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जलनिगम के मुख्य अभियंता का पद खत्म करने की तैयारी!
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झांसी। नगर विकास मंत्रालय जलनिगम के मुख्य अभियंता के पद को खत्म करने की तैयारी कर रहा है। यही कारण है कि 31 दिसंबर को तत्कालीन मुख्य अभियंता के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद खाली चल रहा है। अगर ऐसा होता है तो बुंदेलखंड को कानपुर क्षेत्र से जोड़ दिया जाएगा। अभी इस पद के अधिकार क्षेत्र में बुंदेलखंड के सातों जिले आते हैं। इसके पहले मुरादाबाद व फैजाबाद में भी यह पद खत्म किए जा चुके हैं।
जलनिगम पेयजल योजनाओं की निर्माण इकाई है। अगर शासन किसी काम को करने के लिए एक लाख रुपये का बजट देता है तो उसमें साढ़े बारह प्रतिशत राशि सैंटेज (कार्य की राशि से मिलने वाला लाभ) के रूप में मुख्यालय कार्यालय में जमा हो जाती है। इस राशि को अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन व अन्य खर्चों पर व्यय किया जाता है। सरकार अब पेयजल योजनाएं का निजीकरण कर रही है। यही कारण है कि जलनिगम अब पुरानी योजनाओं को पूरा करने में लगा है। नई योजनाएं उनके हाथों में नहीं दीं जा रहीं हैं।
झांसी जलनिगम के पास पेयजल महायोजना के अलावा दो- तीन पुरानी योजनाएं हैं, जिन पर काम चल रहा है। महानगर में अम्रुत व ग्रामीण क्षेत्र में हर घर जल पहुंचाने की योजना पूरे होने के बाद आगे नई योजनाओं की आवश्यकता भी दिखाई नहीं दे रही है। इस कारण नगर विकास मंत्रालय धीरे- धीरे विभागीय ढांचे को छोटा करता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार झांसी में भी मुख्य अभियंता पद पर एक महीने बाद भी तैनाती नहीं होने को भी इसी बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके पूर्व ललितपुर व उरई में अधिशासी अभियंता के पद समाप्त किए जा चुके हैं।
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जलनिगम पेयजल योजनाओं की निर्माण इकाई है। अगर शासन किसी काम को करने के लिए एक लाख रुपये का बजट देता है तो उसमें साढ़े बारह प्रतिशत राशि सैंटेज (कार्य की राशि से मिलने वाला लाभ) के रूप में मुख्यालय कार्यालय में जमा हो जाती है। इस राशि को अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन व अन्य खर्चों पर व्यय किया जाता है। सरकार अब पेयजल योजनाएं का निजीकरण कर रही है। यही कारण है कि जलनिगम अब पुरानी योजनाओं को पूरा करने में लगा है। नई योजनाएं उनके हाथों में नहीं दीं जा रहीं हैं।
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झांसी जलनिगम के पास पेयजल महायोजना के अलावा दो- तीन पुरानी योजनाएं हैं, जिन पर काम चल रहा है। महानगर में अम्रुत व ग्रामीण क्षेत्र में हर घर जल पहुंचाने की योजना पूरे होने के बाद आगे नई योजनाओं की आवश्यकता भी दिखाई नहीं दे रही है। इस कारण नगर विकास मंत्रालय धीरे- धीरे विभागीय ढांचे को छोटा करता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार झांसी में भी मुख्य अभियंता पद पर एक महीने बाद भी तैनाती नहीं होने को भी इसी बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके पूर्व ललितपुर व उरई में अधिशासी अभियंता के पद समाप्त किए जा चुके हैं।
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