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किसी के खाने-पीने का सामान खत्म तो कोई पांच हजार छात्रों के बीच बॉर्डर पर खड़ा
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झांसी। यूक्रेन में फंसे झांसी के चार और छात्रों की जानकारी सामने आई है। इसमें एक छात्र युद्ध प्रभावित इलाके में है। लगातार मिसाइल, गोले के धमाकों के चलते वह सो नहीं पा रहा है। इसके अलावा हॉस्टल में कैद एक छात्र के खाने-पीने का सामान खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है। तीसरा छात्र पांच हजार विद्यार्थियों के बीच रोमानिया बॉर्डर पर दो दिन से खड़ा हुआ है।
रूस के हमले के बाद यूक्रेन में भगदड़ के हालात हैं। यूक्रेन में बड़ी संख्या में भारत समेत विश्व के हजारों छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए आते हैं। मौजूदा समय में वहां पर झांसी के चार छात्र हैं। इसमें नझाई बाजार निवासी ऋतिक पटेल उजहोरोड नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, मनु सोनी बुकोविनियन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, बृजेंद्र राजपूत डिनिप्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी और अखिल सिंह विनितसिया नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। बृजेंद्र के भाई अरविंद ने बताया कि जहां उसका भाई है, वहां के हालाता बहुत डरावने है। सभी परिजन भाई को लेकर बेहद चिंतित हैं। बृजेंद्र अपने हॉस्टल से बाहर निकल ही नहीं पा रहा है। डर लगा रहता है कि कहीं कोई मिसाइल आकर न गिर जाए। एक हफ्ते के खाने का सामान था, जो अब खत्म होने वाला है। धमाकों की आवाज लगातार सुनाई देती रहती है। वह सो नहीं पा रहा है। यूनिवर्सिटी के अधिकारी बोल रहे थे कि युद्ध नहीं होगा। इस वजह से पहले नहीं निकल पाया। मगर अब फंसकर रह गया है। अखिल के पिता डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि शुक्रवार की रात को उनका बेटा रोमानिया बॉर्डर के लिए हॉस्टल से निकला था। शनिवार से लेकर रविवार रात तक वो बॉर्डर पर ही खड़ा हुआ है। उसके साथ में अलग-अलग देशों के पांच से छह हजार विद्यार्थी हैं। रोमानिया ने बॉर्डर खोला नहीं है। वहां पर खाने-पीने के लिए बिस्किट और चिप्स दिए जा रहे हैं। पता नहीं कैसे और कब तक बेटा लौट पाएगा। ऋतिक के पिता मुकुंद तिवारी ने बताया कि उनका बेटा युद्ध प्रभावित क्षेत्र से बाहर है। मंगलवार तक वो पोलैंड पहुंच सकता है। जबकि, बरुआसागर के शिक्षिका के बेटे मनु से परिजन लगातार संपर्क में हैं। मां रामजानकी सोनी ने बताया कि एंबेसी के अधिकारियों द्वारा भारतीय छात्रों की मदद की जा रही है। अभी उनका बेटा सुरक्षित स्थान पर है। रविवार को ही उसे रोमानिया भेजने की बात कही गई है। वहां से उसे विमान द्वारा भारत वापस लाया जाएगा।
पांच दोस्तों के साथ हंगरी पहुंचा झांसी का अक्षेंद्र, नहीं लगा टिकट का पैसा
आशिक चौराहा निवासी अक्षेंद्र बादल अपने पांच दोस्तों के साथ रविवार की दोपहर हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गया है। अब एक-दो दिन में उसके भारत लौटने की संभावना जताई जा रही है।
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पिता डॉ. धर्मेंद्र बादल ने बताया कि शनिवार की रात को अक्षेंद्र अपने दोस्तों के साथ हंगरी की तरफ जाने वाले रास्ते में पड़ने वाले यूक्रेन के अंतिम रेलवे स्टेशन चॉक पहुंच गया था। वहां चार घंटे लाइन में खड़े-खड़े इंतजार करने के बाद उसे हंगरी के जोहनी बॉर्डर पहुंचने के लिए ट्रेन का टिकट मिला। हालांकि, जैसे ही उसने बताया कि भारत से हैं तो उसका और दोस्तों का टिकट का कोई पैसा नहीं लगा। दो घंटे बाद ट्रेन आई। रविवार को सभी बॉर्डर पहुंच सका। यहां से दोपहर दो बजे तक बुडापेस्ट आए। उन्हें एंबेसी के अधिकारियों ने हॉस्टल में ठहराया है। वहां खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 90 दिन का वीजा भी दिया गया है। उसके दो साथी मुंबई और तीन राजस्थान के रहने वाले हैं।
