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रेलवे वर्कशाप में जपानी कार्यपद्धति का सहारा लेते हुए समय की अहमियत समझाने के लिए लगाए पोस्टर

Tue, 27 Aug 2019 06:45 AM IST
झांसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Tue, 27 Aug 2019 06:45 AM IST
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Japans work culture example to teach railway employees
झांसी के रेलवे वर्कशाप में कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए लगाए पोस्टर। - फोटो : REPORTERS
रेलवे वर्कशाप में कई कर्मचारियों की कामचोरी की आदतों पर अंकुश न लग पाने से परेशान होकर अफसरों ने अब उन्हें सुधारने के लिए जापान के कर्मचारियों के आचरण व देश के प्रति उनके जज्बे का सहारा लिया है। वक्त की अहमियत समझाने के लिए कारखाने में अलग- अलग जगह पोस्टर लगवाए गए हैं, जिनमें बताया गया कि जापान की कार्य पद्धति के मुताबिक सरकारी कर्मचारी का हर सेकेंड कीमती है। वहां के कर्मचारी समय से पहले काम छोड़ते हैं तो देश का नुकसान होता है। तीन मिनट पहले सीट छोड़ने वाले कर्मचारी के बॉस सार्वजनिक रूप से माफी तक मांगते हैं।
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रेलवे वर्कशाप (वैगन मरम्मत कारखाना) में पांच हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यह कर्मचारी वैगन मरम्मत के लिए बनाई गईं अलग- अलग शॉप में काम करते हैं। कर्मचारी सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक,  शाम चार बजे से रात 12 बजे तक व रात बजे से सुबह आठ बजे तक की पालियों में काम करते हैं। रात 12 बजे से सुबह आठ बजे तक अधिकांश काम शंटिंग (वैगनों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने) के होते हैं। वर्कशाप में कार्यरत तमाम कर्मचारी ऐसे हैं जो आते तो वक्त पर हैं, लेकिन समय से पहले ही चले जाते हैं। इनमें ऐसे भी कर्मचारी हैं, जिन्होंने अपनी दुकान खोल रखी या दूसरा काम कर रहे हैं। कई यूनियन की नेतागिरी भी कर रहे हैं। स्थिति यह रहती है कि कुछ ही घंटे यह लोग वर्कशाप में रहते हैं। जो मन में आया काम किया और निकल लिए। इनकी इस आदतों को सुधारने के लिए वर्कशाप प्रशासन ने कई बार प्रयास किए लेकिन वे नहीं माने। चेतावनी दिए जाने के अलावा अन्य प्रयास निरर्थक गए।
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मुख्य कारखाना प्रबंधक आरडी मौर्या ने कर्मचारियों की इस आदत को सुधारने के लिए अब नई पहल की है। रेलवे वर्कशाप में कई स्थानों पर जापान के कर्मचारियों के संबंध में छपी एक खबर के पोस्टर लगवाए गए हैं। इस पोस्टर में जापान के कोबे शहर के चार सरकारी कर्मचारी टेलीविजन पर आयोजित सीधे प्रसारण में माफी मांगते नजर आ रहे हैं। वजह बताई गई है कि इनके दफ्तर के एक कर्मचारी ने तय समय से तीन मिनट पहले अपनी सीट छोड़ दी थी। जांच में पता चला कि ये कर्मचारी 7 महीने में 26 बार ऐसा कर चुका है। इस पर संबंधित कर्मचारी के चार बॉस ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। जापान की कार्य प्रणाली के मुताबिक सरकारी कर्मचारी का हर सेकेंड कीमती है। वो समय से पहले काम छोड़ता है तो देश का नुकसान होता है। पोस्टर को लगाने का उद्देश्य वर्कशाप के कर्मचारियों को वक्त की कीमत समझने के लिए प्रेरित करना है। यह पोस्टर वर्कशाप कर्मचारियों में चर्चा में बने हैं।
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बायोमेट्रिक लगाने की चल रही तैयारी

वर्कशाप कर्मचारी बायोमेट्रिक पद्धति के तहत अपनी कार्यालय में आने और जाने की उपस्थिति दर्ज करा सकें, इसके लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लगाया जा रहा है। इसका टेंडर हो चुका है।  वर्कशाप में इसके लिए लाइन बिछाई जा रही है। जल्द ही कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी लगेगी। इससे काफी हद तक काम छोड़कर जाने वाले कर्मचारियों पर अंकुश लग सकेगा।

हर महीने तैयार होते हैं औसत 680 वैगन

उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में 25 नवंबर 1895 को स्थापित इस रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने में वैगन मरम्मत के लिए वेल्डिंग, पेंटिंग, एसएसई यार्ड, एसएसई रीहेब, बीडब्लूआर, पावर हाउस, मिड नाइट, धातुशाला, व्हील, मशीन, आर बी फर्स्ट, सेकेंड, थर्ड, एयर ब्रेक लैब, टूल रूम समेत बाइस शॉप हैं। इन शॉपों में पांच हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। मरम्मत के लिए देश भर से यहां वैगन भेजे जाते हैं। यहां अभी एक माह में छह सौ अस्सी वैगनों की मरम्मत की जाती है।


तीस वर्ष होती है एक वैगन की उम्र

मालगाड़ी के एक वैगन की उम्र तीस वर्ष तक होती है, इसके बाद उसे कंडम घोषित कर दिया जाता है, लेकिन देखा गया है कि वैगन इतने समय तक चल नहीं पाता है। मौसम व अन्य कारणों से वैगनों का पूरी उम्र तक चल पाना संभव नहीं हो पाता है। रेलवे को एक वैगन पंद्रह से बीस लाख की कीमत का पड़ता है। समय से पहले वैगन के कंडम होने से रेलवे को हर साल करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ता है।
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