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औद्योगिक क्षेत्रों का एक तिहाई हिस्से में हरियाली जरूरी
amarujala
Updated Mon, 21 May 2018 01:18 AM IST
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tree, jhansi news
- फोटो : demo
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हवा में बढ़ती धूल कणों की संख्या को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने औद्योगिक क्षेत्रों को हराभरा बनाने का निर्णय लिया है। वन विभाग के सहयोग से प्रदूषण नियंत्रण विभाग जिले की औद्योगिक इकाइयों में ग्रीन बेल्ट विकसित करेगा। बोर्ड के अफसर समय-समय पर इसकी जांच करेंगे। नई एनओसी जारी करते समय भी इसे शर्त में शामिल किया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का मानना है कि कि प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों, वाहनों के उत्सर्जन और भवन निर्माण परियोजनाओं के कारण धूल के कण पीएम 10 की मात्रा ज्यादा है। औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन की प्रक्रिया से कार्बन और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। उसे केवल पौधरोपण से कम कर पाना संभव है। इसलिए नई गाइड लाइन जारी की है। गाइड लाइन के अनुसार ग्रीन बेल्ट की देखरेख, सुरक्षा, अनुरक्षण और अतिक्रमण से मुक्त रखने की जिम्मेदारी उसी उद्योग इकाई की होगी। ग्रीन बेल्ट बनने के बाद उद्योग जमीन का विस्तार करता है तो वह ग्रीन बेल्ट की जमीन का अधिग्रहण करने से पहले दूसरा स्थान सुझाने के साथ ही उस स्थान को हरा भरा बना होगा। इस नई गाइडलाइन के बाद प्रदूषण विभाग ने वन विभाग से उद्योगों के आसपास ग्रीन बेल्ट तैयार कराने में सहयोग मांगा है।
इतने दायरे में बनेगी ग्रीन बेल्ट
उद्योग वर्ग उद्योग श्रेणी न्यूनतम ग्रीन बेल्ट
--------- --------- --------------
लाल वृह्द 200 मीटर
मध्यम 100 मीटर
लघु 30 मीटर
नारंगी वृह्द 100 मीटर
मध्यम 20 मीटर
लघु 20 मीटर
हरा वृह्द 10 मीटर
मध्यम 10 मीटर
लघु 10 मीटर
---------------------------------------
परियोजनाओं के लिए
-----------------
औद्योगिक क्षेत्र 500 मीटर
लैंडफिल साइट 200 मीटर
टीएसडीएफ 200 मीटर
पौधरोपने का तरीका
--------------------
- बाउंड्रीवॉल के चारों ओर 8-10 मीटर ऊंचे पौधे लगाए जाएंगे।
- पंक्तिबद्घ पौधरोपण के बाद छोटी झाड़ियों वाले पौधे लगाए जाएंगे।
- खुले क्षेत्रों में जहां पौधे लगाना संभव नहीं वहां घास लगाना जरूरी है।
- बड़ी और चौड़ी पत्तियों वाले पौधों को प्राथमिकता से रोपना होगा।
ये पौधे लगेंगे
पौधों को रोपने की प्रजाति रोपने के लिए बोर्ड ने गाइड लाइन जारी की है। उसमें बबूल, कंजी, अर्जुन, ढाक, शीशम, आंवला, जंगल जलेबी, बेर, अकेसिया, नीम, बांस, कंजी, जामुन, आम, महुआ, बेल, पीपल, बरगद, इमली, कैथा, रीठा, सगौन आदि शामिल हैं।
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बरसात में शुरू होगा काम
बोर्ड की गाइडलाइन के हिसाब से काम किया जाएगा। ओद्यौगिक क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए वन विभाग से सहयोग लेंगे तथा बरसात शुरू होते ही पौधों को रोपा जाएगा।
वीके मिश्रा, क्षेत्रीय अधिकारी, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
ये हैं क्षेत्र
