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आईटीआई को मिलीं चार नई कार्यशालाएं, चार नए थ्योरी रूम भी तैयार, वर्षों की मांग अब पूरी
Mon, 01 Feb 2021 02:23 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Feb 2021 02:23 AM IST
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iti
- फोटो : अमर उजाला
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में ढाई करोड़ रुपये की लागत से चार नई कार्यशाला बनाई गईं हैं। इसके अलावा चार नए थ्योरी रूम भी तैयार किए गए हैं। इससे पठन-पाठन के साथ-साथ विद्यार्थियों के प्रायोगिक ज्ञान में बढ़ोत्तरी होगी।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में ड्राइंग, मोटर मैकेनिकल, ड्राफ्टमैन मैकेनिकल व स्टेनो (हिंदी व इंग्लिश) ट्रेड का संचालन तो किया जाता था, परंतु इन ट्रेन के अलग से कोई वर्कशॉप नहीं थे, जिससे विद्यार्थियों को समुचित प्रायोगिक ज्ञान हासिल नहीं हो पाता था। इसके लिए उक्त सभी ट्रेडों के वर्कशॉप की मांग पिछले काफी समय से की जा रही थी, जो अब जाकर पूरी हो गई है।
प्रदेश सरकार द्वारा सामान्य मद से ढाई करोड़ रुपये की धनराशि जारी की थी। इस राशि से आईटीआई परिसर में अलग से एक भवन का निर्माण किया गया है। दोमंजिला इस भवन में ड्राइंग, मोटर मैकेनिकल, ड्राफ्टमैन मैकेनिकल और स्टेनो (हिंदी व इंग्लिश) वर्कशॉप का निर्माण किया गया है। इसके अलावा चार थ्योरी रूम भी बनाए गए हैं, जिनमें कक्षाएं संचालित होंगी। अलग से वर्कशॉप बन जाने से विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से प्रायोगिक ज्ञान दिया जा सकेगा।
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तकनीक नई, मशीनें पुरानी
आईटीआई में टर्नर व मशीनिस्ट ट्रेड का भी संचालन किया जाता है। इनके पुराने वर्कशॉप भी हैं, जिनमें तीन दशक से अधिक पुरानी मशीनें लगी हुई हैं, जिनके जरिये विद्यार्थियों को प्रायोगिक ज्ञान दिया जाता है। आज की तकनीक के हिसाब से मशीनें बहुत पुरानी हो चुकी हैं। इन मशीनों के माध्यम ये प्रायोगिक प्रशिक्षण हासिल करने वालों को आज की तकनीक से कदमताल करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नए वर्कशॉप संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए लाभदायक साबित हो रहे हैं। इसके अलावा नई बिल्डिंग में चार नए थ्योरी रूम भी बने हैं। नए वर्कशॉप बन जाने से विद्यार्थियों के प्रायोगिक ज्ञान में बढ़ोत्तरी होगी। - अरुण कुमार, प्रधानाचार्य - राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान
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राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में ड्राइंग, मोटर मैकेनिकल, ड्राफ्टमैन मैकेनिकल व स्टेनो (हिंदी व इंग्लिश) ट्रेड का संचालन तो किया जाता था, परंतु इन ट्रेन के अलग से कोई वर्कशॉप नहीं थे, जिससे विद्यार्थियों को समुचित प्रायोगिक ज्ञान हासिल नहीं हो पाता था। इसके लिए उक्त सभी ट्रेडों के वर्कशॉप की मांग पिछले काफी समय से की जा रही थी, जो अब जाकर पूरी हो गई है।
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प्रदेश सरकार द्वारा सामान्य मद से ढाई करोड़ रुपये की धनराशि जारी की थी। इस राशि से आईटीआई परिसर में अलग से एक भवन का निर्माण किया गया है। दोमंजिला इस भवन में ड्राइंग, मोटर मैकेनिकल, ड्राफ्टमैन मैकेनिकल और स्टेनो (हिंदी व इंग्लिश) वर्कशॉप का निर्माण किया गया है। इसके अलावा चार थ्योरी रूम भी बनाए गए हैं, जिनमें कक्षाएं संचालित होंगी। अलग से वर्कशॉप बन जाने से विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से प्रायोगिक ज्ञान दिया जा सकेगा।
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तकनीक नई, मशीनें पुरानी
आईटीआई में टर्नर व मशीनिस्ट ट्रेड का भी संचालन किया जाता है। इनके पुराने वर्कशॉप भी हैं, जिनमें तीन दशक से अधिक पुरानी मशीनें लगी हुई हैं, जिनके जरिये विद्यार्थियों को प्रायोगिक ज्ञान दिया जाता है। आज की तकनीक के हिसाब से मशीनें बहुत पुरानी हो चुकी हैं। इन मशीनों के माध्यम ये प्रायोगिक प्रशिक्षण हासिल करने वालों को आज की तकनीक से कदमताल करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नए वर्कशॉप संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए लाभदायक साबित हो रहे हैं। इसके अलावा नई बिल्डिंग में चार नए थ्योरी रूम भी बने हैं। नए वर्कशॉप बन जाने से विद्यार्थियों के प्रायोगिक ज्ञान में बढ़ोत्तरी होगी। - अरुण कुमार, प्रधानाचार्य - राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान