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गुमनामी में खोई करोड़ों की जमीन की जेडीए ने शुरू की तलाश
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झांसी। झांसी विकास प्राधिकरण की करोड़ों रुपये की जमीन सालों से गुमनामी में खोई हुई है। अब इन जमीनों की झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने तलाश शुरू कर दी है। जांच के दौरान शनिवार को सीपरी बाजार थाने के नजदीक 200 वर्ग मीटर के दो भूखंड मिले हैं।
शहर को सुनियोजित व व्यवस्थित तरीके से बसाने व लोगों को रियायती दामों में आवास मुहैया कराने के लिए वर्ष 1980 में झांसी विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। अस्तित्व में आते ही जेडीए ने लोगों के रहने के लिए कॉलोनियों को विकसित करने की योजना बनाई थी। जिसके तहत नगर निगम व किसानों से जमीन की खरीद भी की गई थी। जेडीए द्वारा वीरांगना नगर, पीतांबरा कॉलोनी, बेतवा विहार सहित कई कॉलोनियों को विकसित किया गया था। साथ ही महानगर में छोटे-छोटे भूखंडों की खरीद भी की गई थी। कॉलोनियों को विकसित कर भूखंड और फ्लैट बेचे गए, लेकिन छोटे प्लॉटों की निगरानी नहीं होने के कारण अधिकतर प्लॉटों पर कब्जे कर लिए गए है। सालों बाद झांसी विकास प्राधिकरण को अपनी जमीन की सुध आई तो फाइलों से जमीन का मिलान शुरू किया गया। जिसके तहत सीपरी थाने के पास जेडीए के 200 वर्ग मीटर के दो प्लॉट मिले हैं। जिसकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है।
इस संबंध में झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया कि जेडीए की जमीन की तलाश के लिए फाइलों की जांच की जा रही है। तलाश के दौरान सीपरी क्षेत्र में दो प्लॉटों को कब्जे में लिया गया है। तलाश के दौरान कई जमीनों पर कब्जा पाया गया, जिसे जल्द हटवाया जाएगा।
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पुलिसकर्मी से कब्जा हटाने में जेडीए नाकाम
झांसी। वीरांगना नगर स्थित जेडीए की लगभग 600 वर्ग मीटर जमीन पर एक पुलिसकर्मी सालों से कब्जा जमाए हुए है। पुलिसकर्मी से कब्जा हटवाने के लिए जेडीए ने एसएसपी को पत्र भी लिखा है। लेकिन जेडीए अफसरों की उदासीनता की वजह से अब तक जमीन से कब्जा नहीं हटाया जा सका है।
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शहर को सुनियोजित व व्यवस्थित तरीके से बसाने व लोगों को रियायती दामों में आवास मुहैया कराने के लिए वर्ष 1980 में झांसी विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। अस्तित्व में आते ही जेडीए ने लोगों के रहने के लिए कॉलोनियों को विकसित करने की योजना बनाई थी। जिसके तहत नगर निगम व किसानों से जमीन की खरीद भी की गई थी। जेडीए द्वारा वीरांगना नगर, पीतांबरा कॉलोनी, बेतवा विहार सहित कई कॉलोनियों को विकसित किया गया था। साथ ही महानगर में छोटे-छोटे भूखंडों की खरीद भी की गई थी। कॉलोनियों को विकसित कर भूखंड और फ्लैट बेचे गए, लेकिन छोटे प्लॉटों की निगरानी नहीं होने के कारण अधिकतर प्लॉटों पर कब्जे कर लिए गए है। सालों बाद झांसी विकास प्राधिकरण को अपनी जमीन की सुध आई तो फाइलों से जमीन का मिलान शुरू किया गया। जिसके तहत सीपरी थाने के पास जेडीए के 200 वर्ग मीटर के दो प्लॉट मिले हैं। जिसकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है।
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इस संबंध में झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया कि जेडीए की जमीन की तलाश के लिए फाइलों की जांच की जा रही है। तलाश के दौरान सीपरी क्षेत्र में दो प्लॉटों को कब्जे में लिया गया है। तलाश के दौरान कई जमीनों पर कब्जा पाया गया, जिसे जल्द हटवाया जाएगा।
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पुलिसकर्मी से कब्जा हटाने में जेडीए नाकाम
झांसी। वीरांगना नगर स्थित जेडीए की लगभग 600 वर्ग मीटर जमीन पर एक पुलिसकर्मी सालों से कब्जा जमाए हुए है। पुलिसकर्मी से कब्जा हटवाने के लिए जेडीए ने एसएसपी को पत्र भी लिखा है। लेकिन जेडीए अफसरों की उदासीनता की वजह से अब तक जमीन से कब्जा नहीं हटाया जा सका है।