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सर्किल रेट बढ़ा, रियल इस्टेट कारोबार घटा

Mon, 24 Oct 2016 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 24 Oct 2016 12:20 AM IST
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Increase circle rates, reduced real estate
circle rate news - फोटो : demo pic
केंद्र सरकार द्वारा जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर बनाए गए नये नियमों के अलावा सर्किल रेट बढ़ने से रियल इस्टेट का कारोबार घट रहा है। इस बार दीपावली पर आवासों की बुकिंग पिछले सालों के मुकाबले कम हो गई है। इसका एक कारण आयकर विभाग द्वारा जमीन की खरीद फरोख्त करने वालों पर नजर रखना भी है।
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शहर को महानगर बने करीब दस साल होने वाले हैं, लेकिन पिछले चार साल में फ्लैट बनवाकर बेचने का कारोबार तेजी से बढ़ा है। गांव में आपसी विवाद और बच्चों के भविष्य और उनकी बेहतर पढ़ाई कराने के लिए हर कोई शहर में बसने के लिए आवास खरीद रहा है। नक्शे पास कराने, बिजली, नल का कनेक्शन की झंझट और मकान बनवाने के लिए समय न दे पाने के कारण लोग बिल्डर्स द्वारा बनाकर बेचे जाने वाले मकानों को खरीदने को प्राथमिकता देते हैं। बिल्डर ने आवासाें की डिमांड को देखते हुए एक से बढ़कर एक कालोनी विकसित कर रहे हैं, जहां बीस लाख से लेकर एक करोड़ रुपये से अधिक के मकान उपलब्ध हैं। दीपावली पर बिल्डर बुकिंग कराने पर स्पेशल ऑफर देते हैं, ऐसे में इस दौरान आवासों की बुकिंग अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक होती है। लेकिन, इस बार रियल स्टेट का कारोबार पिछले सालों की अपेक्षा घटा है। इसका एक कारण सर्किल रेट का बढ़ना भी है।
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भगवंतपुरा में जमीन का रेट 250 रुपये वर्ग मीटर चल रहा है, जबकि वहां पर रजिस्ट्री कराने के लिए सर्किल रेट 600 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इतना डिफरेंस होने के कारण लोग जमीन खरीदने में हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि रजिस्ट्री शुल्क सर्किल रेट के हिसाब से ही देना होगा और इसी दर से खरीददार को अपनी एक नंबर की आय दिखानी होगी, नहीं तो आयकर विभाग के सवालों से जूझना होगा। यही नहीं, झांसी विकास प्राधिकरण दो हजार वर्ग मीटर में फ्लैट स्वीकृत कर रहा है, जिससे भी लोगोें को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। रियल स्टेट व्यापारी बृजबिहारी सोनी ने बताया कि शहर में ऐसी बहुत सी जगह हैं, जो आवासीय हैं, लेकिन कामर्शियल घोषित कर दी गई हैं। इस वजह से भी जमीनों और आवासों की खरीद-फरोख्त में परेशानी हो रही है।
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आयकर विभाग की नजर
अब कोई व्यक्ति यदि जमीन खरीदता है तो आयकर विभाग के कर्मचारी उस जमीन की खरीद -फरोख्त पर नजर रखते हैं। रजिस्ट्री करने में जो भी पैसा खर्च होता है, वह पूरा सामने रहता है। एकमुश्त पैसा खर्च करने पर आयकर के दायरे में व्यक्ति के आने की संभावना रहती है। इस कारण भी जमीन के कारोबार में मंदी आई है।


जमीन की कमी न होना भी वजह
शहर में जमीन की कोई कमी नहीं है, इससे आवास खरीदने वाले एकल आवास खरीदते हैं। यदि सौदा नहीं भी पटता है तो वह अलग से प्लाट खरीद लेते हैं, जबकि यदि वह बिल्डर से संपर्क करें तो बेहतर रेजीडेंसियल जगह उन्हें वाजिब दाम पर मिल सकती है।
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