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रेलवे ठेके पर तैयार करवाएगा आइसोलेशन कोच
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रेलवे
- फोटो : ?????
झांसी। रेलवे अब आइसोलेशन कोच ठेके पर तैयार करवाने जा रहा है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इस बार उत्तर मध्य रेलवे ने झांसी रेल मंडल को 90 आइसोलेशन कोच तैयार करने का लक्ष्य दिया है। इसमें 70 कोच एमएलआर कारखाना और 20 झांसी डिपो में तैयार होने हैं। कोचों की कमी को दूसरे जोन से मंगाकर पूरा किया जा रहा है।
किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए रेलवे ने दिल्ली और आसपास के स्टेशनों पर एक हजार आइसोलेशन कोच खड़े रखने का निर्णय लिया है। इसी मकसद से पिछले महीने रेलवे बोर्ड ने दोबारा सभी कोचिंग और कारखानों को आइसोलेशन कोच बनाने का लक्ष्य दिया था। इस बार झांसी के कोचिंग डिपो को 20 व कोच मरम्मत कारखाने को 70 तथा प्रयागराज मंडल को 50 व आगरा मंडल को 10 कोचों का लक्ष्य दिया गया है। प्रत्येक कोच में 8 आइसोलेशन वार्ड (नौ बेड) तैयार किए जाएंगे, जिसमें प्रत्येक वार्ड में आपातकालीन स्थिति में एक मरीज को रखा जा सकेगा। बोगियों को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने के लिए शयनयान एवं सामान्य श्रेणी के कोच को परिवर्तित किया जाएगा। इस बार कोच मरम्मत कारखाने में आइसोलेशन कोच ठेके पर तैयार करवाए जा रहे हैं। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
इसके पूर्व अप्रैल में उत्तर मध्य रेलवे के झांसी के कोचिंग डिपो ने 20, कोच मरम्मत कारखाने ने 50, कोचिंग डिपो प्रयागराज ने 30 व कोचिंग डिपो आगरा ने 30 कोच आइसोलेशन वार्ड में परिवर्तित किए थे।
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- रेलवे बोर्ड ने पिछले महीने उत्तर मध्य रेलवे को 150 नए आइसोलेशन वार्ड का लक्ष्य दिया है। जहां कर्मचारियों की कमी है। वहां पर ठेके पर आइसोलेशन कोच तैयार करवाए जा रहे हैं।
एके सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी।
एक कोच पर ये आता है खर्च
प्रत्येक आइसोलेशन कोच पर 77678 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें दो बोतल होल्डर, दो कपड़े टांगने के हुक, आक्सीजन सिलिंडर ब्रेकेट, पैर वाले तीन कूड़ेदान, स्नानघर में व्यवस्था (स्टूल, मग, बाल्टी), हर कोच में एक नर्स और चिकित्सक के लिए अलग से कक्ष होगा। कोच में प्लास्टिक के चादर लगाए जा रहे हैं। मेडिकल उपकरणों को चलाने के लिए पर्याप्त बिजली के स्विच व बीच की बर्थ को हटाया जा रहा है।
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किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए रेलवे ने दिल्ली और आसपास के स्टेशनों पर एक हजार आइसोलेशन कोच खड़े रखने का निर्णय लिया है। इसी मकसद से पिछले महीने रेलवे बोर्ड ने दोबारा सभी कोचिंग और कारखानों को आइसोलेशन कोच बनाने का लक्ष्य दिया था। इस बार झांसी के कोचिंग डिपो को 20 व कोच मरम्मत कारखाने को 70 तथा प्रयागराज मंडल को 50 व आगरा मंडल को 10 कोचों का लक्ष्य दिया गया है। प्रत्येक कोच में 8 आइसोलेशन वार्ड (नौ बेड) तैयार किए जाएंगे, जिसमें प्रत्येक वार्ड में आपातकालीन स्थिति में एक मरीज को रखा जा सकेगा। बोगियों को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने के लिए शयनयान एवं सामान्य श्रेणी के कोच को परिवर्तित किया जाएगा। इस बार कोच मरम्मत कारखाने में आइसोलेशन कोच ठेके पर तैयार करवाए जा रहे हैं। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
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इसके पूर्व अप्रैल में उत्तर मध्य रेलवे के झांसी के कोचिंग डिपो ने 20, कोच मरम्मत कारखाने ने 50, कोचिंग डिपो प्रयागराज ने 30 व कोचिंग डिपो आगरा ने 30 कोच आइसोलेशन वार्ड में परिवर्तित किए थे।
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- रेलवे बोर्ड ने पिछले महीने उत्तर मध्य रेलवे को 150 नए आइसोलेशन वार्ड का लक्ष्य दिया है। जहां कर्मचारियों की कमी है। वहां पर ठेके पर आइसोलेशन कोच तैयार करवाए जा रहे हैं।
एके सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी।
एक कोच पर ये आता है खर्च
प्रत्येक आइसोलेशन कोच पर 77678 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें दो बोतल होल्डर, दो कपड़े टांगने के हुक, आक्सीजन सिलिंडर ब्रेकेट, पैर वाले तीन कूड़ेदान, स्नानघर में व्यवस्था (स्टूल, मग, बाल्टी), हर कोच में एक नर्स और चिकित्सक के लिए अलग से कक्ष होगा। कोच में प्लास्टिक के चादर लगाए जा रहे हैं। मेडिकल उपकरणों को चलाने के लिए पर्याप्त बिजली के स्विच व बीच की बर्थ को हटाया जा रहा है।