{"_id":"60d242328ebc3e0d927af21f","slug":"jhansi-is-not-make-smart-city-after-four-years-jhansi-news-jhs1977499196","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार साल में झांसी नहीं बन सकी स्मार्ट सिटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार साल में झांसी नहीं बन सकी स्मार्ट सिटी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। सड़कें जर्जर हैं, जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं और पानी का हाल तो जग जाहिर है। झांसी को स्मार्ट बनाने के दावे और वादे खूब हुए, लेकिन चार साल बाद भी झांसी की सूरत में कुछ खास स्मार्टनेस नहीं आई है। केंद्र सरकार बीते चार साल में पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का बजट दे चुकी है, लेकिन चार साल में अफसर महज पांच करोड़ रुपये के काम पूरे करा सके हैं। ऐसे में झांसी को स्मार्ट बनाने की बातें महज कागजी साबित हो रही हैं।
केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन में 23 जून 2017 को झांसी का चयन किया गया था। इसके बाद शहर के कायाकल्प पर 1000 करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि खर्च होनी थी। केंद्र सरकार ने शुरूआती बजट भी समय पर दे दिया, लेकिन तत्कालीन अफसरों की तनातनी के चलते काफी समय तक काम शुरू नहीं हुए। इसका असर यह हुआ कि चार साल बाद भी सिर्फ 5.47 करोड़ के काम ही निपटाए जा सके हैं। अफसरों की बेपरवाही एवं उनके बीच तालमेल न होने से इनके कामों में झांसी पूरे सूबे में ही सबसे फिसड्डी साबित हुई है। हालात यह हैं कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम ने कुल 230 प्रोजेक्ट प्रस्तावित किए, लेकिन सिर्फ 28 प्रोजेक्ट पर ही काम शुरू हुआ। जबकि 202 प्रोजेक्ट पर काम ही शुरू नहीं हो सका। स्मार्ट सिटी के तकरीबन सभी अहम काम अधूरे पड़े हुए हैं। स्मार्ट सिटी के तहत 179.91 करोड़ रुपये से बने इंट्रीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रेाल रूम का काम करीब खत्म हो चुका लेकिन, इसने अभी पूरी क्षमता के साथ काम शुरू नहीं किया गया है। ट्रैफिक कंट्रोल का काम मैनुअल ही हो रहा है। इसी तरह स्मार्ट सिटी के तहत शहर के जलाशयों की तस्वीर भी बदली जानी थी लेकिन, यह काम भी काफी पिछड़ चुका है। बारिश से पहले इसके पूरा होने की उम्मीद कम है।
--------------
अब तक पूरे हो सके यह काम
- मैथिलीशरण गुप्त पार्क में राष्ट्रीय ध्वज लगाने का काम।
- दो पार्कों में ओपन जिम।
- सात पिंक शौचालयों का निर्माण कार्य।
- तीन स्कूलों में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब।
- प्राथमिक स्कूलों मेें सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का काम।
- पोल पर 12 फ्लड लाइट लगाने का काम।
----------------------
ये काम अभी चल रहे
- इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर का काम
- ध्यानचंद स्टेडियम में वातानुकूलित बैडमिंटन कोर्ट।
- 40 पार्कों में ओपन जिम।
- 10 जगहों पर वाटर एटीएम।
- पानी वाली धर्मशाला और आंतिया तालाब का सुंदरीकरण।
- जीजीआई स्कूल के नए भवन का निर्माण।
- सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा पैनल।
- 40 पार्कों में योग केंद्र का निर्माण।
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट का निर्माण
------------
ये काम अब तक शुरू नहीं हो सके
- पूरे शहर में अंडरग्रांउड तार बिछाने का काम
- पिछोर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया प्राथमिक विद्यालय
- झांसी किले के लिए पांच इलेक्ट्रिक वाहन
- पांच पार्कों में वाई फाई हॉटस्पॉट एवं सौर ऊर्जा लैंप
- नई सेप्टेज प्रबंधन प्रणाली
- स्मार्ट वेंडिंग जोन
- किले के पास नए पार्क एवं वाई फाई हॉटस्पॉट
- ध्यानचंद्र स्टेडियम में हाकी मैदान में फ्लड लाइटों की स्थापना
- सामुदायिक रसोई में निशुल्क भोजन
- पर्यटकों के लिए इंटरएक्टिव कियोस्क
- बुंदेलखंड संस्कृति केंद्र
- आधुनिक कार पार्किंग स्पेस
- नाइट मैच के लिए फ्लड लाइट