जनपद में तीन औद्योगिक क्षेत्र हैं जिसमें बिजौली औद्योगिक क्षेत्र, ग्वालियर रोड औद्योगिक क्षेत्र और बिजौली ग्रोथ सेंटर शामिल है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्राधिकारी ने बताया कि हाल में नए विकसित उद्योगों के लिए एनओसी जारी करने से पहले शर्त लगाकर उन पर काम करना शुरू होगा। इसके बाद पुराने क्षेत्र में किस प्रकार से व्यवस्था बनेगी। इस पर जोर दिया जाएगा।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का मानना है कि कि प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों, वाहनों के उत्सर्जन और भवन निर्माण परियोजनाओं के कारण धूल के कण पीएम 10 की मात्रा ज्यादा है। औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन की प्रक्रिया से कार्बन और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। उसे केवल पौधरोपण से कम कर पाना संभव है। इसलिए नई गाइड लाइन जारी की है। गाइड लाइन के अनुसार ग्रीन बेल्ट की देखरेख, सुरक्षा, अनुरक्षण और अतिक्रमण से मुक्त रखने की जिम्मेदारी उसी उद्योग इकाई की होगी। ग्रीन बेल्ट बनने के बाद उद्योग जमीन का विस्तार करता है तो वह ग्रीन बेल्ट की जमीन का अधिग्रहण करने से पहले दूसरा स्थान सुझाने के साथ ही उस स्थान को हरा भरा बना होगा। इस नई गाइडलाइन के बाद प्रदूषण विभाग ने वन विभाग से उद्योगों के आसपास ग्रीन बेल्ट तैयार कराने में सहयोग मांगा है।
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इतने दायरे में बनेगी ग्रीन बेल्ट
उद्योग वर्ग उद्योग श्रेणी न्यूनतम ग्रीन बेल्ट
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लाल वृह्द 200 मीटर
मध्यम 100 मीटर
लघु 30 मीटर
नारंगी वृह्द 100 मीटर
मध्यम 20 मीटर
लघु 20 मीटर
हरा वृह्द 10 मीटर
मध्यम 10 मीटर
लघु 10 मीटर
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परियोजनाओं के लिए
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औद्योगिक क्षेत्र 500 मीटर
लैंडफिल साइट 200 मीटर
टीएसडीएफ 200 मीटर
पौधरोपने का तरीका
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- बाउंड्रीवॉल के चारों ओर 8-10 मीटर ऊंचे पौधे लगाए जाएंगे।
- पंक्तिबद्घ पौधरोपण के बाद छोटी झाड़ियों वाले पौधे लगाए जाएंगे।
- खुले क्षेत्रों में जहां पौधे लगाना संभव नहीं वहां घास लगाना जरूरी है।
- बड़ी और चौड़ी पत्तियों वाले पौधों को प्राथमिकता से रोपना होगा।
ये पौधे लगेंगे
पौधों को रोपने की प्रजाति रोपने के लिए बोर्ड ने गाइड लाइन जारी की है। उसमें बबूल, कंजी, अर्जुन, ढाक, शीशम, आंवला, जंगल जलेबी, बेर, अकेसिया, नीम, बांस, कंजी, जामुन, आम, महुआ, बेल, पीपल, बरगद, इमली, कैथा, रीठा, सगौन आदि शामिल हैं।
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बरसात में शुरू होगा काम
बोर्ड की गाइडलाइन के हिसाब से काम किया जाएगा। ओद्यौगिक क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए वन विभाग से सहयोग लेंगे तथा बरसात शुरू होते ही पौधों को रोपा जाएगा।
वीके मिश्रा, क्षेत्रीय अधिकारी, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
ये हैं क्षेत्र
जनपद में तीन औद्योगिक क्षेत्र हैं जिसमें बिजौली औद्योगिक क्षेत्र, ग्वालियर रोड औद्योगिक क्षेत्र और बिजौली ग्रोथ सेंटर शामिल है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्राधिकारी ने बताया कि हाल में नए विकसित उद्योगों के लिए एनओसी जारी करने से पहले शर्त लगाकर उन पर काम करना शुरू होगा। इसके बाद पुराने क्षेत्र में किस प्रकार से व्यवस्था बनेगी। इस पर जोर दिया जाएगा।