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UP: 2300 किमी लंबे सुपारी कॉरिडोर में शामिल थे झांसी के अफसर, दो बार फेल होने पर तीसरी बार में गिरफ्त में आए
Sat, 03 Jan 2026 03:03 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 03 Jan 2026 03:03 PM IST
सार
उत्तर पूर्व से लेकर दिल्ली एवं राजस्थान तक 2300 किमी लंबे सुपारी कॉरिडोर में झांसी के अफसर शामिल थे। कच्चे बिल के सहारे सुपारी कंपनियों तक पहुंचाई जाती है। हर महीने सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाने का खेल किया जा रहा था। दो बार फेल होने पर सीजीएसटी अफसर तीसरी बार में गिरफ्त में आए।
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Jhansi bribery case
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
उत्तर पूर्व से लेकर दिल्ली एवं राजस्थान तक सुपारी को कंपनियों तक पहुंचाने के खेल में सीजीएसटी एवं एसजीएसटी विभाग के कई अफसर भी शामिल हैं। अफसरों की मदद से यह पूरा खेल कच्चे बिल पर होता है। हर महीने सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाई जाती है।
झांसी में पकड़ी गई डिप्टी कमिश्नर समेत तीन सीजीएसटी अफसर सीबीआई कार्रवाई का छोटा हिस्सा हैं। आगे इसमें बड़ी मछलियों के फंसने के आसार हैं। सीबीआई के रडार पर अभी भी सुपारी कॉरिडोर है। इस कॉरिडोर के अहम स्थानों पर सिंडिकेट के अफसर तैनात हैं।
सीबीआई इनके भी इनपुट जुटा रही है। दरअसल, सुपारी के मुकाबले करीब चार गुना जीएसटी गुटखा पर है। टैक्स से बचने के लिए पान-मसाला कंपनियां कच्चे बिल पर सुपारी मंगवाती हैं। करोड़ों रुपये का खेल होता है।
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झांसी में पकड़ी गई डिप्टी कमिश्नर समेत तीन सीजीएसटी अफसर सीबीआई कार्रवाई का छोटा हिस्सा हैं। आगे इसमें बड़ी मछलियों के फंसने के आसार हैं। सीबीआई के रडार पर अभी भी सुपारी कॉरिडोर है। इस कॉरिडोर के अहम स्थानों पर सिंडिकेट के अफसर तैनात हैं।
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सीबीआई इनके भी इनपुट जुटा रही है। दरअसल, सुपारी के मुकाबले करीब चार गुना जीएसटी गुटखा पर है। टैक्स से बचने के लिए पान-मसाला कंपनियां कच्चे बिल पर सुपारी मंगवाती हैं। करोड़ों रुपये का खेल होता है।
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मूल रूप से सुपारी बिहार, यूपी, दिल्ली के रास्ते राजस्थान के विभिन्न इलाकों में पहुंचाई जाती है। जीएसटी विभाग के सूत्रों का कहना है कि कच्चे पर्चे के सहारे सुपारी मसाला कंपनियों तक पहुंचती है। यह पूरा कॉरिडोर करीब 2300 किलोमीटर लंबा है।
मसाला कंपनियों तक आसानी से पूरा माल पहुंचाने के लिए सिंडिकेट के मनपसंद अफसरों की तैनाती है। कानपुर एवं लखनऊ में तैनात सीजीएसटी के दो अफसरों के कॉल डिटेल सीबीआई को मिले थे।
सीबीआई ने इन अफसरों को सर्विलांस पर लगा रखा था। उनके सहारे सीबीआई को टैक्स चोरी की आड़ में सौदा करने वाले दूसरे अफसरों का भी सुराग लगा। सिंडीकेट के अफसरों से अनिल तिवारी एवं अजय शर्मा के गहरे रिश्ते मिले। दोनों की कानपुर एवं लखनऊ में लगातार बात होती थी।
इस दौरान सौदेबाजी की बात सामने आ जाने पर सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, अनिल तिवारी एवं अजय शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। इन तीनों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई सिंडीकेट में शामिल अन्य अफसरों का सुराग लगा रही है। उधर, सीबीआई की कार्रवाई के बाद से स्टेट जीएसटी अफसरों में भी खलबली मची है।
दो बार फेल होने के बाद तीसरी बार में गिरफ्त में आए सीजीएसटी अफसर
सीजीएसटी अफसरों को पकड़ने की सीबीआई टीम दो बार पहले भी कोशिश कर चुकी थी लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल सकी थी। 21 नवंबर को सराफा बाजार स्थित जाने माने सराफा कारोबारी के यहां सीजीएसटी टीम ने छापा मारा था। यहां टैक्स का घालमेल मिला था।
सीजीएसटी अफसरों को पकड़ने की सीबीआई टीम दो बार पहले भी कोशिश कर चुकी थी लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल सकी थी। 21 नवंबर को सराफा बाजार स्थित जाने माने सराफा कारोबारी के यहां सीजीएसटी टीम ने छापा मारा था। यहां टैक्स का घालमेल मिला था।
टर्नओवर के सापेक्ष कागजों में काफी कम टैक्स जमा हुआ पाया गया। कार्रवाई के दौरान खुद डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी एवं अधीक्षक अनिल तिवारी मौजूद थे। टीम कई दस्तावेज भी अपने साथ ले गई थी। इस मामले में सराफा कारोबारी पर मोटा जुर्माना लगाने की कवायद शुरू हो गई थी।
उसके कुछ दिन बाद पांच दिसंबर को उनके चचेरे भाई के ज्वैलर्स शोरूम में जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) टीम ने छापा मारा। यहां सोना तस्करी का मामला सामने आया था। सूत्रों का कहना था कि इसके बाद सराफा बंधुओं ने मामला निपटाने के लिए अनिल तिवारी से संपर्क साधा।
अनिल ने मदद करने का भरोसा दिलाते हुए उनको लखनऊ बुलाया। उनसे मोटी रकम की मांग की गई थी। इस सौदे की भनक भी सीबीआई को लग गई थी। अनिल तिवारी लखनऊ में थे लेकिन पैसों का इंतजाम न हो पाने से सराफा कारोबारी नहीं पहुंचे। इस वजह से सीबीआई वहां पकड़ने में असफल हो गई। इसके बाद झांसी में भी इन दोनों को पकड़ने की कोशिश हुई थी। तीसरी बार जाकर अनिल एवं अजय शर्मा पकड़ में आए।