फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   It's on all the dirty business

सब गंदा है पर धंधा है ये

Fri, 27 May 2016 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 27 May 2016 01:11 AM IST
विज्ञापन
It's on all the dirty business
medical collage, jhansi news - फोटो : demo
कॉमन इंट्रो:
विज्ञापन

‘सब गंदा है पर धंधा है ये’ कंपनी फिल्म का यह गाना मेडिकल कॉलेज के चंद डॉक्टरों की फर्जीवाड़ा ‘कंपनी’ पर बिल्कुल फिट बैठता है। डॉक्टरों की यह ‘कंपनी’ मेडिकल कॉलेज में फर्जी मेडिकोलीगल बनाने का धंधा चला रही है। इस ‘कंपनी’ ने महज दो हजार रुपये में निर्दोषों को दोषी बनाने का ठेका ले रखा है। इस ‘कंपनी’ की करतूतों से पीड़ित एक महिला ने ही मोबाइल में वीडियो क्लिप बनाकर डॉक्टरों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया है।

झांसी। 23 मई 2016 को केकेपुरी निवासी मीनू ढल मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में दाखिल होती हैं। पर्चा बनवाने के बाद वह मेडिकोलीगल बनवाने को ईएमओ कक्ष में पहुंचती हैं। थोड़ी देर चली बातचीत के बाद वहां जो हुआ उससे वह स्तब्ध रह गईं। महज दो हजार रुपये में उन्हें फर्जी मेडिकोलीगल बनाकर थमा दिया गया।
विज्ञापन


मीनू खुद को भी डॉक्टरों के इस फर्जीवाड़े का शिकार बताती हैं। उनके अनुसार परिवार के कुछ लोगों से उनका संपत्ति विवाद चल रहा है। आरोप है कि बीती 11 मई को पारिवारिक महिला ने मेडिकल कॉलेज से फर्जी मेडिकोलीगल बनवाया, जिसके आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया। जब उन्हें इसकी जानकारी हुई तो वह डॉक्टरों के इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कराने के लिए बीते सोमवार को मेडिकल कॉलेज पहुंची। वहां उन्होंने पर्चा बनाने के बाद ईएमओ कक्ष में जाकर एक डॉक्टर के बारे में पूछा।
विज्ञापन
विज्ञापन


कक्ष में बैठे दूसरे डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनकी आज ड्यूटी नहीं है। फिर एक डॉक्टर ने मीनू से पूछा कि क्या मेडिकोलीगल बनवाना है? मीनू ने कहा हां। डॉक्टर ने पूछा कि किसने भेजा है, तो मीनू ने अपनी उसी पारिवारिक महिला का नाम बताया जो 11 मई को मेडिकोलीगल बनवाकर गई थी। इस पर डॉक्टर बोला कि फीस तो पता है न आपको? वह बोलीं नहीं। फिर डॉक्टर ने पूछा कि क्या मामला है। मीनू ने कहा कि पड़ोसी से विवाद हुआ है।

इसके बाद डॉक्टर ने पूछा कि वकील के जरिए कोर्ट में मुकदमा करना है या थाने में शिकायतीपत्र देना है। मीनू ने थाने में शिकायत करने की बात कही। फिर डॉक्टर ने सवाल दागा किस तारीख का मेडिकोलीगल बनना है। उन्होंने कहा कि आज की ही तारीख का। थोड़ी देर चली बातचीत के दौरान ही डॉक्टर ने उनका फर्जी मेडिकोलीगल बनाकर थमा दिया। मीनू के मुताबिक फर्जी मेडिकोलीगल बनाने के लिए डॉक्टर ने उनसे दो हजार रुपये लिए।

मेडिकोलीगल में नियमों को किया दरकिनार
फर्जी मेडिकोलीगल बनाने में डॉक्टरोें ने नियमों को भी दरकिनार किया। दरअसल, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने मारपीट के मामलों में अपने आदेश के बिना मेडिकोलीगल न बनाने के कई बार निर्देश दिए हैं, मगर फिर भी धड़ल्ले से डॉक्टरों द्वारा मेडिकोलीगल बनाया जा रहा है। मीनू के मामले में भी सीएमएस से आदेश नहीं लिया गया। इसके अलावा एक्सरे को भी एडवाइज नहीं किया गया। सिर्फ लाल निशान के आधार पर ही ‘केप्ट अंडर ऑब्जर्वेशन’ लिख दिया।



इस मामले में शिकायत मिलने के बाद जांच कराई जाएगी। मारपीट के मामलों में मेरे आदेश के बिना मेडिकोलीगल न बनाए जाने के निर्देश कई बार दिए जा चुके हैं। देखा जाएगा कि मुझसे आदेश लिया गया या नहीं। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. हरीशचंद्र आर्या, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed