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Jhansi News: भाजपा के बुंदेली भगवा दुर्ग में सेंध लगाना विपक्ष के लिए नहीं आसान
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बुंदेलखंड की झांसी-ललितपुर समेत सभी 11 लोकसभा सीटों पर 2014 से बना हुआ है भाजपा का कब्जा, दमोह सीट पर 1989 से खिल रहा कमल
प्वाइंटर
हमीरपुर, सतना और बैतूल सीटों पर भी लंबे समय से काबिज है भाजपा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड भगवा दुर्ग बना हुआ है। क्षेत्र की झांसी-ललितपुर समेत सभी 11 लोकसभा सीटें भाजपा के पास हैं, जिनमें चार सीटें उत्तर प्रदेश और सात सीटें मध्यप्रदेश की शामिल हैं। कभी यह क्षेत्र कांग्रेस का मजबूत गढ़ था, लेकिन पिछले कुछ लोकसभा चुनावों में स्थिति बदली औैर राम मंदिर आंदोलन तथा मोदी लहर के बाद बुंदेलखंड की सभी 11 लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में आ गईं। 2014 के बाद से बुंदेलखंड भाजपा का किला बना हुआ है। दमोह सीट पर 1989 से अब तक भाजपा का कब्जा है। इसी तरह हमीरपुर, सतना और बैतूल सीटों पर भी लंबे समय से कमल खिला हुआ है। ऐसे में 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के इस किले में सेंध लगाना विपक्ष के लिए कड़ी चुनौती होगी।
बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश के झांसी, जालौन, ललितपुर, चित्रकूट, हमीरपुर, बांदा, महोबा जिले शामिल हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश के सागर, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दतिया जिले शामिल हैं। इन 13 जिलों में लोकसभा की 11 सीटें झांसी-ललितपुर, बांदा-चित्रकूट, हमीरपुर-महोबा, जालौन, टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा, होशंगाबाद, बैतूल शामिल हैं। इन सभी सीटों पर 2014 से भाजपा का कब्जा है। दमोह सीट पर 1989 में भाजपा के लोकेंद्र सिंह सांसद चुने गए। 1991, 1996, 1998, 1999 के चुनावों में भाजपा के रामकृष्ण कुसमरिया सांसद बने। 2004 में भाजपा के चंद्रभान भैया, 2009 में भाजपा के शिवराज लोधी, 2014 और 2019 में भाजपा के प्रह्लाद पटेल सांसद चुने गए थे। हमीरपुर सीट पर 1998, 1999, 2004 के चुनावों में सुरेश चंदेल सांसद चुने गए। इसके बाद से अब तक भाजपा के अनुराग ठाकुर सांसद हैं। बैतूल सीट 1996 से भाजपा के पास है। 1996, 1998, 1999, 2004 के चुनावों में विजय खंडेलवाल सांसद चुने गए। 2009, 2014 में ज्योति धुर्वे, 2019 में दुर्गादास उइके सांसद चुने गए थे।
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बुंदेलखंड राज्य बनाने का मुद्दा भी होगा गरम
बुंदेलखंड को राज्य बनाने का मुद्दा चुनावों में उठता रहा है। बुंदेली समाज, बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा, राज्य निर्माण सेना के बैनर तले यह मुद्दा गरम होता रहा है। राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर आंदोलनकारियों को आश्वासन देते रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। इस चुनाव में भी इस मुद्दे के गरम होने की उम्मीद है।
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सात सीटों पर कांग्रेस और चार सीटों पर सपा लड़ेगी चुनाव
लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत बुंदेलखंड की सात सीटों झांसी-ललितपुर, टीकमगढ़, दमोह, सतना, रीवा, होशंगाबाद, बैतूल में कांग्रेस चुनाव लड़ेगी। समाजवादी पार्टी बांदा, हमीरपुर-महोबा, जालौन और खजुराहो सीट पर चुनाव लड़ेगी।
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पानी संकट, बेरोजगारी, पलायन बनेंगे चुनावी मुद्दे
बुंदेलखंड में पानी संकट, बेरोजगारी और पलायन की समस्या चली आ रही है। चुनावों में यह मुद्दे उठते रहे हैं। इस बार भी विपक्ष इन समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाएगा। सपा और कांग्रेस इन मुद्दों के सहारे चुनाव में अपनी नैया पार लगाने के लिए पूरी कोशिश करेंगी।
बयान-- -- --
बुंदेलखंड के विकास पर भाजपा सरकार ने ध्यान नहीं दिया। मंडियों की बदहाली, कोच फैक्टरी, खादी और जड़ी-बूटी उद्योग की अनदेखी की गई है, जिसके चलते यहां बेरोजगारी की समस्या है। लोग पलायन कर रहे हैं। ओलावृष्टि से नुकसान का मुआवजा किसानों को अभी तक नहीं दिया गया। इसी तरह पानी का संकट भी जनता झेल रही है। लोकसभा चुनाव में इन मुद्दों को लेकर जनता के सामने जाएंगे।
