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पांच साल की नौकरी में नहीं सीखा तो अब छुट्टी लेकर टाइप सीख रहे बाबू
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झांसी। सिंचाई विभाग में आला अफसरों की लापरवाही से मृतक आश्रित सेवा नियमावली की जमकर अनदेखी हुई। महकमे में बीस लिपिक ऐसे सामने आए हैं जिनको अनुकंपा के आधार पर कनिष्ठ लिपिक तो बना दिया गया लेकिन तैनाती के पांच साल बाद भी ये टाइपिंग नहीं सीख सके। अधिकांश लिपिक अपना नाम तक टाइप नहीं कर पाते। ऐसी दशा में इन कर्मचारियों को दो साल बाद भी हटाने का नियम है लेकिन, अफसरों ने इनकी परीक्षा ही नहीं कराई। मामला खुलने के बाद अब अफसर भी सवालों के घेरे में आ गए। उधर, नौकरी पर तलवार लटकने पर कई कर्मचारियों ने छुट्टी लेकर टाइपिंग सीखनी शुरू कर दी।
सिंचाई विभाग के चतुर्थ मंडल में मृतक आश्रित नियमावली के तहत बीस कर्मचारियों को मृतक आश्रित कोटे से भर्ती किया गया लेकिन इनको टाइपिंग नहीं आती थी। नियमावली के मुताबिक टाइप टेस्ट में सफल न होने वाले कर्मचारियों को सेवा से बाहर करने का प्रावधान है लेकिन इतनी अहम परीक्षा भी पिछले दस साल से नहीं कराई। उधर, इन कर्मचारियों ने भी टाइपिंग सीखने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। शासन में शिकायत होने पर यह मामला उजागर हुआ। अनियमिता के आरोप में अफसरों का गला भी फंस गया है। आनन-फानन में 8 जून को टेस्ट तारीख तय कर दी गई लेकिन, आखिर इतने वर्षों तक यह अहम परीक्षा क्यूं नहीं हुई इसका जवाब अफसरों के पास नहीं है। कई कर्मचारी दो साल की परीविक्षा अवधि पूरी कर चुके। इनके उत्तीर्ण न होने पर इनके खिलाफ कार्रवाई किस तरह होगी, यह भी अफसरों को नहीं सूझ रहा है। अधीक्षण अभियंता संजीव झा के मुताबिक मामले की जांच के लिए एक कमेटी बना दी गई है।
इन बीस कर्मचारियों पर लटकी तलवार
मृतक आश्रित कोटे से भर्ती बीस कर्मचारियों पर तलवार लटकी हुई है। इनमें देवेंद्र सिंह निरंजन, विशाल वैभव, रवि प्रताप सिंह, सौरभ तिवारी, रोहित कुमार रायकवार, नेहा नामदेव (झांसी प्रखंड बेतवा नहर) दीपक भोटिया, मनीष सेन, प्रवीण कुमार सोनी, कामता प्रसाद पाल, राहुल रैकवार (सपरार प्रखंड), प्रियंका परिहार, योगेंद्र पाठक, सविता (माताटीला बांध प्रखंड), विकास (सिंचाई निर्माण खंड प्रथम), उपेंद्र, रीतू सिंह, प्रमोद कुमार कुशवाहा (बेतवा नहर प्रखंड प्रथम), प्रियेश कुमार पटेल, अभिषेक कुलश्रेष्ठ (बेतवा नहर प्रखंड द्वितीय) शामिल हैं। इनमें से दस कर्मचारी पिछले तीन से पांच साल से अधिक समय से नौकरी कर रहे हैं। कुछ कर्मचारी पहले टेस्ट में फेल भी हो चुके।
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सिंचाई विभाग के चतुर्थ मंडल में मृतक आश्रित नियमावली के तहत बीस कर्मचारियों को मृतक आश्रित कोटे से भर्ती किया गया लेकिन इनको टाइपिंग नहीं आती थी। नियमावली के मुताबिक टाइप टेस्ट में सफल न होने वाले कर्मचारियों को सेवा से बाहर करने का प्रावधान है लेकिन इतनी अहम परीक्षा भी पिछले दस साल से नहीं कराई। उधर, इन कर्मचारियों ने भी टाइपिंग सीखने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। शासन में शिकायत होने पर यह मामला उजागर हुआ। अनियमिता के आरोप में अफसरों का गला भी फंस गया है। आनन-फानन में 8 जून को टेस्ट तारीख तय कर दी गई लेकिन, आखिर इतने वर्षों तक यह अहम परीक्षा क्यूं नहीं हुई इसका जवाब अफसरों के पास नहीं है। कई कर्मचारी दो साल की परीविक्षा अवधि पूरी कर चुके। इनके उत्तीर्ण न होने पर इनके खिलाफ कार्रवाई किस तरह होगी, यह भी अफसरों को नहीं सूझ रहा है। अधीक्षण अभियंता संजीव झा के मुताबिक मामले की जांच के लिए एक कमेटी बना दी गई है।
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इन बीस कर्मचारियों पर लटकी तलवार
मृतक आश्रित कोटे से भर्ती बीस कर्मचारियों पर तलवार लटकी हुई है। इनमें देवेंद्र सिंह निरंजन, विशाल वैभव, रवि प्रताप सिंह, सौरभ तिवारी, रोहित कुमार रायकवार, नेहा नामदेव (झांसी प्रखंड बेतवा नहर) दीपक भोटिया, मनीष सेन, प्रवीण कुमार सोनी, कामता प्रसाद पाल, राहुल रैकवार (सपरार प्रखंड), प्रियंका परिहार, योगेंद्र पाठक, सविता (माताटीला बांध प्रखंड), विकास (सिंचाई निर्माण खंड प्रथम), उपेंद्र, रीतू सिंह, प्रमोद कुमार कुशवाहा (बेतवा नहर प्रखंड प्रथम), प्रियेश कुमार पटेल, अभिषेक कुलश्रेष्ठ (बेतवा नहर प्रखंड द्वितीय) शामिल हैं। इनमें से दस कर्मचारी पिछले तीन से पांच साल से अधिक समय से नौकरी कर रहे हैं। कुछ कर्मचारी पहले टेस्ट में फेल भी हो चुके।
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