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अवैध खनन रुका तो ठप हुए निर्माणाधीन प्रोजेक्ट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Apr 2017 12:51 AM IST
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अवैध खनन
- फोटो : demo
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प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ बंद हुए अवैध खनन के कारण निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के काम रुक गए हैं। जिले में कहीं भी बालू के खनन की लीज नहीं है। अब तक अवैध खनन करके इसे लाया जा रहा था। प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद बालू मिलना बंद हो गई है। ऐसे में नगर निगम के विकास कार्यों सहित ओवरब्रिज, सैनिक स्कूल और अस्पताल का काम बंद हो गया है। ठेकेदार परेशान हैं और मजदूर हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं।
बालू नहीं मिलने के कारण क्रशर की डस्ट की डिमांड बढ़ गई है, इस कारण डस्ट के भी दाम बढ़ गए। इसका नतीजा यह हुआ कि निर्माण कार्यों पर ब्रेक लग गया है। दिगारा में सैनिक स्कूल निर्माणाधीन है। इसके अलावा सीपरी बाजार ओवरब्रिज और मेडिकल कालेज में पांच सौ बेड के अस्पताल का काम तेजी से चल रहा था। यह कार्य जून से लेकर अगस्त तक पूरे होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अचानक बालू की सप्लाई बंद हो जाने के कारण कार्यों पर बुरा असर पड़ा है। मजदूरों को भी काम नहीं मिल पा रहा है। यही स्थिति नगर निगम की है। ठेकेदार बालू की कमी से परेशान हैं।
वह अब तक गिट्टी की डस्ट और सीमेंट मिलाकर लगा रहे थे, लेकिन अचानक डस्ट के दाम बढ़ जाने से उन्हें नुकसान होने लगा और उन्होंने काम बंद कर दिए हैं। इतना ही नहीं, नगर निगम के ठेकेदारों और अफसरों के बीच करीब छह माह से नूराकुश्ती चल रही है। पहले ठेकेदारों ने हड़ताल कर दी, इसके बाद जैसे-तैसे काम शुरू हुए तो नोटबंदी बाधा बन गई। नोटबंदी में काम ठप करने पड़े, किसी तरह उससे उबरे तो विधानसभा चुनाव आचार संहिता लग गई और फिर काम बंद हो गए। चुनाव के बाद टेंडर प्रक्रिया फिर से शुरू हुई। ठेकेदारों को वर्कआर्डर जारी किए गए, लेकिन प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद बालू का अवैध खनन बंद हो गया है। इससे बालू की आपूर्ति पर रोक लग गई और डस्ट के दाम अचानक बढ़ गए। इससे ठेकेदारों ने काम करने से हाथ खींच लिए हैं। काम बंद हो जाने से मजदूरों के ऊपर भी संकट आ गया है।
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इंसेट
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छह गुना रायल्टी का आदेश बना मुसीबत
अपर जिलाधिकारी विजय बहादुर सिंह ने नगर आयुक्त पत्र लिखकर अवगत कराया कि खनिज रायल्टी के संबंध में उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि निर्माण कार्यों में यदि बिना एमएम-11 के खनिजों का प्रयोग किया गया है तो रायल्टी की छह गुना धनराशि काटकर खनिज के लेखा शीर्षक में जमा कराई जाए। उन्होंने प्रमुख खनिजों पर रायल्टी और खनिज मूल्य 15 मार्च तक जमा कराने को कहा था, लेकिन अब तक इसमें कुछ नहीं हुआ है। ठेकेदारोें को दो दिन पूर्व इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि कुछ ठेकेदारों को आदेश के पहले पूरा भुगतान कर दिया गया, जबकि कुछ ठेकेदारों से खनिज मूल्य का छह गुना जमा कराया जा रहा है।
अब ठेकेदारी करना मुश्किल
