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जान का खतरा बताकर 150 लोगों ने मांगी सुरक्षा
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झांसी। झांसी, ललितपुर व जालौन में करीब 150 से अधिक लोगों ने जान का खतरा बताकर पुलिस से सुरक्षा मांगी है। तीनों जिलों की एलआईयू जांच भी कर रही है। करीब दस से अधिक आवेदन खारिज भी किए गए। हर किसी को सुरक्षा उपलब्ध कराना भी आसान नहीं है। गनर रखने वाले लोगों को कीमत भी चुकानी पड़ती है।
पुलिस विभाग दो तरह से लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है। ए-कैटेगरी में वे लोग आते हैं जो किसी आपराधिक मामले में वादी, गवाह या पैरोकार हैं। ऐसे लोगों को कोर्ट व अधिकारियों के निर्देश पर मुफ्त में सुरक्षा मिलती है। बी-कैटेगरी में वे लोग आते हैं, जिन्हें अन्य दूसरे कारणों से जान का खतरा बना रहता है। इसमें वीवीआईपी, कारोबारी और अन्य धनाढ्य लोग भी शामिल हैं। ऐसे लोगों को 10 से 100 फीसदी के निजी खर्चे पर चार श्रेणियों में सुरक्षा दी जाती है। जिले में बी-कैटेगिरी के तहत झांसी, ललितपुर व जालौन के करीब 150 लोगों ने सुरक्षा के तहत गनर मांगे हैं।
देना होता है खर्चा
गनर के लिए आवेदन करने वाले को जरूरत बताने के साथ ही अपनी सालाना आय का हलफनामा भी देना होता है। पांच लाख तक की सालाना आय वाले को गनर के खर्च 90,000 रुपये माह का 25 प्रतिशत, 5.15 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले को 50 प्रतिशत, 15.25 लाख रुपये तक की सालाना इनकम वाले को 75 प्रतिशत और 25 लाख रुपये सालाना से अधिक आय वाले को एक गनर के लिए 90 हजार रुपये प्रति माह चुकाने होंगे। यही नहीं, गनर स्वीकृत होने पर एसएसपी ऑफिस की ट्रेजरी में एक माह का शुल्क एडवांस जमा करना हेाता है।
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निजी सुरक्षा की नई दरें
विवरण आरक्षी मुख्य आरक्षी सब इंस्पेक्टर
10 प्रतिशत निजी व्यय पर 10142 11948 15918
25 प्रतिशत निजी व्यय पर 25029 29871 39796
75 प्रतिशत निजी व्यय पर 78086 89614 119387
100 प्रतिशत निजी व्यय पर 104115 119485 159183
विशेष परिस्थितियों में समिति करती फैसला
गनर दिए जाने का फैसला त्रिस्तरीय समिति करती है। पहले जिला स्तर पर एसएसपी व एसपी की रिपोर्ट पर जिला स्तरीय समिति संस्तुति करती है। उसके बाद डीएम की रिपोर्ट पर मंडल स्तरीय समिति के समक्ष मामला रखा जाता है। इसकी स्वीकृति मंडलायुक्त देते हैं। उसके बाद शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति गनर दिए जाने पर अंतिम फैसला करती है। उच्च स्तरीय समिति विशेष परिस्थितियों में निर्धारित शुल्क में बदलाव कर सकती है।
सुरक्षा लेने के लिए आवेदन करना पड़ता है। इसकी जांच भी पुलिस अपने स्तर से करती है। गनर लेने के लिए शुल्क देना पड़ता है। अन्य परिस्थितियों में कमेटी तय करती है।
दिनेश कुमार पी, एसएसपी
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पुलिस विभाग दो तरह से लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है। ए-कैटेगरी में वे लोग आते हैं जो किसी आपराधिक मामले में वादी, गवाह या पैरोकार हैं। ऐसे लोगों को कोर्ट व अधिकारियों के निर्देश पर मुफ्त में सुरक्षा मिलती है। बी-कैटेगरी में वे लोग आते हैं, जिन्हें अन्य दूसरे कारणों से जान का खतरा बना रहता है। इसमें वीवीआईपी, कारोबारी और अन्य धनाढ्य लोग भी शामिल हैं। ऐसे लोगों को 10 से 100 फीसदी के निजी खर्चे पर चार श्रेणियों में सुरक्षा दी जाती है। जिले में बी-कैटेगिरी के तहत झांसी, ललितपुर व जालौन के करीब 150 लोगों ने सुरक्षा के तहत गनर मांगे हैं।
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देना होता है खर्चा
गनर के लिए आवेदन करने वाले को जरूरत बताने के साथ ही अपनी सालाना आय का हलफनामा भी देना होता है। पांच लाख तक की सालाना आय वाले को गनर के खर्च 90,000 रुपये माह का 25 प्रतिशत, 5.15 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले को 50 प्रतिशत, 15.25 लाख रुपये तक की सालाना इनकम वाले को 75 प्रतिशत और 25 लाख रुपये सालाना से अधिक आय वाले को एक गनर के लिए 90 हजार रुपये प्रति माह चुकाने होंगे। यही नहीं, गनर स्वीकृत होने पर एसएसपी ऑफिस की ट्रेजरी में एक माह का शुल्क एडवांस जमा करना हेाता है।
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विवरण आरक्षी मुख्य आरक्षी सब इंस्पेक्टर
10 प्रतिशत निजी व्यय पर 10142 11948 15918
25 प्रतिशत निजी व्यय पर 25029 29871 39796
75 प्रतिशत निजी व्यय पर 78086 89614 119387
100 प्रतिशत निजी व्यय पर 104115 119485 159183
विशेष परिस्थितियों में समिति करती फैसला
गनर दिए जाने का फैसला त्रिस्तरीय समिति करती है। पहले जिला स्तर पर एसएसपी व एसपी की रिपोर्ट पर जिला स्तरीय समिति संस्तुति करती है। उसके बाद डीएम की रिपोर्ट पर मंडल स्तरीय समिति के समक्ष मामला रखा जाता है। इसकी स्वीकृति मंडलायुक्त देते हैं। उसके बाद शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति गनर दिए जाने पर अंतिम फैसला करती है। उच्च स्तरीय समिति विशेष परिस्थितियों में निर्धारित शुल्क में बदलाव कर सकती है।
सुरक्षा लेने के लिए आवेदन करना पड़ता है। इसकी जांच भी पुलिस अपने स्तर से करती है। गनर लेने के लिए शुल्क देना पड़ता है। अन्य परिस्थितियों में कमेटी तय करती है।
दिनेश कुमार पी, एसएसपी