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जब पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं तो कैसे बनेंगे अच्छे डॉक्टर
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झांसी। बड़ी मेहनत से परीक्षा पास करने के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट मिलती है। मगर सोचिए कि वहां पढ़ाने वाले चिकित्सा शिक्षक ही न हों तो छात्र-छात्राओं पर क्या गुजरेगी। झांसी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं। पहले साल पढ़ाए जाने वाले तीन विषयों में 11 में से सिर्फ चार शिक्षक तैनात हैं। एक विषय में तो कोई चिकित्सा शिक्षक ही नहीं है।
एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई के दौरान एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री विषय पढ़ाया जाता है। बताया गया कि एनाटॉमी और फिजियोलॉजी विभाग में एक-एक प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर और दो असिस्टेंट प्रोफेसर के पद सृजित हैं। मौजूदा समय में एनाटॉमी विभाग में तीन चिकित्सा शिक्षक तैनात हैं। जबकि, फिजियोलॉजी विभाग में सिर्फ एक ही शिक्षक हैं, वो भी संविदा पर है। वहीं, बायोकेमिस्ट्री विभाग में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के एक-एक पद सृजित हैं। मौजूदा समय में यहां पर एक भी चिकित्सा शिक्षक नहीं है। ऐसे में एमबीबीएस के छात्रों को बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई कराने वाला कोई विशेषज्ञ नहीं बचा है। अन्य विषयों में भी जरूरत पड़ने पर कोई न कोई चिकित्सा शिक्षक छुट्टी पर रहता है। इससे भी पढ़ाई प्रभावित होती है।
एमबीबीएस की मान्यता पर भी खतरा
झांसी। चिकित्सा शिक्षकों की कमी की वजह से मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की मान्यता पर भी खतरा मंडराने लगा है। यदि निरीक्षण के दौरान ये स्थितियां नहीं सुधरीं तो एमबीबीएस की मान्यता भी निरस्त हो सकती है।
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बायोकेमिस्ट्री के एक चिकित्सा शिक्षक का हाल ही में ट्रांसफर हुआ है। ऐसे में डिमांस्ट्रेटर के जरिए छात्रों को पढ़ाई कराई जा रही है। रिक्त पदों के लिए संविदा पर विज्ञापन निकालने जा रहे हैं। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई के दौरान एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री विषय पढ़ाया जाता है। बताया गया कि एनाटॉमी और फिजियोलॉजी विभाग में एक-एक प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर और दो असिस्टेंट प्रोफेसर के पद सृजित हैं। मौजूदा समय में एनाटॉमी विभाग में तीन चिकित्सा शिक्षक तैनात हैं। जबकि, फिजियोलॉजी विभाग में सिर्फ एक ही शिक्षक हैं, वो भी संविदा पर है। वहीं, बायोकेमिस्ट्री विभाग में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के एक-एक पद सृजित हैं। मौजूदा समय में यहां पर एक भी चिकित्सा शिक्षक नहीं है। ऐसे में एमबीबीएस के छात्रों को बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई कराने वाला कोई विशेषज्ञ नहीं बचा है। अन्य विषयों में भी जरूरत पड़ने पर कोई न कोई चिकित्सा शिक्षक छुट्टी पर रहता है। इससे भी पढ़ाई प्रभावित होती है।
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एमबीबीएस की मान्यता पर भी खतरा
झांसी। चिकित्सा शिक्षकों की कमी की वजह से मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की मान्यता पर भी खतरा मंडराने लगा है। यदि निरीक्षण के दौरान ये स्थितियां नहीं सुधरीं तो एमबीबीएस की मान्यता भी निरस्त हो सकती है।
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बायोकेमिस्ट्री के एक चिकित्सा शिक्षक का हाल ही में ट्रांसफर हुआ है। ऐसे में डिमांस्ट्रेटर के जरिए छात्रों को पढ़ाई कराई जा रही है। रिक्त पदों के लिए संविदा पर विज्ञापन निकालने जा रहे हैं। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।