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हर मर्ज की दवा नहीं आयुर्वेदिक कॉलेज के पास

Wed, 18 May 2016 02:14 AM IST
jhansi
jhansi Updated Wed, 18 May 2016 02:14 AM IST
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jhansi aurvedic collage
jhansi - फोटो : demo pic
झांसी। एक ओर जहां शहर में धड़ल्ले से एलोपैथिक नर्सिंग होम खुलते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय चिकित्सा की सबसे पुरानी पद्धति आयुर्वेद पर अब भी लोगों का भरोसा कायम है। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय में रोजाना मरीजों की अच्छी तादाद जुटती है। हालांकि, शासन द्वारा दवाओं का सीमित दायरा तय करने से यह पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पा रहा है। हर मर्ज की दवा दे पाने में कॉलेज नाकाम है।
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आयुर्वेदिक कॉलेज में इलाज के लिए प्रतिदिन ओपीडी में डेढ़ सौ मरीजों की भीड़ जुटती है, जबकि तीस मरीजों को भर्ती किया जाता है। यहां पर 60 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। सिर्फ एक रुपये का पर्चा बनवाकर मरीज चिकित्सीय परामर्श ले सकता है। इसके साथ ही रोग की दवाएं भी नि:शुल्क मिलती हैं। वहीं, चंद रुपयों में ही कॉलेज परिसर में जांचों की भी सुविधा है। यहां पर ब्लड, यूरिन, ब्लड शुगर, ईसीजी, हीमोग्लोबिन, टीएलसी-डीएलसी, ईएसआर की जांच होती है। इन सबके बावजूद कॉलेज दवाओं की सीमित संख्या से मात खा रहा है। शासन ने आयुर्वेदिक कॉलेज के लिए सिर्फ चालीस औषधियों की खरीद की अनुमति दे रखी है। इस कारण कॉलेज हर मर्ज की दवा मरीजों को नहीं दे पा रहा है। यदि शासन एकल दवाओं की खरीद की अनुमति कॉलेज को दे देता है, तो मरीजों को और सहूलियत मिल सकती है। इसको मद्देनजर रखते हुए कॉलेज प्राचार्य प्रो. सुरेश चंद्र ने 12 मई को लखनऊ में हुई आला अधिकारियों की बैठक में 40 से बढ़ाकर 150 औषधियों की सूची जारी करने की मांग की है। अगर शासन इसको स्वीकृति दे देता है, तो कई रोगों का उपचार भी यहां हो सकेगा। यहीं नही, यहां पर मरीजों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हो सकती है।
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...ताकि जटिल रोगों का हो सके उपचार
शासन द्वारा दवाओं की सूची में बढ़ोतरी कर देने से जटिल से जटिल रोगों का उपचार आयुर्वेदिक कॉलेज में संभव हो सकेगा। कॉलेज सूत्रों के मुताबिक अभी यहां पर आंख, कान, गले, लीवर, दांत आदि मर्ज की कोई दवा नहीं है। इससे कई मरीज यहां से बैरंग लौट जाते हैं।
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