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अधूरा इलाज छोड़ा तो फिर से उबर आया ब्लैक फंगस
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झांसी। ब्लैक फंगस का ऑपरेशन कराने वाले कई मरीजों में फिर से ये बीमारी उबर आई है। हालांकि, ये पहले की तरह बढ़ नहीं रही है, बल्कि स्थिर बनी है। डॉक्टरों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद एंटीफंगल नेजल वॉश न कराने पर ये दिक्कत हुई है।
कोरोना की दूसरी लहर में ब्लैक फंगस बड़ी आफत के रूप में उभरकर सामने आया। कई कोविड संक्रमितों को ब्लैक फंगस हो जाने से उनकी जान चली गई। कइयों की आंख और जबड़ा तक निकालना पड़ा। अधिकांश रोगियों का ऑपरेशन कर फंगस हटाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके ऑपरेशन के बाद दवाएं चलती हैं। साथ ही एंटीफंगल नेजल वॉश भी किया जाता है। ये उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना ऑपरेशन कराना। मगर लोगों ने ऑपरेशन के बाद दवा खाने से लेकर नेजल वॉश कराने में लापरवाही बरती। इस वजह से कई मरीजों को फिर से ब्लैक फंगस हो गई है। हालांकि, ये फंगस बढ़ नहीं रही है। बल्कि, उसी स्थान पर स्थिर बनी है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के डेल्टा वेरिएंट की चपेट में आने वालों की इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो गई थी। इसलिए ब्लैक फंगस हो गई। कोविड से रिकवरी होने के बाद प्रतिरोधक क्षमता बढ़नी शुरू हुई। अब जिन्हें फिर से ब्लैक फंगस हुई है, उनकी इम्यूनिटी मजबूत होने से ही ये बढ़ नहीं पा रही है।
62 में से चार मरीजों की निकली थी आंख
दूसरी लहर के दौरान झांसी में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को मिलाकर ब्लैक फंगस के 62 मरीज मिले थे। खास बात ये थी कि इनमें से 60 को कोरोना का टीका नहीं लगा था। चार रोगियों की तो आंख तक निकालनी पड़ गई थी। जबकि, दो मरीजों का जबड़ा हटाना पड़ गया।
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ये हैं मामले
केस-1
शहर के व्यापारी ने अपनी मां का दिल्ली में ब्लैक फंगस का ऑपरेशन कराया था। उनकी आंख की रोशनी भी चली गई थी। मगर नेजल वॉश नहीं कराया तो फिर ब्लैक फंगस हो गई। उनका इलाज चल रहा है।
केस-2
ललितपुर निवासी 52 साल के व्यक्ति ने ब्लैक फंगस होने पर ग्वालियर में ऑपरेशन कराया था। कुछ समय पहले उसे फिर से ब्लैक फंगस हो गई। नेजल वॉश कराने पर अब काफी आराम मिल गया है।
मेरे पास नौ-दस मरीज आ चुके हैं, जिन्हें फिर से ब्लैक फंगस हो गई। इस बीमारी में एंटीफंगल नेजल वॉश कराना भी उतना ही जरूरी है, जितना ऑपरेशन। अब मरीजों को कुछ न कुछ दिक्कत हो रही है। उनका नेजल वॉश किया जा रहा है। - डॉ. जेपी पुरोहित, वरिष्ठ ईएनटी सर्जन।
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कोरोना की दूसरी लहर में ब्लैक फंगस बड़ी आफत के रूप में उभरकर सामने आया। कई कोविड संक्रमितों को ब्लैक फंगस हो जाने से उनकी जान चली गई। कइयों की आंख और जबड़ा तक निकालना पड़ा। अधिकांश रोगियों का ऑपरेशन कर फंगस हटाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके ऑपरेशन के बाद दवाएं चलती हैं। साथ ही एंटीफंगल नेजल वॉश भी किया जाता है। ये उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना ऑपरेशन कराना। मगर लोगों ने ऑपरेशन के बाद दवा खाने से लेकर नेजल वॉश कराने में लापरवाही बरती। इस वजह से कई मरीजों को फिर से ब्लैक फंगस हो गई है। हालांकि, ये फंगस बढ़ नहीं रही है। बल्कि, उसी स्थान पर स्थिर बनी है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के डेल्टा वेरिएंट की चपेट में आने वालों की इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो गई थी। इसलिए ब्लैक फंगस हो गई। कोविड से रिकवरी होने के बाद प्रतिरोधक क्षमता बढ़नी शुरू हुई। अब जिन्हें फिर से ब्लैक फंगस हुई है, उनकी इम्यूनिटी मजबूत होने से ही ये बढ़ नहीं पा रही है।
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62 में से चार मरीजों की निकली थी आंख
दूसरी लहर के दौरान झांसी में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को मिलाकर ब्लैक फंगस के 62 मरीज मिले थे। खास बात ये थी कि इनमें से 60 को कोरोना का टीका नहीं लगा था। चार रोगियों की तो आंख तक निकालनी पड़ गई थी। जबकि, दो मरीजों का जबड़ा हटाना पड़ गया।
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ये हैं मामले
केस-1
शहर के व्यापारी ने अपनी मां का दिल्ली में ब्लैक फंगस का ऑपरेशन कराया था। उनकी आंख की रोशनी भी चली गई थी। मगर नेजल वॉश नहीं कराया तो फिर ब्लैक फंगस हो गई। उनका इलाज चल रहा है।
केस-2
ललितपुर निवासी 52 साल के व्यक्ति ने ब्लैक फंगस होने पर ग्वालियर में ऑपरेशन कराया था। कुछ समय पहले उसे फिर से ब्लैक फंगस हो गई। नेजल वॉश कराने पर अब काफी आराम मिल गया है।
मेरे पास नौ-दस मरीज आ चुके हैं, जिन्हें फिर से ब्लैक फंगस हो गई। इस बीमारी में एंटीफंगल नेजल वॉश कराना भी उतना ही जरूरी है, जितना ऑपरेशन। अब मरीजों को कुछ न कुछ दिक्कत हो रही है। उनका नेजल वॉश किया जा रहा है। - डॉ. जेपी पुरोहित, वरिष्ठ ईएनटी सर्जन।