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रेलवेः आवासों का साढ़े तीन करोड़ में होगा रखरखाव

Thu, 21 Oct 2021 02:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 02:00 AM IST
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In the name of painting in railway houses, employees are not satisfied
झांसी। दीपावली पर रेलवे आवासों में कराई जा रही पुताई में खानापूरी की जा रही है। मजदूर न तो दीवारों पर लगी काई को साफ कर रहे हैं और न ऑयल पेंट वाले स्थानों को पोता जा रहा है। रंग की गुणवत्ता से भी समझौता किया गया है। इससे दीवारें पुताई के बाद भी खिल नहीं रहीं हैं। रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने इस बार दो हजार से अधिक आवासों की पुताई व अन्य रखरखाव कार्यों के लिए साढ़े तीन करोड़ का ठेका दिया है।
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रेलवे के पूर्व व पश्चिमी क्षेत्र में कर्मचारियों के रहने के लिए 2000 से अधिक क्वार्टर बने हैं। रेल प्रशासन हर साल क्वार्टरों की मरम्मत व पुताई के लिए ठेका देता है। इसमें स्टेशन बिल्डिंग का भी मेंटेनेंस शामिल है। इस काम के लिए 3.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इंजीनियरिंग विभाग ने ठेकेदार को एलओए (लेटर ऑफ एक्सपिटेशन) जारी कर दिया है। पिछले एक हफ्ते से पुताई का काम शुरू हो गया है। हालांकि, हर साल सभी आवासों की पुताई संभव नहीं है। इस कारण हर साल एक चौथाई क्वार्टरों का ही रंग- रोगन किया जाता है। बुधवार को मजदूरों ने पश्चिमी रेलवे कॉलोनी में रहने वालीं विमला के आवास में पुताई की। उन्होंने बताया कि दीवार पर जो नीले रंग का डिस्टेंपर लगाया गया है, उससे दीवार बदरंग सी लगने लगी है। इससे अच्छा तो पुराना रंग था। कमरों की एक चौथाई दीवार पर ऑयल पेंट भी नहीं किया जा रहा है। मजदूर दीवारों पर लगी काई तक को साफ नहीं कर रहे हैं। वहीं, दूसरे कर्मचारियों का कहना है कि ठेकेदार को पुताई के लिए पर्याप्त मजदूर नहीं मिल रहे हैं, इस कारण क्वार्टरों में आधी- अधूरी ही पुताई हो पा रही है।
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जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि क्वार्टरों में नियमानुसार ही पुताई की जा रही है।
कालोनी में यह भी समस्याएं
- कॉलोनी में सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है।
- मच्छरों की भरमार हैं। सांप और अन्य कीड़े- मकोड़े निकलने का हर समय डर बना रहता है।
- रेलवे पटरियों के पास बने क्वार्टरों में चूहों ने जीना हराम कर रखा है।
- झाड़ियों की सफाई न होने से गाजर घास ने हर जगह पैर पसार लिए हैं।
- कॉलोनी की नालियां और नाले गंदगी से बजबजा रहे हैं।
- क्वार्टरों में लगी टंकियों तक सीधा पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं।
- 50 फीसदी क्वार्टरों के दरवाजे टूटे और खिड़कियों में मच्छर जाली नहीं।
- अधिकांश क्वार्टरों में बरसात के दिनों में पानी टपकता है।
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