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बीमा मिले तो नर्सिंग होम भी कोरोना इलाज को तैयार

Fri, 17 Jul 2020 12:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2020 12:57 AM IST
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IF insurance find after that nursing also ready to treatment
अस्पताल - फोटो : ???????
झांसी। कोरोना वायरस के इस दौर में ज्यादातर नर्सिंगहोमों ने खुद को सीमित कर लिया है। हाल ही में मंडलायुक्त ने नर्सिंगहोम संचालकों, आईएमए सदस्यों के साथ बैठक कर कोरोना की लड़ाई में आगे आने के लिए कहा है। वहीं, नर्सिंगहोम एसोसिएशन और आईएमए पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार सरकारी अस्पतालों की तरह निजी अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों का बीमा कराए, साथ ही किसी के भी पॉजिटिव होने पर भर्ती होने के लिए अलग से व्यवस्था की जाए तो वह इस लड़ाई में पूरी तरह कूदने को तैयार हैं।
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कोरोना महामारी में कोविड के अलावा दूसरी बीमारियों के मरीजों को भी उपचार कराने में काफी समस्या हो रही है। कई निजी अस्पताल मरीजों का उपचार करने के बजाए सरकारी अस्पताल रेफर कर रहे हैं। वहीं, झांसी में बेकाबू हो चुके कोरोना वायरस के चलते मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल के डॉक्टर, कर्मचारी पूरी तरह कोविड मरीजों को ठीक करने में जुटे हैं। ऐसे में वहां पर कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियों के मरीजों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा पा रहा है। बीते मंगलवार को कमिश्नरी में बैठक कर मंडलायुक्त सुभाशचंद्र शर्मा ने आईएमए, नर्सिंगहोम एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर सभी मरीजों का उपचार करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, जरूरत पड़ने पर निजी अस्पतालों का 50 फीसदी स्टाफ लेने की भी बात कही थी। अब नर्सिंगहोम एसोसिएशन और आईएमए के पदाधिकारियों के बीच चर्चा के दौरान कुछ सहमति बनी है। इसमें सरकारी अस्पतालों की तरह निजी अस्पताल के डॉक्टरों, स्टाफ का भी बीमा कराना, किसी भी नर्सिंगहोम के स्टाफ के संक्रमित होने पर उसी के नर्सिंगहोम में भर्ती होने की अनुमति देना शामिल है।
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ये बोले पदाधिकारी
़कई नर्सिंगहोम मरीजों का उपचार कर रहे हैं। हमारी कुछ मांगें हैं, जो पूरी होनी चाहिए। पहली कि सरकारी की तरह निजी अस्पतालों के स्टाफ का भी बीमा होना चाहिए। इसके अलावा कोई भी डॉक्टर, कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव मिलता है तो उसे उसी के नर्सिंगहोम में क्वारंटीन रहने की छूट दी जाए। - निलय जैन, सचिव, झांसी नर्सिंगहोम एसोसिएषन।
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निजी अस्पताल के डॉक्टर जुकाम, बुखार को छोड़कर सभी मरीजों को देख रहे हैं। इन बीमारियों के मरीजों को न देखने का शासन की तरफ से ही आदेश है। यदि प्रशासन नर्सिंगहोमों के स्टाफ का सरकारी अस्पताल में इस्तेमाल करना चाहता है तो उनका बीमा कराए। संक्त्रस्मित होने पर अलग से भर्ती होने की जगह उपलब्ध कराए। - डॉ प्रिंस अग्रवाल, आईएमए सचिव।
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