{"_id":"57f69e1e4f1c1b666d27029b","slug":"jhansi-in-bundelkhand-s-first-electric-crematorium","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुंदेलखंड का पहला विद्युत शवदाह गृह झांसी में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुंदेलखंड का पहला विद्युत शवदाह गृह झांसी में
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Oct 2016 12:25 AM IST
विज्ञापन
nagar nigm, jhansi news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी।
बुंदेलखंड में पहला विद्युत शवदाह गृह झांसी के उन्नाव गेट स्थित श्मशान स्थल पर बनेगा। इसके निर्माण पर डेढ़ करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन है कि पर्यावरण को प्रदूषित होेने से बचाने के लिए खुले में शवों को नहीं जलाया जाए। बस्ती के अंदर बने श्मशान स्थल बंद किए जाएं, ताकि आसपास रहने वालों को दिक्कत न हो। इसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने विद्युत शवदाह गृह बनाने का निर्णय लिया है। तय हुआ है कि उन्नाव गेट श्मशान स्थल पर विद्युत शवदाह गृह बनाया जाएगा। वहीं एक चिमनी बनाई जाएगी, जिससे शवों के जलने पर धुआं ऊपर वातावरण में चला जाए। श्मशान स्थल पर पौधरोपण किया जाएगा।
यह होगा फायदा
विद्युत शवदाह के लिए दो सौ से पांच सौ रुपए तक शुल्क रखा जाएगा। अक्सर लावारिस शवों को नदी में प्रवाह कर दिया जाता है लेकिन विद्युत शवदाह गृह बनने के बाद इस पर अंकुश लगेगा। पर्यावरण भी दुरुस्त रहेगा।
विज्ञापन
ये हैं श्मशान स्थल
शहर में उन्नाव गेट बाहर, बड़ागांव गेट बाहर, पहूंज नदी किनारे, श्याम चौपड़ा मुक्तिधाम, कोछाभांवर, भट्टागांव और हंसारी।
कोछाभांवर के लिए 20 लाख
कोछाभांवर श्मशान स्थल में शेड और बाउंड्रीवाल बनाने के लिए 20 लाख रुपये जारी हो गए हैं। इससे श्मशान स्थल दुरुस्त हो जाएगा।
बुंदेलखंड में बनने वाला यह पहला विद्युत शवदाह गृह है। विद्युत शवदाह गृह से परहेज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अच्छी पहल है। इससे कई टन लकड़ी की बचत होगी और पर्यावरण दुरुस्त रहेगा।
- आरके वर्मा
मुख्य अभियंता
नगर निगम
विज्ञापन
बुंदेलखंड में पहला विद्युत शवदाह गृह झांसी के उन्नाव गेट स्थित श्मशान स्थल पर बनेगा। इसके निर्माण पर डेढ़ करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन है कि पर्यावरण को प्रदूषित होेने से बचाने के लिए खुले में शवों को नहीं जलाया जाए। बस्ती के अंदर बने श्मशान स्थल बंद किए जाएं, ताकि आसपास रहने वालों को दिक्कत न हो। इसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने विद्युत शवदाह गृह बनाने का निर्णय लिया है। तय हुआ है कि उन्नाव गेट श्मशान स्थल पर विद्युत शवदाह गृह बनाया जाएगा। वहीं एक चिमनी बनाई जाएगी, जिससे शवों के जलने पर धुआं ऊपर वातावरण में चला जाए। श्मशान स्थल पर पौधरोपण किया जाएगा।
विज्ञापन
यह होगा फायदा
विद्युत शवदाह के लिए दो सौ से पांच सौ रुपए तक शुल्क रखा जाएगा। अक्सर लावारिस शवों को नदी में प्रवाह कर दिया जाता है लेकिन विद्युत शवदाह गृह बनने के बाद इस पर अंकुश लगेगा। पर्यावरण भी दुरुस्त रहेगा।
विज्ञापन
ये हैं श्मशान स्थल
शहर में उन्नाव गेट बाहर, बड़ागांव गेट बाहर, पहूंज नदी किनारे, श्याम चौपड़ा मुक्तिधाम, कोछाभांवर, भट्टागांव और हंसारी।
कोछाभांवर के लिए 20 लाख
कोछाभांवर श्मशान स्थल में शेड और बाउंड्रीवाल बनाने के लिए 20 लाख रुपये जारी हो गए हैं। इससे श्मशान स्थल दुरुस्त हो जाएगा।
बुंदेलखंड में बनने वाला यह पहला विद्युत शवदाह गृह है। विद्युत शवदाह गृह से परहेज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अच्छी पहल है। इससे कई टन लकड़ी की बचत होगी और पर्यावरण दुरुस्त रहेगा।
- आरके वर्मा
मुख्य अभियंता
नगर निगम