- प्रदीप जैन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री
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बुंदेलखंड की झांसी-ललितपुर समेत सभी 11 लोकसभा सीटों पर 2014 से बना हुआ है भाजपा का कब्जा, दमोह सीट पर 1989 से खिल रहा कमल
प्वाइंटर
हमीरपुर, सतना और बैतूल सीटों पर भी लंबे समय से काबिज है भाजपा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड भगवा दुर्ग बना हुआ है। क्षेत्र की झांसी-ललितपुर समेत सभी 11 लोकसभा सीटें भाजपा के पास हैं, जिनमें चार सीटें उत्तर प्रदेश और सात सीटें मध्यप्रदेश की शामिल हैं। कभी यह क्षेत्र कांग्रेस का मजबूत गढ़ था, लेकिन पिछले कुछ लोकसभा चुनावों में स्थिति बदली औैर राम मंदिर आंदोलन तथा मोदी लहर के बाद बुंदेलखंड की सभी 11 लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में आ गईं। 2014 के बाद से बुंदेलखंड भाजपा का किला बना हुआ है। दमोह सीट पर 1989 से अब तक भाजपा का कब्जा है। इसी तरह हमीरपुर, सतना और बैतूल सीटों पर भी लंबे समय से कमल खिला हुआ है। ऐसे में 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के इस किले में सेंध लगाना विपक्ष के लिए कड़ी चुनौती होगी।
बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश के झांसी, जालौन, ललितपुर, चित्रकूट, हमीरपुर, बांदा, महोबा जिले शामिल हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश के सागर, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दतिया जिले शामिल हैं। इन 13 जिलों में लोकसभा की 11 सीटें झांसी-ललितपुर, बांदा-चित्रकूट, हमीरपुर-महोबा, जालौन, टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा, होशंगाबाद, बैतूल शामिल हैं। इन सभी सीटों पर 2014 से भाजपा का कब्जा है। दमोह सीट पर 1989 में भाजपा के लोकेंद्र सिंह सांसद चुने गए। 1991, 1996, 1998, 1999 के चुनावों में भाजपा के रामकृष्ण कुसमरिया सांसद बने। 2004 में भाजपा के चंद्रभान भैया, 2009 में भाजपा के शिवराज लोधी, 2014 और 2019 में भाजपा के प्रह्लाद पटेल सांसद चुने गए थे। हमीरपुर सीट पर 1998, 1999, 2004 के चुनावों में सुरेश चंदेल सांसद चुने गए। इसके बाद से अब तक भाजपा के अनुराग ठाकुर सांसद हैं। बैतूल सीट 1996 से भाजपा के पास है। 1996, 1998, 1999, 2004 के चुनावों में विजय खंडेलवाल सांसद चुने गए। 2009, 2014 में ज्योति धुर्वे, 2019 में दुर्गादास उइके सांसद चुने गए थे।
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बुंदेलखंड राज्य बनाने का मुद्दा भी होगा गरम
बुंदेलखंड को राज्य बनाने का मुद्दा चुनावों में उठता रहा है। बुंदेली समाज, बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा, राज्य निर्माण सेना के बैनर तले यह मुद्दा गरम होता रहा है। राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर आंदोलनकारियों को आश्वासन देते रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। इस चुनाव में भी इस मुद्दे के गरम होने की उम्मीद है।
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सात सीटों पर कांग्रेस और चार सीटों पर सपा लड़ेगी चुनाव
लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत बुंदेलखंड की सात सीटों झांसी-ललितपुर, टीकमगढ़, दमोह, सतना, रीवा, होशंगाबाद, बैतूल में कांग्रेस चुनाव लड़ेगी। समाजवादी पार्टी बांदा, हमीरपुर-महोबा, जालौन और खजुराहो सीट पर चुनाव लड़ेगी।
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पानी संकट, बेरोजगारी, पलायन बनेंगे चुनावी मुद्दे
बुंदेलखंड में पानी संकट, बेरोजगारी और पलायन की समस्या चली आ रही है। चुनावों में यह मुद्दे उठते रहे हैं। इस बार भी विपक्ष इन समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाएगा। सपा और कांग्रेस इन मुद्दों के सहारे चुनाव में अपनी नैया पार लगाने के लिए पूरी कोशिश करेंगी।
बयान
बुंदेलखंड के विकास पर भाजपा सरकार ने ध्यान नहीं दिया। मंडियों की बदहाली, कोच फैक्टरी, खादी और जड़ी-बूटी उद्योग की अनदेखी की गई है, जिसके चलते यहां बेरोजगारी की समस्या है। लोग पलायन कर रहे हैं। ओलावृष्टि से नुकसान का मुआवजा किसानों को अभी तक नहीं दिया गया। इसी तरह पानी का संकट भी जनता झेल रही है। लोकसभा चुनाव में इन मुद्दों को लेकर जनता के सामने जाएंगे।
- प्रदीप जैन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री