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निर्दलियों ने हर चुनाव में किस्मत आजमाई, जीत एक बार ही हाथ आई
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झांसी। विधानसभा के हर चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई, लेकिन जीत एक बार ही उनके हिस्से में आई। झांसी सदर विधानसभा सीट से 1962 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी जीत नहीं पाया। जबकि, जिले की तीन अन्य विधानसभाओं में तो कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी अब तक मुख्य मुकाबले में भी नहीं पहुंच पाया।
झांसी सदर विधानसभा के मतदाताओं ने 1962 के चुनाव में पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी लखपत राम शर्मा को जिताया था। उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रत्याशी दो बार विधायक रह चुके आत्माराम गोविंद खैर को शिकस्त दी थी। हालांकि, इससे पहले 1951 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी आत्माराम गोविंद खैर को निर्दलीय प्रत्याशी अयोध्या प्रसाद से चुनौती मिली थी, जबकि 1957 के चुनाव में खैर को निर्दलीय प्रत्याशी पन्नालाल शर्मा ने टक्कर दी थी। लेकिन, इन दोनों ही चुनाव में जीत कांग्रेस प्रत्याशी की ही हुई थी। इसके बाद झांसी सदर सीट पर 2009 में हुए उप चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी बृजेंद्र कुमार व्यास मुख्य मुकाबले में पहुंचे थे। लेकिन, उन्हें बसपा के कैलाश साहू से हार का सामना करना पड़ा था।
बबीना विधानसभा सीट पर अब तक हुए विधानसभा के चुनावों में जीत तो दूर की बात, कोई निर्दलीय प्रत्याशी मुख्य मुकाबले में भी नहीं पहुंच पाया। कमोबेश यही स्थित मऊरानीपुर में भी रही। यहां भी अब तक चुनावों में पहले और दूसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी अपनी जगह नहीं बना पाया। गरौठा विधानसभा सीट पर भी कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी पहले और दूसरे नंबर की लड़ाई में नहीं आ सका।
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झांसी सदर विधानसभा के मतदाताओं ने 1962 के चुनाव में पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी लखपत राम शर्मा को जिताया था। उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रत्याशी दो बार विधायक रह चुके आत्माराम गोविंद खैर को शिकस्त दी थी। हालांकि, इससे पहले 1951 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी आत्माराम गोविंद खैर को निर्दलीय प्रत्याशी अयोध्या प्रसाद से चुनौती मिली थी, जबकि 1957 के चुनाव में खैर को निर्दलीय प्रत्याशी पन्नालाल शर्मा ने टक्कर दी थी। लेकिन, इन दोनों ही चुनाव में जीत कांग्रेस प्रत्याशी की ही हुई थी। इसके बाद झांसी सदर सीट पर 2009 में हुए उप चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी बृजेंद्र कुमार व्यास मुख्य मुकाबले में पहुंचे थे। लेकिन, उन्हें बसपा के कैलाश साहू से हार का सामना करना पड़ा था।
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बबीना विधानसभा सीट पर अब तक हुए विधानसभा के चुनावों में जीत तो दूर की बात, कोई निर्दलीय प्रत्याशी मुख्य मुकाबले में भी नहीं पहुंच पाया। कमोबेश यही स्थित मऊरानीपुर में भी रही। यहां भी अब तक चुनावों में पहले और दूसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी अपनी जगह नहीं बना पाया। गरौठा विधानसभा सीट पर भी कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी पहले और दूसरे नंबर की लड़ाई में नहीं आ सका।
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