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रूस के हमले के बाद यूक्रेन में भगदड़ के हालात हैं। यूक्रेन में बड़ी संख्या में भारत समेत विश्व के हजारों छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए आते हैं। मौजूदा समय में वहां पर झांसी के चार छात्र हैं। इसमें नझाई बाजार निवासी ऋतिक पटेल उजहोरोड नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, मनु सोनी बुकोविनियन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, बृजेंद्र राजपूत डिनिप्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी और अखिल सिंह विनितसिया नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। बृजेंद्र के भाई अरविंद ने बताया कि जहां उसका भाई है, वहां के हालाता बहुत डरावने है। सभी परिजन भाई को लेकर बेहद चिंतित हैं। बृजेंद्र अपने हॉस्टल से बाहर निकल ही नहीं पा रहा है। डर लगा रहता है कि कहीं कोई मिसाइल आकर न गिर जाए। एक हफ्ते के खाने का सामान था, जो अब खत्म होने वाला है। धमाकों की आवाज लगातार सुनाई देती रहती है। वह सो नहीं पा रहा है। यूनिवर्सिटी के अधिकारी बोल रहे थे कि युद्ध नहीं होगा। इस वजह से पहले नहीं निकल पाया। मगर अब फंसकर रह गया है। अखिल के पिता डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि शुक्रवार की रात को उनका बेटा रोमानिया बॉर्डर के लिए हॉस्टल से निकला था। शनिवार से लेकर रविवार रात तक वो बॉर्डर पर ही खड़ा हुआ है। उसके साथ में अलग-अलग देशों के पांच से छह हजार विद्यार्थी हैं। रोमानिया ने बॉर्डर खोला नहीं है। वहां पर खाने-पीने के लिए बिस्किट और चिप्स दिए जा रहे हैं। पता नहीं कैसे और कब तक बेटा लौट पाएगा। ऋतिक के पिता मुकुंद तिवारी ने बताया कि उनका बेटा युद्ध प्रभावित क्षेत्र से बाहर है। मंगलवार तक वो पोलैंड पहुंच सकता है। जबकि, बरुआसागर के शिक्षिका के बेटे मनु से परिजन लगातार संपर्क में हैं। मां रामजानकी सोनी ने बताया कि एंबेसी के अधिकारियों द्वारा भारतीय छात्रों की मदद की जा रही है। अभी उनका बेटा सुरक्षित स्थान पर है। रविवार को ही उसे रोमानिया भेजने की बात कही गई है। वहां से उसे विमान द्वारा भारत वापस लाया जाएगा।
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पांच दोस्तों के साथ हंगरी पहुंचा झांसी का अक्षेंद्र, नहीं लगा टिकट का पैसा
आशिक चौराहा निवासी अक्षेंद्र बादल अपने पांच दोस्तों के साथ रविवार की दोपहर हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गया है। अब एक-दो दिन में उसके भारत लौटने की संभावना जताई जा रही है।
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पिता डॉ. धर्मेंद्र बादल ने बताया कि शनिवार की रात को अक्षेंद्र अपने दोस्तों के साथ हंगरी की तरफ जाने वाले रास्ते में पड़ने वाले यूक्रेन के अंतिम रेलवे स्टेशन चॉक पहुंच गया था। वहां चार घंटे लाइन में खड़े-खड़े इंतजार करने के बाद उसे हंगरी के जोहनी बॉर्डर पहुंचने के लिए ट्रेन का टिकट मिला। हालांकि, जैसे ही उसने बताया कि भारत से हैं तो उसका और दोस्तों का टिकट का कोई पैसा नहीं लगा। दो घंटे बाद ट्रेन आई। रविवार को सभी बॉर्डर पहुंच सका। यहां से दोपहर दो बजे तक बुडापेस्ट आए। उन्हें एंबेसी के अधिकारियों ने हॉस्टल में ठहराया है। वहां खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 90 दिन का वीजा भी दिया गया है। उसके दो साथी मुंबई और तीन राजस्थान के रहने वाले हैं।