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Jhansi: बड़ाबाजार में साढ़े बारह फीट के गणपति होंगे विराजमान, 1945 चली आ रही परंपरा
Sat, 12 Sep 2026 08:21 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 12 Sep 2026 08:21 PM IST
सार
बड़ा बाजार गणेश उत्सव समिति के मुख्य संरक्षक रामप्रकाश तिवारी ने बताया कि महाराष्ट्र में लोकमान्य तिलक के आंदोलन से प्रेरणा लेकर 1945 से यह परंपरा चली आ रही है।
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विस्तार
रामलीला मंच बड़ाबाजार में बुंदेलखंड के राजा गणपति की साढ़े बारह फीट ऊंची मूर्ति स्थापित की जाएगी। यह मूर्ति 13 सितंबर को विराजमान होगी, जबकि 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर शाम साढ़े आठ बजे से आरती और शृंगार के साथ कार्यक्रम शुरू होंगे। बड़ा बाजार गणेश उत्सव समिति के मुख्य संरक्षक रामप्रकाश तिवारी ने दावा किया कि झांसी में गणेशजी की यह सबसे बड़ी मूर्ति होगी।
मुख्य संरक्षक ने आगे बताया कि महाराष्ट्र में लोकमान्य तिलक के आंदोलन से प्रेरणा लेकर 1945 से यह परंपरा चली आ रही है। समिति के अध्यक्ष शिवकुमार नायक ने बताया कि 19 सितंबर को कलाकार बुंदेली भजन प्रस्तुत करेंगे। 20 सितंबर को मथुरा की राधा-कृष्ण की झांकी का कार्यक्रम होगा। 21 सितंबर को वृंदावन से आने वाले कलाकार भजन संध्या में राधा नाम संकीर्तन की प्रस्तुति देंगे। प्रतिदिन कढ़ी चावल, खिचड़ी, समोसा और हलवा का प्रसाद बांटा जाएगा।
मिसुरया वाली गली में आभूषणों से सजेंगे गणपति
मिसुरया वाली गली में लगभग 48 साल से गणेशजी की मूर्ति विराजमान की जा रही है। पदाधिकारियों ने बताया कि आरती प्रतिदिन रात्रि नौ बजे होगी और यहां की मूर्ति 31 वर्ष से जबलपुर से लाई जा रही है। यहां गणपति को सबसे महंगे आभूषणों से सजाया जाता है। इस कारण सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा रखी जाती है। पदाधिकारियों ने बताया कि यहां साढ़े पांच फीट की गणपति मूर्ति के साथ राधा-कृष्ण और हनुमानजी की मूर्तियां भी विराजमान होंगी। महोत्सव के दौरान होलका महोत्सव, पुष्पों की झांकी, बाबा अमरनाथ की झांकी और डांडिया नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। प्रतिदिन हलवा, विशेष लड्डू, मोदक, श्रीखंड और डोसा का प्रसाद लगेगा। अनंत चौदस विसर्जन से एक दिन पहले 56 भोग का प्रसाद लगाया जाएगा। संवाद
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मुख्य संरक्षक ने आगे बताया कि महाराष्ट्र में लोकमान्य तिलक के आंदोलन से प्रेरणा लेकर 1945 से यह परंपरा चली आ रही है। समिति के अध्यक्ष शिवकुमार नायक ने बताया कि 19 सितंबर को कलाकार बुंदेली भजन प्रस्तुत करेंगे। 20 सितंबर को मथुरा की राधा-कृष्ण की झांकी का कार्यक्रम होगा। 21 सितंबर को वृंदावन से आने वाले कलाकार भजन संध्या में राधा नाम संकीर्तन की प्रस्तुति देंगे। प्रतिदिन कढ़ी चावल, खिचड़ी, समोसा और हलवा का प्रसाद बांटा जाएगा।
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मिसुरया वाली गली में आभूषणों से सजेंगे गणपति
मिसुरया वाली गली में लगभग 48 साल से गणेशजी की मूर्ति विराजमान की जा रही है। पदाधिकारियों ने बताया कि आरती प्रतिदिन रात्रि नौ बजे होगी और यहां की मूर्ति 31 वर्ष से जबलपुर से लाई जा रही है। यहां गणपति को सबसे महंगे आभूषणों से सजाया जाता है। इस कारण सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा रखी जाती है। पदाधिकारियों ने बताया कि यहां साढ़े पांच फीट की गणपति मूर्ति के साथ राधा-कृष्ण और हनुमानजी की मूर्तियां भी विराजमान होंगी। महोत्सव के दौरान होलका महोत्सव, पुष्पों की झांकी, बाबा अमरनाथ की झांकी और डांडिया नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। प्रतिदिन हलवा, विशेष लड्डू, मोदक, श्रीखंड और डोसा का प्रसाद लगेगा। अनंत चौदस विसर्जन से एक दिन पहले 56 भोग का प्रसाद लगाया जाएगा। संवाद
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