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ये हैं झांसी के दधीचि, 45 लोगों का शरीर आएगा एमबीबीएस छात्रों के काम
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झांसी। शिक्षा और समाज को योगदान करने में झांसी के दधीचि पीछे नहीं हैं। पिछले दो-तीन सालों में जिले भर से 45 लोगों ने अपना शरीर दान किया है। उनके मरणोपरांत शव महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के काम आएंगे। शव विच्छेदन कर एमबीबीएस छात्र-छात्राएं शरीर के विभिन्न अंगों की बारीकियां सीख सकेंगे।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान छात्रों को प्रथम वर्ष में ही कैडेवर एनाटमी विषय पढ़ाया जाता है। उन्हें शव विच्छेदन भी कराया जाता है। नियमानुसार एक टेबल पर दस छात्रों पर एक बॉडी होनी चाहिए। चूंकि, मेडिकल कॉलेज में 150 छात्र-छात्राओं का बैच है। ऐसे में कुल मिलाकर 15 डेडबॉडी हर साल उपलब्ध रहनी चाहिए। मेडिकल स्टूडेंट्स डेड बॉडी का हाथ, पैर, पेट आदि का एक-एक कर चरणबद्ध तरीके से ऑपरेशन करते हैं।
इसके जरिए वो नस, अंगों से हड्डियों की दूरी आदि के बारे में सीखते हैं। ऑपरेशन कर मेडिकल छात्र पूरी तरह बॉडी से जुड़े अंगों और नसों, हड्डियों, शरीर के अंदर के अंगों आदि के बारे में जाने जाते हैं, जो कि आगे चलकर उन्हें अच्छा चिकित्सक बनाने में काफी अहम साबित होता है। मगर डेडबॉडी की कमी के चलते मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2017 के बाद से मृत शरीर मिल ही नहीं सका है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि कई जागरूक लोग शरीर दान करने के लिए आगे आए हैं। पिछले दो-तीन सालों में 45 लोग अपना शरीर दान कर चुके हैं। कुछ लोगों ने हाल ही में अपना शरीर दान किया है।
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मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान छात्रों को प्रथम वर्ष में ही कैडेवर एनाटमी विषय पढ़ाया जाता है। उन्हें शव विच्छेदन भी कराया जाता है। नियमानुसार एक टेबल पर दस छात्रों पर एक बॉडी होनी चाहिए। चूंकि, मेडिकल कॉलेज में 150 छात्र-छात्राओं का बैच है। ऐसे में कुल मिलाकर 15 डेडबॉडी हर साल उपलब्ध रहनी चाहिए। मेडिकल स्टूडेंट्स डेड बॉडी का हाथ, पैर, पेट आदि का एक-एक कर चरणबद्ध तरीके से ऑपरेशन करते हैं।
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इसके जरिए वो नस, अंगों से हड्डियों की दूरी आदि के बारे में सीखते हैं। ऑपरेशन कर मेडिकल छात्र पूरी तरह बॉडी से जुड़े अंगों और नसों, हड्डियों, शरीर के अंदर के अंगों आदि के बारे में जाने जाते हैं, जो कि आगे चलकर उन्हें अच्छा चिकित्सक बनाने में काफी अहम साबित होता है। मगर डेडबॉडी की कमी के चलते मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2017 के बाद से मृत शरीर मिल ही नहीं सका है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि कई जागरूक लोग शरीर दान करने के लिए आगे आए हैं। पिछले दो-तीन सालों में 45 लोग अपना शरीर दान कर चुके हैं। कुछ लोगों ने हाल ही में अपना शरीर दान किया है।
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