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Jhansi: अमृत योजना के आठ जोनों में खामियां, लटका हस्तांतरण, जल संस्थान ने किया था सर्वे

Mon, 10 Aug 2026 07:59 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Mon, 10 Aug 2026 07:59 PM IST
सार

निरीक्षण में अधिकांश जोनों में पाइपलाइन लीकेज, ओवरहेड टैंक और सीडब्ल्यूआर के वाटर लेवल इंडिकेटर खराब मिले। कई क्षेत्रों में कम दबाव से जलापूर्ति हो रही है, जबकि कुछ स्थानों पर अब तक गृह जल संयोजन नहीं दिए गए हैं।

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Jhansi: Flaws found in eight zones under the Amrit Scheme; handover stalled
जल संस्थान कार्यालय, झांसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत योजना के तहत तैयार आठ जोनों की हकीकत संयुक्त निरीक्षण में सामने आ गई। कहीं पाइपलाइन लीकेज मिली, कहीं कम दबाव से पानी पहुंचा तो कहीं गृह जल संयोजन और अन्य कार्य अधूरे मिले। इसके बाद जल संस्थान के महाप्रबंधक ने जल निगम के अधीक्षण अभियंता (निर्माण खंड) को पत्र भेजकर हस्तांतरण लेने से पहले कमियां दूर करने के लिए कहा है।
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करीब 600.42 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का कार्य 21 जून 2019 को शुरू हुआ था, जिसे जून 2022 तक पूरा होना था। हालांकि, परियोजना में देरी हुई। हाल ही में जल निगम ने सागर गेट, भगवंतपुरा, सिमराहा, तालपुरा, सिविल लाइन, मसीहागंज, सिल्वर्टगंज और नंदनपुरा जोन के ओवरहेड टैंक, सीडब्ल्यूआर, पाइपलाइन और गृह संयोजनों का हस्तांतरण लेने के लिए जल संस्थान को पत्र भेजा था।
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इसके बाद जल संस्थान ने संयुक्त निरीक्षण कराया, जिसमें कई तकनीकी और संचालन संबंधी कमियां सामने आईं। जल संस्थान ने इन खामियों का विवरण जल निगम को भेजते हुए कहा है कि सभी कमियां दूर होने के बाद ही जोनों का हस्तांतरण लिया जाएगा।
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निरीक्षण में अधिकांश जोनों में पाइपलाइन लीकेज, ओवरहेड टैंक और सीडब्ल्यूआर के वाटर लेवल इंडिकेटर खराब मिले। कई क्षेत्रों में कम दबाव से जलापूर्ति हो रही है, जबकि कुछ स्थानों पर अब तक गृह जल संयोजन नहीं दिए गए हैं। सिविल लाइन और मसीहागंज जोन में नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से सप्ताह में केवल दो-तीन दिन ही पानी की आपूर्ति हो रही है। मसीहागंज जोन में 250 केवीए ट्रांसफार्मर भी ओवरलोड पाया गया।

जल संस्थान ने यह भी बताया कि गृह जल संयोजनों के सर्वे में जल निगम की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने और जलकल आईडी उपलब्ध न कराने के कारण तीन माह में केवल लगभग 25 प्रतिशत सर्वे ही पूरा हो सका है। इससे नए कनेक्शनों का राजस्व निर्धारण प्रभावित हो रहा है। जल संस्थान का कहना है कि योजना के संचालन और अनुरक्षण का खर्च इसी राजस्व से पूरा किया जाना है।


अमृत योजना के पहले चरण के आठ जोनों के हस्तांतरण के लिए जल निगम से पत्र मिला था। निरीक्षण में कुछ कमियां मिली हैं और पार्षदों की ओर से भी लीकेज आदि की शिकायतें आई थीं। मुख्य कार्य पूरे हो चुके हैं। शेष कमियां दूर होने के बाद ही जोनों का हस्तांतरण लिया जाएगा। - सिद्धार्थ कुमार, महाप्रबंधक, जल संस्थान

यहां यह खामियां मिलीं
सागर गेट जोन : ओवरहेड टैंक की वितरण लाइन और राइजिंग मेन लाइन के फ्लैंज से लीकेज मिला। ओवरहेड टैंक व सीडब्ल्यूआर का वाटर लेवल इंडिकेटर खराब है। कई स्थानों पर पाइपलाइन भी लीक मिली।

भगवंतपुरा जोन : ओवरहेड टैंक और सीडब्ल्यूआर का वाटर लेवल इंडिकेटर खराब है। काली माई मंदिर के पास करीब 50, हनुमानजी मोहल्ला में 150 और बड़ी माता मंदिर के पास 110 घरों में लो प्रेशर से जलापूर्ति हो रही है। कई स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज है और अधिकांश घरों के नलों में टोंटियां तक नहीं लगी हैं।

सिमराहा जोन : ओवरहेड टैंक व सीडब्ल्यूआर का वाटर लेवल इंडिकेटर खराब मिला। वितरण लाइन और राइजिंग मेन लाइन के फ्लैंज से भी पानी का रिसाव हो रहा है।

तालपुरा जोन : राजपूत कॉलोनी के अधिकांश घरों में पेयजल आपूर्ति ठप है। ओवरहेड टैंक का वाटर लेवल इंडिकेटर भी खराब मिला।

सिविल लाइन जोन : कई स्थानों पर एलईडी लाइन नहीं मिली। बैंक चौराहे के पास स्लूइस वाल्व के लिए चैंबर नहीं बनाया गया। पुरानी मुख्य पाइपलाइन का नए ओवरहेड टैंक से संयोजन नहीं किया गया है। नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से सप्ताह में केवल दो-तीन दिन ही जलापूर्ति हो रही है।

मसीहागंज जोन : जोनल पंपिंग स्टेशन का 250 केवीए ट्रांसफार्मर ओवरलोड है। एक साथ दो मोटर चलाने पर ट्रांसफार्मर और केबल में फॉल्ट आ जाता है। यहां भी नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से सप्ताह में सिर्फ दो-तीन दिन ही पानी मिल रहा है।


नंदनपुरा जोन : पाइपलाइन लीकेज की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। कई क्षेत्रों में अब तक गृह जल संयोजन नहीं दिए गए हैं। मुख्य राइजिंग लाइन से नई पाइपलाइन जोड़ने के बावजूद जलापूर्ति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

सिल्वर्टगंज जोन : पार्षदों ने कई स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज की शिकायत की है। कुछ इलाकों में पाइपलाइन ही नहीं डाली गई, जिससे अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा। मुख्य राइजिंग लाइन से जोड़ने के बावजूद जलापूर्ति का दबाव नहीं बढ़ सका
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