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आईपीएल के परवान चढ़ने के साथ गरमाया सट्टा

Sun, 16 Apr 2017 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 16 Apr 2017 01:04 AM IST
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IPL betting scandal with the climb
ipl - फोटो : demo
आईपीएल सीजन -10 के परवान चढ़ने के साथ सट्टा बाजार भी गरमा गया है। करोड़ों के दांव खेेले जा रहे हैं। ऐसा भी नहीं कि पुलिस को इसकी न हो। यह अलग बात है कि छुटभइये सटोरियों को पकड़कर कोटा पूरा कर रही है। 
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 मैच शुरू होने के साथ ही दिल्ली और मुंबई से लाइनें खुल जाती हैं और साथ ही शुरू हो जाती है मोबाइल फोन के जरिये बुकिंग। स्थानीय एजेंट और फिर उनसे जुड़ा संजाल फटाफट क्रिकेट में फटाफट दांव लगवाना शुरू कर देता है। मैच की पहली बॉल से लेकर जीत - हार का फैसला होने तक भाव में उतार - चढ़ाव बना रहता है। इस काम में पुराने सटोरिये तो सक्रिय हैं ही, कुछ नये नाम और जुड़ गए हैं। सूत्रों के अनुसार नगर में लगभग बीस अच्छी साख वाली गद्दियां (बुकी) हैं, जहां बुकिंग की जा रही हैं। इसके अलावा छोटे - मोटे कई बुकी भी सक्रिय हैं। उन्हें ढाई प्रतिशत कमीशन मिलता है।   
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सट्टा का सिस्टम 
क्रिकेट के सट्टे का कारोबार लैपटॉप और मोबाइल के जरिये संचालित किया जाता है। दिल्ली - मुंबई में बैठे आका स्थानीय बुकी को आईडी और पासवर्ड जारी करते हैं। इससे बुकी को लाइन मिल जाती है। लाइन के लिए बुकी को पांच हजार रुपये महीना अतिरिक्त देना होता है। हर मैच का नया पासवर्ड दिया जाता है। जो बुकी के मोबाइल पर आता है। इसके अलावा एक बार आईडी खोलने पर सौ रुपये का भुगतान बुकी को करना होता है। बुकी स्थानीय स्तर पर मोबाइल फोन के जरिये सटोरियों से बुकिंग लेते हैं। 
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हर सटोरिये की लिमिट है तय 
सटोरियों की उनकी साख के अनुसार बुकी के यहां लिमिट तय है। यदि किसी सटोरिये की दस हजार तक की लिमिट है, तो उसके इतने ही धनराशि की दांव बुक किए जाएंगे। साख बिगड़ने पर उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाता है। बुकी के आदमी पैसा वसूलते हैं और जीतने वाले तक रकम पहुंचाते हैं। 

सेशन के हिसाब से लगते हैं दांव 
मैच की शुरुआत के साथ ही दांव लगना शुरू हो जाते हैं। पहली पारी में छह ओवर, दस ओवर और बीस ओवर के तीन सेशन होते हैं। जबकि, दूसरी पारी में पहले छह ओवर का एक ही सेशन होता है। लाइन पर सेशन का भाव आता रहता है, जो लगातार बदलता रहता है। सटोरियों के यस और नॉट कहने पर बुकिंग हो जाती है। मजबूत टीम को फेवरिट और कमजोर टीम को नॉन फेवरिट बोला जाता है। नॉन फेवरिट टीम पर दांव लगाने वालों को उसके जीतने पर ज्यादा मुनाफा होता है। इसके अलावा फंसे हुए मैच में ‘लगाना’ का दांव भी लगता है। इसका मतलब है कि हार की कगार पर जा पहुंची टीम मैच के आखिरी क्षणों में जीत जाती है, तो सटोरियों को ज्यादा मुनाफा होता है। 


पुलिस है सतर्क
सट्टा-जुआ पर अंकुश लगाने को पुलिस सतर्कता बरत रही है। लगातार कार्रवाई जारी हैं। क्रिकेट के सट्टे पर भी पुलिस की निगाहें लगी हुई हैं। मामला पकड़ में आने पर तत्काल कार्रवाई होगी।
- दिनेश कुमार सिंह, एसपी सिटी 
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