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भारतीय सेना ने सूझबूझ से, रूस ने आक्रामक तेवरों से ‘आतंकियों को मारा’
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झांसी के बबीना फाइरिंग रेंज में चल रहे भारत-रूस के संयुक्त सैन्याभ्यास इंद्र - 2019 में आतंकियों के ठ
भारतीय सेना ने सूझबूझ से, रूस ने आक्रामक तेवरों से ‘आतंकियों को मारा’
झांसी। भारत-रूस संयुक्त सैन्याभ्यास ‘इंद्र 2019’ के तहत बबीना छावनी की फायरिंग रेंज में भारत और रूस की सेनाओं ने रिहाइशी इलाके में गढ़ बनाए आतंकी संगठन पर हमले का युद्धाभ्यास किया। इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने वायु सेना के सहयोग से अपने-अपने रण कौशल का प्रदर्शन कर आतंकियों के ठिकाने और आतंकियों का खात्मा किया। भारत की सेना ने खास रणनीति के तहत दुश्मन की छाती पर कमांडो को उतार कर टी-90 टैंक और बीएमपी के कवर फायर के बीच कार्रवाई की। वहीं, रूस की सेना ने आक्रामक गोलाबारी के बीच आतंकियों के पांव उखाड़े।
सुबह ही भारत-रूस की सेनाओं को लक्ष्य बता दिया गया था। 40-50 भवनों वाले एक इलाके को आतंकियों ने अपने कब्जे में लिया हुआ था। इसमें उन्होंने कुछ आम नागरिकों को बंधक बनाया हुआ था। सूचना के मुताबिक आतंकियों के पास बड़ी मात्रा में भारी हथियार और गोला, बारूद भी मौजूद था। दोनों ही सेनाओं को तय समय सीमा में बंधक बनाए गए आम नागरिकों को सुरक्षित निकालना था और आतंकियों का खात्मा करना था। पहले इस ऑपरेशन को भारतीय सेना ने अंजाम दिया। इसके बाद रूस की सेना ने।
एक और ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
भारतीय सेना की कार्रवाई कुछ इस तरह थी कि आतंकियों को कार्रवाई की आहट तक नहीं हुई। हेलीकॉप्टर के जरिए कमांडो आतंकी ठिकाने के नजदीक उतर कर अलग-अलग टीम बनाकर पूरे इलाके में फैल गए। उनके पोजीशन लेते ही टी-90 टैंक से दुश्मन की ओर फायरिंग की गई। इससे आतंकियों का ध्यान टैंकों की ओर हो गया। इस बीच कमांडो उन बिल्डिंगों तक पहुंचने लगे जहां आतंकी छिपे बैठे थे। बीएमपी (इनफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल) के कवर फायर के बीच सामने से भी सैनिक आतंकियों के ठिकाने तक पहुंच गए। पहले नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया और बाद में टैंक से गोला दाग कर आतंकियों का मुख्यालय तबाह कर दिया गया। आतंकियों का सरगना सफेद झंडा लहराता हुआ सरेंडर करने की मुद्रा में बाहर आया और वाहन से भाग खड़ा हुआ। सेना के वाहनों ने उसका पीछा कर मौत के घाट उतार दिया।
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नहीं दिया पलक झपकने का समय
आतंकियों का टारगेट मिलते ही रूस की सेना ने एक साथ आक्रामक कार्रवाई की। गोलाबारी के बीच बीएमपी की आड़ में रूस के सैनिक आगे बढ़ते रहे। चारों तरफ गिर रहे गोलों से सकपकाए आतंकी समझ ही नहीं कि किस तरफ से हमला करें और किस ओर बच कर भागें। रूस के सैनिकों ने कार्रवाई को दो चरण में बांटा। एक हमलावर और दूसरा बचाव। बचाव वाली टीम अपने लक्ष्य के तहत बंधक बनाए गए आम नागरिकों को सुरक्षित निकालने में जुटी थी। उन्हें आतंकियों की संख्या उनके पास मौजूद गोला-बारूद की कोई चिंता नहीं थी। रूस के सैनिकों ने भी एक-एक आतंकी को चुन-चुन कर मार गिराया। इसके बाद सर्च ऑपरेशन पूरा कर हथियारों व अन्य साजो सामान को बरामद कर वापस लौटी।