निर्धारित मूल्य से छह गुना पैसा देने का मतलब है कि यदि सौ रुपये रायल्टी है तो उसका छह सौ रुपया जमा करना पड़ेगा। पुरानी डेट की एमएम-11 मिल पाना संभव नहीं है, इसलिए सभी ठेकेदारों को छह गुना पैसा जमा करना पड़ेगा। बहुत से ठेकेदारों ने कंपटीशन में कम रेट पर टेंडर ले लिए थे। नगर निगम में 2012-13 का शेड्यूल रेट चल रहा है। इस हिसाब से 411 रुपये क्यूबिक मीटर बालू का रेट है। लेकिन, बालू मिल नहीं रही है और डस्ट 1,100 रुपये क्यूबिक मीटर की दर से मिल रही है। यानी एक तो बिना एमएम-11 के निर्धारित दर का छह गुना का जुर्माना भरो, दूसरे डस्ट भी मंहगी खरीदो। इससे परेशान होकर ठेकेदारों ने न केवल शहर में चल रहे नाली, सीसी सड़क, शौचालय आदि के करीब चार सौ छोटे-बडे़ काम बंद कर दिए है, बल्कि वह ठेकेदारी से पल्ला झाड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
15 दिन से बंद है ओवरब्रिज का काम
सीपरी बाजार ओवरब्रिज का काम बालू नहीं होने के कारण पंद्रह दिन से बंद चल रहा है। सेतु निगम ने अपने हिस्से का काम लगभग पूरा कर लिया, जबकि रेलवे अपने हिस्से का काम कर रहा है। रेलवे को 36-36 मीटर और 50-50 मीटर की दूरी पर दो-दो पिलर बनाने हैं। इस हिसाब से चार पिलर बनने हैं, जिसमें से दो पिलर का निर्माण चल रहा था। बालू नहीं होने के कारण यह काम पंद्रह दिन से बंद पड़ा है। ऐसी स्थितियों में अब अगस्त तक काम पूरा हो सकेगा, उम्मीद नहीं है।
विकास कार्य ठप
पहले ठेकेदारों की हड़ताल, फिर नोटबंदी, इसके बाद चुनाव और अब बालू नहीं मिलने के कारण ठेकेदारों ने काम बिल्कुल बंद कर दिया है। उन्हें मनाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन उम्मीद कम है। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
- आरके वर्मा
मुख्य अभियंता
नगर निगम
ठेकेदारों से बातचीत
ठेकेदारी बंद करनी होगी
एक तो पहले से ही हम परेशान थे। रही-सही कसर बिना एमएम-11 के बालू की रायल्टी का छह गुना पैसा जमा कराने से कमर टूट गई है। नंदनपुरा नाला बनाने से पांच लाख रुपये का नुकसान होना तय है। लगता है कि अब ठेकेदारी बंद करनी पड़ेगी।
- राजकुमार गोस्वामी
ठेकेदार
पहले भुगतान करते तो नहीं होता नुकसान
नगर निगम में आदेश आने के बाद बहुत से कामों का भुगतान कर दिया गया, जबकि मेरा भुगतान अटक गया। यदि पहले भुगतान कर दिया होता तो नुकसान नहीं होता। अब शायद ही कोई ठेकेदार नगर निगम का काम करेगा।
- कमलेश साहू
ठेकेदार
कहां से लाएंगे इतना पैसा
ठेकेदारी का काम बड़ा कंपटीशन का है। पूरे काम का एक से दो प्रतिशत मिल जाए तो बड़ी बात होती है। लेकिन, छह गुना रायल्टी जमा कराई जा रही है। बालू मिल नहीं रही है। अब डस्ट भी महंगी हो गई। छह गुना पैसा कहां से लाएंगे। अब ठेकेदारी बंद करना ही बेहतर है।
- बच्चा सिंह
ठेकेदार
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बालू नहीं मिलने के कारण क्रशर की डस्ट की डिमांड बढ़ गई है, इस कारण डस्ट के भी दाम बढ़ गए। इसका नतीजा यह हुआ कि निर्माण कार्यों पर ब्रेक लग गया है। दिगारा में सैनिक स्कूल निर्माणाधीन है। इसके अलावा सीपरी बाजार ओवरब्रिज और मेडिकल कालेज में पांच सौ बेड के अस्पताल का काम तेजी से चल रहा था। यह कार्य जून से लेकर अगस्त तक पूरे होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अचानक बालू की सप्लाई बंद हो जाने के कारण कार्यों पर बुरा असर पड़ा है। मजदूरों को भी काम नहीं मिल पा रहा है। यही स्थिति नगर निगम की है। ठेकेदार बालू की कमी से परेशान हैं।
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वह अब तक गिट्टी की डस्ट और सीमेंट मिलाकर लगा रहे थे, लेकिन अचानक डस्ट के दाम बढ़ जाने से उन्हें नुकसान होने लगा और उन्होंने काम बंद कर दिए हैं। इतना ही नहीं, नगर निगम के ठेकेदारों और अफसरों के बीच करीब छह माह से नूराकुश्ती चल रही है। पहले ठेकेदारों ने हड़ताल कर दी, इसके बाद जैसे-तैसे काम शुरू हुए तो नोटबंदी बाधा बन गई। नोटबंदी में काम ठप करने पड़े, किसी तरह उससे उबरे तो विधानसभा चुनाव आचार संहिता लग गई और फिर काम बंद हो गए। चुनाव के बाद टेंडर प्रक्रिया फिर से शुरू हुई। ठेकेदारों को वर्कआर्डर जारी किए गए, लेकिन प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद बालू का अवैध खनन बंद हो गया है। इससे बालू की आपूर्ति पर रोक लग गई और डस्ट के दाम अचानक बढ़ गए। इससे ठेकेदारों ने काम करने से हाथ खींच लिए हैं। काम बंद हो जाने से मजदूरों के ऊपर भी संकट आ गया है।
