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Jhansi News: मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक की जगी उम्मीद
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- मुख्य चिकित्साधिकारी ने एनएचएम के प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन प्रोग्राम के तहत शासन को भेजा प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक (आई बैंक) के बनने की उम्मीद फिर जाग गई है। 500 बेड के अस्पताल में नेत्र बैंक बनाना तय किया गया है। सीएमओ ने नेत्र बैंक का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि नेत्र बैंक बनाने में आने वाले खर्च का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया है। कॉलेज प्राचार्य ने 500 बेड के अस्पताल में नेत्र बैंक बनाने के प्रस्ताव पर सहमति दी है। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि बुंदेलखंड के किसी भी जिले (झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर व महोबा) में नेत्र बैंक नहीं है, जिसकी बेहद जरूरत है। इसके बनने से जन्म से देखने में अक्षम लोगों की जिंदगी में रोशनी आ सकेगी। इसलिए एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के तहत इस प्रस्ताव को शासन को भेज दिया है, जिसके स्वीकृत होने की उम्मीद है।
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2010 से मेडिकल कॉलेज कर रहा था प्रयास
डॉ. जितेंद्र ने बताया कि वर्ष 2010 से मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में नेत्र बैंक बनाने के लिए प्रयास चल रहे हैं। कई बार शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया, मगर बजट स्वीकृति नहीं हुआ। कई संगठनों से भी संपर्क किया, सभी ने भरोसा दिया, मगर सफलता नहीं मिली।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक (आई बैंक) के बनने की उम्मीद फिर जाग गई है। 500 बेड के अस्पताल में नेत्र बैंक बनाना तय किया गया है। सीएमओ ने नेत्र बैंक का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि नेत्र बैंक बनाने में आने वाले खर्च का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया है। कॉलेज प्राचार्य ने 500 बेड के अस्पताल में नेत्र बैंक बनाने के प्रस्ताव पर सहमति दी है। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि बुंदेलखंड के किसी भी जिले (झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर व महोबा) में नेत्र बैंक नहीं है, जिसकी बेहद जरूरत है। इसके बनने से जन्म से देखने में अक्षम लोगों की जिंदगी में रोशनी आ सकेगी। इसलिए एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के तहत इस प्रस्ताव को शासन को भेज दिया है, जिसके स्वीकृत होने की उम्मीद है।
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2010 से मेडिकल कॉलेज कर रहा था प्रयास
डॉ. जितेंद्र ने बताया कि वर्ष 2010 से मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में नेत्र बैंक बनाने के लिए प्रयास चल रहे हैं। कई बार शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया, मगर बजट स्वीकृति नहीं हुआ। कई संगठनों से भी संपर्क किया, सभी ने भरोसा दिया, मगर सफलता नहीं मिली।
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