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‘आई-पास’ से सभी रेल कर्मियों का रिकार्ड एक जगह

Wed, 09 Nov 2016 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 09 Nov 2016 01:00 AM IST
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 'I-have "rather than a record of all railwaymen
railway news jhansi - फोटो : demo
रेलवे ने अपने सभी कर्मचारियों को ‘आई- पास’ (इंट्रीग्रेटिड पेरोल एंड एकाउंटिंग सिस्टम) सिस्टम से जोड़ लिया है। इससे अब अगर किसी कर्मचारी का स्थानांतरण एक जोन से दूसरे जोन में होता है तो उसकी नौकरी से जुड़े अभिलेखों को मैन्युअल नहीं भेजना पड़ेगा। कर्मचारी के पहुंचने पर उसका पूरा रिकार्ड ‘आई-पास’ सिस्टम में दिखाई दे जाएगा। इससे धोखाधड़ी की संभावना खत्म हो गई।
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अभी तक उत्तर मध्य रेलवे के झांसी स्टेशन के किसी कर्मचारी का ट्रांसफर यदि मध्य रेलवे के मुंबई में होता था तो उसे ट्रांसफर आर्डर देकर रवाना कर दिया जाता था। कर्मचारी मुंबई पहुंचकर कार्मिक कार्यालय में ट्रांसफर आर्डर जमा करता और उसकी नौकरी वहां शुरू हो जाती थी। कर्मचारी के ज्वाइनिंग से लेकर अन्य सभी रिकार्ड महीनों बाद संबंधित जोन कार्यालय पहुंचते थे। पिछले कुछ साल में धोखाधड़ी के कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें जालसाजों ने फर्जी ट्रांसफर आर्डर लेकर नौकरी ज्वाइन कर ली। कर्मचारी का जब सालों बाद भी कोई रिकार्ड नहीं आया, तब जांच में धोखाधड़ी पकड़ी गईं। तब तक धोखाधड़ी करने वाला रेलवे से लाखों रुपये का वेतन ले चुका होता था। अलग-अलग जोनों में ऐसे करीब एक दर्जन मामले सामने आए। 
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धोखाधड़ी के ऐसे मामलों से मुक्ति पाने के लिए रेलवे ने अपने सभी जोनों के 10 हजार अधिकारी व 14 लाख कर्मचारियों को ‘आई-पास’ सिस्टम से जोड़ दिया है। इस सिस्टम की मदद से देश के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी का पल भर में पूरा सर्विस रिकार्ड कंप्यूटर पर आ जाता है। झांसी मंडल के सभी 22 हजार कर्मचारी इस सिस्टम से जुड़ गए हैं। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मंडल के सभी कर्मचारी ई- पास सिस्टम से जुड़ गए है। 
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पेमेंट सिस्टम में भी आई एकरूपता 
रेलवे ने ‘आई- पास’ सिस्टम के जरिये सभी भुगतान शुरू कर दिए हैं। इसमें कर्मचारी का पेमेंट हो या ठेकेदारों का भुगतान देश के किसी भी कोने में बैठकर सिस्टम पर देखा जा सकता है। इस सिस्टम की मदद से रेलवे में अब एक रुपये की भी हेराफेरी नहीं हो सकती है। वेतन हो या बोनस हर जोन में एक ही नियम लागू होगा। अक्तूबर माह से रेलवे ने सेटेलमेंट (सेवानिवृत्ति के बाद का ब्यौरा) भी ‘ई- पास’ सिस्टम से जोड़ दिया है। सिस्टम से जुड़ने से अब सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन पेमेंट आर्डर व अन्य भुगतान ‘ई- पास’ के जरिये ही होने लगे हैं। 
   
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