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Jhansi: एआई सुमन मैडम को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की मान्यता, प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक मोहनलाल का है नवाचार
Sun, 21 Sep 2025 06:36 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sun, 21 Sep 2025 06:36 AM IST
सार
मूल रूप से गरौठा के रहने वाले मोहनलाल द्वारा निर्मित एआई सुमन मैडम ऐसा रोबोट है, जो बच्चों की पढ़ाई को सरल और रोचक बनाता है।
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बच्चों और शिक्षक मोहनलाल के सथ एआई मैडम सुमन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गुरसराय के प्राथमिक विद्यालय राजापुर के शिक्षक मोहनलाल सुमन के नवाचार एआई सुमन मैडम को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने मान्यता दी है। महज 2900 रुपये की लागत से निर्मित यह कृत्रिम शिक्षक न सिर्फ बच्चों को पढ़ाता है, बल्कि उनके सवालों के भी उत्तर देता है।
मूल रूप से गरौठा के रहने वाले मोहनलाल द्वारा निर्मित एआई सुमन मैडम ऐसा रोबोट है, जो बच्चों की पढ़ाई को सरल और रोचक बनाता है। यह बच्चों से संवाद करता है और पढ़ाई को मनोरंजक बनाता है। रोबोट बोलते समय मुंह हिलाता है, जिससे बच्चों को वास्तविक शिक्षक जैसा अनुभव होता है। शिक्षक का कहना है कि उन्होंने इसे खास तौर पर गांव और कस्बों के बच्चों तक शिक्षा को सुलभ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया है। यह नवाचार केवल झांसी या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
प्रतिष्ठित पत्रिका फोर्ब्स ने भी उनके नवाचारों को सराहा है। शिक्षक को उनके इस कार्य के लिए कई सम्मान मिले हैं। उन्हें शिक्षा विभाग और विद्यालयों से प्रशंसा पत्र मिले हैं। ब्लैकबोर्ड एक्सप्रेस से लेकर चंद्रयान-3 का मॉडल बनाया : शिक्षक मोहनलाल ने कई अन्य नवाचार भी किए हैं। निर्धन बच्चों के लिए ब्लैकबोर्ड एक्सप्रेस, बच्चों को मूर्ति कला, पेंटिंग, रंगोली, मेहंदी और कुकिंग जैसी रचनात्मक गतिविधियों में पारंगत करना, संगीत और एंकरिंग सिखाना, चंद्रयान-3 के मॉडल से अंतरिक्ष का ज्ञान करना, मोबाइल एडिटिंग का प्रशिक्षण देना, आत्मरक्षा के उपाय सिखाना और नुक्कड़ नाटकों के जरिये सामाजिक कुरीतियों से परिचय कराना इसमें शामिल है।
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मूल रूप से गरौठा के रहने वाले मोहनलाल द्वारा निर्मित एआई सुमन मैडम ऐसा रोबोट है, जो बच्चों की पढ़ाई को सरल और रोचक बनाता है। यह बच्चों से संवाद करता है और पढ़ाई को मनोरंजक बनाता है। रोबोट बोलते समय मुंह हिलाता है, जिससे बच्चों को वास्तविक शिक्षक जैसा अनुभव होता है। शिक्षक का कहना है कि उन्होंने इसे खास तौर पर गांव और कस्बों के बच्चों तक शिक्षा को सुलभ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया है। यह नवाचार केवल झांसी या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
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प्रतिष्ठित पत्रिका फोर्ब्स ने भी उनके नवाचारों को सराहा है। शिक्षक को उनके इस कार्य के लिए कई सम्मान मिले हैं। उन्हें शिक्षा विभाग और विद्यालयों से प्रशंसा पत्र मिले हैं। ब्लैकबोर्ड एक्सप्रेस से लेकर चंद्रयान-3 का मॉडल बनाया : शिक्षक मोहनलाल ने कई अन्य नवाचार भी किए हैं। निर्धन बच्चों के लिए ब्लैकबोर्ड एक्सप्रेस, बच्चों को मूर्ति कला, पेंटिंग, रंगोली, मेहंदी और कुकिंग जैसी रचनात्मक गतिविधियों में पारंगत करना, संगीत और एंकरिंग सिखाना, चंद्रयान-3 के मॉडल से अंतरिक्ष का ज्ञान करना, मोबाइल एडिटिंग का प्रशिक्षण देना, आत्मरक्षा के उपाय सिखाना और नुक्कड़ नाटकों के जरिये सामाजिक कुरीतियों से परिचय कराना इसमें शामिल है।
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