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आठ साल बाद टूटी जेडीए प्रशासन की नींद, नक्शा पास कराने से रोका
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झांसी। ग्राम पंचायत स्तर से नक्शा पारित किए जाने का मामला सामने आने के बाद अब जाकर जेडीए प्रशासन की नींद टूटी है। उसकी सीमा विस्तार के बाद करीब आठ साल बाद भी नगर पालिका, ग्राम पंचायत एवं नगर पंचायत मनमाने तरीके से नक्शे पारित कर रहीं हैं लेकिन, उनको अब तक रोका नहीं गया। अब जेडीए प्रशासन ने बरुआसागर नगर पालिका एवं बड़ागांव नगर पंचायत को पत्र लिखकर लंबित नक्शों को पारित करने की प्रक्रिया तत्काल रोकने को कहा है।
झांसी विकास प्राधिकरण का 26 नवंबर 2013 को सीमा विस्तार हुआ। शासन ने भी कुछ माह बाद सीमाएं अधिसूचित कर दीं। जेडीए सीमा नए सिरे से अधिसूचित होने के बाद नियमानुसार उन इलाकों के मानचित्र जेडीए को स्वीकृत करना था लेकिन, भारी शुल्क देने से बचने के लिए रसूखदार मिलीभगत करके बेहद मामूली रकम में मानचित्र पास कराते रहे। रक्सा, बड़ागांव, पारीछा समेत कई इलाके हाल में विकसित हुए। एक अनुमान के मुताबिक अभी तक सैकड़ों व्यवसायिक मानचित्र पारित कराए जा चुके। इससे सरकारी खजाने को भी जमकर चपत लगाई गई। वहीं, इन सबके बीच जेडीए प्रशासन आंखें मूंदे बैठा रहा जबकि जेडीए बोर्ड ने भी इन इलाकों के मानचित्र जेडीए से कराने के निर्देश दिए थे। बोर्ड का फैसला भी जेडीए अफसर लागू नहीं करा सके।
अमर उजाला में शनिवार के अंक में ग्राम पंचायत के बेहद मामूली रकम में बड़े व्यवसायिक इमारत का मानचित्र स्वीकृत किए जाने का मामला उजागर होने के बाद जेडीए प्रशासन की नींद टूटी। जेडीए ने शनिवार को नगर पालिका बरूआसागर एवं नगर पंचायत बड़ागांव के अधिशासी अधिकारी को पत्र भेजकर प्रक्रियाधीन मानचित्रों की स्वीकृति पर रोक लगाने को कहा है। उपाध्यक्ष सर्वेश दीक्षित ने भी माना कि यह मामला गंभीर है। उनका कहना है पूर्व में पारित मानचित्रों की विधिक स्थितियों का भी परीक्षण कराया जा रहा है।
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झांसी विकास प्राधिकरण का 26 नवंबर 2013 को सीमा विस्तार हुआ। शासन ने भी कुछ माह बाद सीमाएं अधिसूचित कर दीं। जेडीए सीमा नए सिरे से अधिसूचित होने के बाद नियमानुसार उन इलाकों के मानचित्र जेडीए को स्वीकृत करना था लेकिन, भारी शुल्क देने से बचने के लिए रसूखदार मिलीभगत करके बेहद मामूली रकम में मानचित्र पास कराते रहे। रक्सा, बड़ागांव, पारीछा समेत कई इलाके हाल में विकसित हुए। एक अनुमान के मुताबिक अभी तक सैकड़ों व्यवसायिक मानचित्र पारित कराए जा चुके। इससे सरकारी खजाने को भी जमकर चपत लगाई गई। वहीं, इन सबके बीच जेडीए प्रशासन आंखें मूंदे बैठा रहा जबकि जेडीए बोर्ड ने भी इन इलाकों के मानचित्र जेडीए से कराने के निर्देश दिए थे। बोर्ड का फैसला भी जेडीए अफसर लागू नहीं करा सके।
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अमर उजाला में शनिवार के अंक में ग्राम पंचायत के बेहद मामूली रकम में बड़े व्यवसायिक इमारत का मानचित्र स्वीकृत किए जाने का मामला उजागर होने के बाद जेडीए प्रशासन की नींद टूटी। जेडीए ने शनिवार को नगर पालिका बरूआसागर एवं नगर पंचायत बड़ागांव के अधिशासी अधिकारी को पत्र भेजकर प्रक्रियाधीन मानचित्रों की स्वीकृति पर रोक लगाने को कहा है। उपाध्यक्ष सर्वेश दीक्षित ने भी माना कि यह मामला गंभीर है। उनका कहना है पूर्व में पारित मानचित्रों की विधिक स्थितियों का भी परीक्षण कराया जा रहा है।
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