- हंसारी में सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ नए प्राथमिक विद्यालय का निर्माण
- इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन
- किले के अंदर लाइट एंड साउंड शो और बाउंड्रीवाल, लेंडस्केपिंग।
शुरुआत में स्मार्ट सिटी के तहत कामों की रफ़्तार काफी धीमी थी। पिछले साल से कुछ कामों ने रफ्तार पकड़ी है। कई काम चल रहे हैं। जल्द ही स्मार्ट सिटी के काम नजर आने लगेंगे।
विज्ञापन
रामतीर्थ सिंघल, महापौर
विज्ञापन
केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन में 23 जून 2017 को झांसी का चयन किया गया था। इसके बाद शहर के कायाकल्प पर 1000 करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि खर्च होनी थी। केंद्र सरकार ने शुरूआती बजट भी समय पर दे दिया, लेकिन तत्कालीन अफसरों की तनातनी के चलते काफी समय तक काम शुरू नहीं हुए। इसका असर यह हुआ कि चार साल बाद भी सिर्फ 5.47 करोड़ के काम ही निपटाए जा सके हैं। अफसरों की बेपरवाही एवं उनके बीच तालमेल न होने से इनके कामों में झांसी पूरे सूबे में ही सबसे फिसड्डी साबित हुई है। हालात यह हैं कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम ने कुल 230 प्रोजेक्ट प्रस्तावित किए, लेकिन सिर्फ 28 प्रोजेक्ट पर ही काम शुरू हुआ। जबकि 202 प्रोजेक्ट पर काम ही शुरू नहीं हो सका। स्मार्ट सिटी के तकरीबन सभी अहम काम अधूरे पड़े हुए हैं। स्मार्ट सिटी के तहत 179.91 करोड़ रुपये से बने इंट्रीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रेाल रूम का काम करीब खत्म हो चुका लेकिन, इसने अभी पूरी क्षमता के साथ काम शुरू नहीं किया गया है। ट्रैफिक कंट्रोल का काम मैनुअल ही हो रहा है। इसी तरह स्मार्ट सिटी के तहत शहर के जलाशयों की तस्वीर भी बदली जानी थी लेकिन, यह काम भी काफी पिछड़ चुका है। बारिश से पहले इसके पूरा होने की उम्मीद कम है।
विज्ञापन
--------------
अब तक पूरे हो सके यह काम
- मैथिलीशरण गुप्त पार्क में राष्ट्रीय ध्वज लगाने का काम।
- दो पार्कों में ओपन जिम।
- सात पिंक शौचालयों का निर्माण कार्य।
- तीन स्कूलों में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब।
- प्राथमिक स्कूलों मेें सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का काम।
- पोल पर 12 फ्लड लाइट लगाने का काम।
----------------------
ये काम अभी चल रहे
- इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर का काम
- ध्यानचंद स्टेडियम में वातानुकूलित बैडमिंटन कोर्ट।
- 40 पार्कों में ओपन जिम।
- 10 जगहों पर वाटर एटीएम।
- पानी वाली धर्मशाला और आंतिया तालाब का सुंदरीकरण।
- जीजीआई स्कूल के नए भवन का निर्माण।
- सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा पैनल।
- 40 पार्कों में योग केंद्र का निर्माण।
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट का निर्माण
------------
ये काम अब तक शुरू नहीं हो सके
- पूरे शहर में अंडरग्रांउड तार बिछाने का काम
- पिछोर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया प्राथमिक विद्यालय
- झांसी किले के लिए पांच इलेक्ट्रिक वाहन
- पांच पार्कों में वाई फाई हॉटस्पॉट एवं सौर ऊर्जा लैंप
- नई सेप्टेज प्रबंधन प्रणाली
- स्मार्ट वेंडिंग जोन
- किले के पास नए पार्क एवं वाई फाई हॉटस्पॉट
- ध्यानचंद्र स्टेडियम में हाकी मैदान में फ्लड लाइटों की स्थापना
- सामुदायिक रसोई में निशुल्क भोजन
- पर्यटकों के लिए इंटरएक्टिव कियोस्क
- बुंदेलखंड संस्कृति केंद्र
- आधुनिक कार पार्किंग स्पेस
- नाइट मैच के लिए फ्लड लाइट
- हंसारी में सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ नए प्राथमिक विद्यालय का निर्माण
- इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन
- किले के अंदर लाइट एंड साउंड शो और बाउंड्रीवाल, लेंडस्केपिंग।
शुरुआत में स्मार्ट सिटी के तहत कामों की रफ़्तार काफी धीमी थी। पिछले साल से कुछ कामों ने रफ्तार पकड़ी है। कई काम चल रहे हैं। जल्द ही स्मार्ट सिटी के काम नजर आने लगेंगे।
विज्ञापन
रामतीर्थ सिंघल, महापौर