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छह गुना रायल्टी का आदेश बना मुसीबत
अपर जिलाधिकारी विजय बहादुर सिंह ने नगर आयुक्त पत्र लिखकर अवगत कराया कि खनिज रायल्टी के संबंध में उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि निर्माण कार्यों में यदि बिना एमएम-11 के खनिजों का प्रयोग किया गया है तो रायल्टी की छह गुना धनराशि काटकर खनिज के लेखा शीर्षक में जमा कराई जाए। उन्होंने प्रमुख खनिजों पर रायल्टी और खनिज मूल्य 15 मार्च तक जमा कराने को कहा था, लेकिन अब तक इसमें कुछ नहीं हुआ है। ठेकेदारोें को दो दिन पूर्व इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि कुछ ठेकेदारों को आदेश के पहले पूरा भुगतान कर दिया गया, जबकि कुछ ठेकेदारों से खनिज मूल्य का छह गुना जमा कराया जा रहा है।
अब ठेकेदारी करना मुश्किल
निर्धारित मूल्य से छह गुना पैसा देने का मतलब है कि यदि सौ रुपये रायल्टी है तो उसका छह सौ रुपया जमा करना पड़ेगा। पुरानी डेट की एमएम-11 मिल पाना संभव नहीं है, इसलिए सभी ठेकेदारों को छह गुना पैसा जमा करना पड़ेगा। बहुत से ठेकेदारों ने कंपटीशन में कम रेट पर टेंडर ले लिए थे। नगर निगम में 2012-13 का शेड्यूल रेट चल रहा है। इस हिसाब से 411 रुपये क्यूबिक मीटर बालू का रेट है। लेकिन, बालू मिल नहीं रही है और डस्ट 1,100 रुपये क्यूबिक मीटर की दर से मिल रही है। यानी एक तो बिना एमएम-11 के निर्धारित दर का छह गुना का जुर्माना भरो, दूसरे डस्ट भी मंहगी खरीदो। इससे परेशान होकर ठेकेदारों ने न केवल शहर में चल रहे नाली, सीसी सड़क, शौचालय आदि के करीब चार सौ छोटे-बडे़ काम बंद कर दिए है, बल्कि वह ठेकेदारी से पल्ला झाड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
15 दिन से बंद है ओवरब्रिज का काम
सीपरी बाजार ओवरब्रिज का काम बालू नहीं होने के कारण पंद्रह दिन से बंद चल रहा है। सेतु निगम ने अपने हिस्से का काम लगभग पूरा कर लिया, जबकि रेलवे अपने हिस्से का काम कर रहा है। रेलवे को 36-36 मीटर और 50-50 मीटर की दूरी पर दो-दो पिलर बनाने हैं। इस हिसाब से चार पिलर बनने हैं, जिसमें से दो पिलर का निर्माण चल रहा था। बालू नहीं होने के कारण यह काम पंद्रह दिन से बंद पड़ा है। ऐसी स्थितियों में अब अगस्त तक काम पूरा हो सकेगा, उम्मीद नहीं है।
विकास कार्य ठप
पहले ठेकेदारों की हड़ताल, फिर नोटबंदी, इसके बाद चुनाव और अब बालू नहीं मिलने के कारण ठेकेदारों ने काम बिल्कुल बंद कर दिया है। उन्हें मनाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन उम्मीद कम है। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
- आरके वर्मा
मुख्य अभियंता
नगर निगम
ठेकेदारों से बातचीत
ठेकेदारी बंद करनी होगी
एक तो पहले से ही हम परेशान थे। रही-सही कसर बिना एमएम-11 के बालू की रायल्टी का छह गुना पैसा जमा कराने से कमर टूट गई है। नंदनपुरा नाला बनाने से पांच लाख रुपये का नुकसान होना तय है। लगता है कि अब ठेकेदारी बंद करनी पड़ेगी।
- राजकुमार गोस्वामी
ठेकेदार
पहले भुगतान करते तो नहीं होता नुकसान
नगर निगम में आदेश आने के बाद बहुत से कामों का भुगतान कर दिया गया, जबकि मेरा भुगतान अटक गया। यदि पहले भुगतान कर दिया होता तो नुकसान नहीं होता। अब शायद ही कोई ठेकेदार नगर निगम का काम करेगा।
- कमलेश साहू
ठेकेदार
कहां से लाएंगे इतना पैसा
ठेकेदारी का काम बड़ा कंपटीशन का है। पूरे काम का एक से दो प्रतिशत मिल जाए तो बड़ी बात होती है। लेकिन, छह गुना रायल्टी जमा कराई जा रही है। बालू मिल नहीं रही है। अब डस्ट भी महंगी हो गई। छह गुना पैसा कहां से लाएंगे। अब ठेकेदारी बंद करना ही बेहतर है।
- बच्चा सिंह
ठेकेदार