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झांसी: बिजली विभाग ने उपभोक्ता को थमाया दो लाख का बिल, न्यायालय ने किया निरस्त
Mon, 10 Nov 2025 09:34 AM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 10 Nov 2025 09:34 AM IST
सार
बिजली विभाग ने एक उपभोक्ता को एक साल का दो लाख से अधिक का बिल थमा दिया। बिल देख उपभोक्ता के पैरों तले जमीन खिसक गई। उपभोक्ता ने कई बार विभाग के चक्कर काटे पर उसका बिल संशोधन नहीं हुआ।
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उपभोक्ता न्यायालय, झांसी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एक किलोवाट के कनेक्शन पर बिजली विभाग ने एक उपभोक्ता को एक साल का दो लाख से अधिक का बिल थमा दिया। बिल देख उपभोक्ता के पैरों तले जमीन खिसक गई। उपभोक्ता ने कई बार विभाग के चक्कर काटे पर उसका बिल संशोधन नहीं हुआ। इस कारण उसने उपभोक्ता न्यायालय ने वाद दायर कर दिया, जहां न्यायालय ने बिल को निरस्त करने का आदेश दिया।
सीपरी बाजार के बूढ़ा में रहने वाले लियाकत अली ने बताया कि उसने अपने घर के लिए एक किलोवाट का संयोजन विद्युत विभाग से जनवरी 2023 में लिया था। वादी बिल समय पर जमा करता रहा लेकिन 13 अप्रैल 2023 में उसे 1,00,009 का बिल थमा दिया गया। इस पर वादी ने आठ मई को आपत्ति दाखिल की। विद्युत विभाग ने चेकिंग रिपोर्ट में दर्शाया कि वादी ने 28 फरवरी को संयोजन का इस्तेमाल भवन निर्माण में किया है।
इसी आधार पर उसे साल भर का 24 घंटे बिजली का राजस्व निर्धारण कर उसे बिल दिया गया है। उसने अधिकारियों से इस पर आपत्ति जताई और बिल संशोधन की मांग की लेकिन अधिकारियों ने उसकी एक नहीं सुनी और बिल संशोधन के बजाय उसे दोगुना बिल यानी की 2,00,623 का बिल थमा दिया।
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उपभोक्ता न्यायालय में वाद दायर किया। दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने वादी को थमाए गए बिल को निरस्त करने का आदेश सुनाया।
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सीपरी बाजार के बूढ़ा में रहने वाले लियाकत अली ने बताया कि उसने अपने घर के लिए एक किलोवाट का संयोजन विद्युत विभाग से जनवरी 2023 में लिया था। वादी बिल समय पर जमा करता रहा लेकिन 13 अप्रैल 2023 में उसे 1,00,009 का बिल थमा दिया गया। इस पर वादी ने आठ मई को आपत्ति दाखिल की। विद्युत विभाग ने चेकिंग रिपोर्ट में दर्शाया कि वादी ने 28 फरवरी को संयोजन का इस्तेमाल भवन निर्माण में किया है।
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इसी आधार पर उसे साल भर का 24 घंटे बिजली का राजस्व निर्धारण कर उसे बिल दिया गया है। उसने अधिकारियों से इस पर आपत्ति जताई और बिल संशोधन की मांग की लेकिन अधिकारियों ने उसकी एक नहीं सुनी और बिल संशोधन के बजाय उसे दोगुना बिल यानी की 2,00,623 का बिल थमा दिया।
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उपभोक्ता न्यायालय में वाद दायर किया। दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने वादी को थमाए गए बिल को निरस्त करने का आदेश सुनाया।