विधायक

Wed, 12 Feb 2020 02:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 12 Feb 2020 02:18 AM IST
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jhansi me kha se aa gye itne mla or ex mla
गाड़ी के शीशे पर लिखी विधायक नाम की पट्टी।
झांसी में कहां से आ गए इतने विधायक और पूर्व विधायक
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झांसी। जिले में तमाम गाड़ियां ऐसी घूम रहीं हैं जिन पर विधायक और पूर्व विधायक लिखा हुआ है। कहने को जिले में चार विधायक और करीब इतने ही पूर्व विधायक हैं। लेकिन 50 से अधिक गाड़ियों पर एमएलए और पूर्व एमएलए व अन्य पद लिखा देखकर लगता है कि आसपास के जिलों और प्रदेशों के विधायक भी झांसी आ गए हैं। इन वाहन स्वामियों की नंबर प्लेट पर नंबर भले न हों, बड़ा-बड़ा पदनाम जरूर लिखा रहता है। ऐसे वाहन अधिकतर थानों, एसएसपी दफ्तर, कलक्ट्रेट व अन्य सरकारी विभागों के आस-पास देखे जा सकते हैं।
इन वाहनों में सवार लोगों का रौब देखकर न तो परिवहन विभाग कार्रवाई करता है और न ही ट्रैफिक पुलिस। सड़कों पर चलने और वाहन चलाने वाले आम लोग भी इनकी मनमानी से काफी असहज रहते हैं। इनकी हनक टोल प्लाजाओं तक पर रहती है। न ये टोल टैक्स का भुगतान करते हैं न इनसे मांगने की कोई हिम्मत जुटा पाता है। कई गाड़ियों पर नंबर छोटा और पदनाम बड़ा लिखा हुआ है। कुछ ने कलात्मक नंबर लिखवा रखे हैं तो कुछ की प्लेट चमकदार होने से नंबर ही स्पष्ट नहीं दिख रहे हैं। कइयों ने तो नंबर प्लेट पर ही अपनी पूरी पहचान लिख रखी है।
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वर्जन
वाहन पर दोनों प्लेटों पर नंबर लिखवाना अनिवार्य है। प्लेट पर पदनाम और नंबरों की डिजाइन बदलना भी मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है। ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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सत्येंद्र कुमार, एआरटीओ
सांसद-विधायक समर्थक तक लिखवाने से नहीं चूक रहे
किसी गाड़ी पर आपको सांसद प्रतिनिधि, सांसद या विधायक समर्थक, पार्षद, पूर्व पार्षद, प्रधान, प्रधान पति, किसी राजनीतिक दल के किसी प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष, सदस्य आदि लिखे वाहन भी जिले में खूब मिलते हैं। इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि देश की राजनीति का केंद्रबिंदु झांसी बन गया है। इन्हें कुछ इस तरह लिखवाया जाता है कि दूर से देखने पर सांसद व विधायक प्रतिनिधि या सांसद समर्थक की जगह आपको सांसद या विधायक ही दिखाई देगा।

रोज टोल प्लाजा पहुंच रहे ऐसे 200 वाहन
कानपुर और ललितपुर रोड पर स्थित चार टोल नाकों पर तैनात कर्मचारियों को रोजाना लगभग दो सैकड़ा ऐसे वाहनों से दो-चार होना पड़ता है, जिन पर विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक व सांसद प्रतिनिधि तथा राजनीतिक दलों के पद लिखे होते हैं। इनमें कई गाड़ियां तो बाकायदा हूटर बजाती हुईं गुजरती हैं। टोल मांगने पर अपना रसूख दिखाते हुए कर्मचारियों से भिड़ जाते हैं। आए दिन विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक राजीव पाठक ने बताया कि शासन द्वारा अनुमन्य वाहनों को टोल में छूट दी जाती है। बावजूद, रोजाना ऐसे कई वाहन निकलते हैं, जो टोल न देने के लिए झगड़े तक पर आमादा हो जाते हैं।
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