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झांसी। भारत-रूस संयुक्त सैन्याभ्यास ‘इंद्र 2019’ के तहत बबीना छावनी की फायरिंग रेंज में भारत और रूस की सेनाओं ने रिहाइशी इलाके में गढ़ बनाए आतंकी संगठन पर हमले का युद्धाभ्यास किया। इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने वायु सेना के सहयोग से अपने-अपने रण कौशल का प्रदर्शन कर आतंकियों के ठिकाने और आतंकियों का खात्मा किया। भारत की सेना ने खास रणनीति के तहत दुश्मन की छाती पर कमांडो को उतार कर टी-90 टैंक और बीएमपी के कवर फायर के बीच कार्रवाई की। वहीं, रूस की सेना ने आक्रामक गोलाबारी के बीच आतंकियों के पांव उखाड़े।
सुबह ही भारत-रूस की सेनाओं को लक्ष्य बता दिया गया था। 40-50 भवनों वाले एक इलाके को आतंकियों ने अपने कब्जे में लिया हुआ था। इसमें उन्होंने कुछ आम नागरिकों को बंधक बनाया हुआ था। सूचना के मुताबिक आतंकियों के पास बड़ी मात्रा में भारी हथियार और गोला, बारूद भी मौजूद था। दोनों ही सेनाओं को तय समय सीमा में बंधक बनाए गए आम नागरिकों को सुरक्षित निकालना था और आतंकियों का खात्मा करना था। पहले इस ऑपरेशन को भारतीय सेना ने अंजाम दिया। इसके बाद रूस की सेना ने।
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एक और ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
भारतीय सेना की कार्रवाई कुछ इस तरह थी कि आतंकियों को कार्रवाई की आहट तक नहीं हुई। हेलीकॉप्टर के जरिए कमांडो आतंकी ठिकाने के नजदीक उतर कर अलग-अलग टीम बनाकर पूरे इलाके में फैल गए। उनके पोजीशन लेते ही टी-90 टैंक से दुश्मन की ओर फायरिंग की गई। इससे आतंकियों का ध्यान टैंकों की ओर हो गया। इस बीच कमांडो उन बिल्डिंगों तक पहुंचने लगे जहां आतंकी छिपे बैठे थे। बीएमपी (इनफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल) के कवर फायर के बीच सामने से भी सैनिक आतंकियों के ठिकाने तक पहुंच गए। पहले नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया और बाद में टैंक से गोला दाग कर आतंकियों का मुख्यालय तबाह कर दिया गया। आतंकियों का सरगना सफेद झंडा लहराता हुआ सरेंडर करने की मुद्रा में बाहर आया और वाहन से भाग खड़ा हुआ। सेना के वाहनों ने उसका पीछा कर मौत के घाट उतार दिया।
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नहीं दिया पलक झपकने का समय
आतंकियों का टारगेट मिलते ही रूस की सेना ने एक साथ आक्रामक कार्रवाई की। गोलाबारी के बीच बीएमपी की आड़ में रूस के सैनिक आगे बढ़ते रहे। चारों तरफ गिर रहे गोलों से सकपकाए आतंकी समझ ही नहीं कि किस तरफ से हमला करें और किस ओर बच कर भागें। रूस के सैनिकों ने कार्रवाई को दो चरण में बांटा। एक हमलावर और दूसरा बचाव। बचाव वाली टीम अपने लक्ष्य के तहत बंधक बनाए गए आम नागरिकों को सुरक्षित निकालने में जुटी थी। उन्हें आतंकियों की संख्या उनके पास मौजूद गोला-बारूद की कोई चिंता नहीं थी। रूस के सैनिकों ने भी एक-एक आतंकी को चुन-चुन कर मार गिराया। इसके बाद सर्च ऑपरेशन पूरा कर हथियारों व अन्य साजो सामान को बरामद कर वापस लौटी।